भारतीय पैरा एथलीट नीरज यादव 2026 के आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले सके। मुख्य कोच एस. सत्यनारायण के अनुसार, डोपिंग प्रतिबंध की अवधि पूरी नहीं होने के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिली थी।
नई दिल्ली: भारत के पैरा एथलीट और तीन बार एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके नीरज यादव का 42 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मंगलवार रात दिल्ली स्थित उनके फ्लैट में हुई इस घटना की पुष्टि भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने की। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में इसे आत्महत्या बताया गया है।
नीरज यादव भारतीय पैरा एथलेटिक्स के जाने-पहचाने खिलाड़ियों में शामिल थे। सात साल की उम्र में पोलियो के बाद होने वाले पक्षाघात से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने खेल को अपना करियर बनाया। शुरुआत में वह व्हीलचेयर टेनिस खेलते थे, लेकिन बाद में पैरा एथलेटिक्स में आए।
उन्होंने 2018 के एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक और चक्का फेंक, दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक हासिल किए।
हालांकि, वह अक्टूबर 2026 में आयोजित होने वाले आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में भी हिस्सा नहीं ले सके। उनके कोच ने बताया कि इस मामले के बाद नीरज मानसिक दबाव में थे।
कौन थे नीरज यादव?
नीरज यादव उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते थे और पैरा एथलेटिक्स की एफ55 श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करते थे। इस श्रेणी में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं जो बैठकर फील्ड इवेंट्स में हिस्सा लेते हैं। शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो जैसी स्पर्धाएं पैरा एथलेटिक्स की इन श्रेणियों का हिस्सा हैं।
नीरज को सात साल की उम्र में पोलियो के बाद होने वाले पक्षाघात की स्थिति का पता चला था। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेलों से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने 2005 से 2012 के बीच व्हीलचेयर टेनिस खेला। इसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स को अपनाया और धीरे-धीरे इस खेल में अपनी पहचान बनाई।
उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2015 का दिल्ली राज्य एथलेटिक्स मुकाबला था। इस प्रतियोगिता में उन्होंने शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीते। इन उपलब्धियों ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में आगे बढ़ने का अवसर दिया और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान मजबूत हुई।
2016 में दुबई में आयोजित फज्जा ग्रां प्री में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने पुरुषों की एफ55 श्रेणी में शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीते। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन बेहतर होता गया और वह भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम का हिस्सा बने।
दिल्ली में मिला शव
बुधवार, 28 अक्टूबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नीरज यादव का शव दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल ले जाया गया था। उनके निधन की खबर से भारतीय पैरा एथलेटिक्स जगत में शोक की लहर दौड़ गई। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने भी उनके निधन की पुष्टि की और इसे बेहद दुखद घटना बताया।
कोच सत्यनारायण के अनुसार, डोपिंग मामले में कार्रवाई के बाद भी वह नीरज के संपर्क में थे और समय-समय पर उनसे बातचीत करते रहते थे। नीरज ने कुछ महीने पहले उनसे संपर्क कर 2026 में होने वाले आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की संभावना के बारे में पूछा था।
इस पर कोच ने उन्हें बताया कि डोपिंग प्रतिबंध की अवधि पूरी नहीं होने के कारण वह चयन ट्रायल में भाग नहीं ले सकते। रिपोर्टों के अनुसार, नीरज के करियर पर इस प्रतिबंध का गहरा असर पड़ा था। हालांकि, कोच ने यह भी कहा कि नीरज किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे, इसका पूरी तरह आकलन करना मुश्किल है।
2018 एशियन पैरा गेम्स में बनाया एशियाई रिकॉर्ड
नीरज यादव के खेल करियर को अंतरराष्ट्रीय पहचान 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स से मिली। उन्होंने पुरुषों की एफ55 श्रेणी की भाला फेंक स्पर्धा में 29.84 मीटर दूर भाला फेंककर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया और भारतीय पैरा एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान स्थापित की।
यह उपलब्धि नीरज के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव थी। इससे पहले वह घरेलू प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर चुके थे, लेकिन एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने और रिकॉर्ड बनाने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनकी सफलता ने यह भी दिखाया कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खिलाड़ी लगातार मेहनत और अभ्यास के दम पर बड़े खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
नीरज ने अपने खेल सफर की शुरुआत व्हीलचेयर टेनिस से की थी। वर्ष 2005 से 2012 तक इस खेल से जुड़े रहने के बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स को अपना करियर बनाया। इसके बाद उन्होंने भाला फेंक और अन्य फील्ड स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा दिखाई। जकार्ता में मिली सफलता ने उनके आगे के करियर के लिए मजबूत आधार तैयार किया। यही वजह थी कि उन्हें भारत के प्रमुख पैरा एथलीटों में गिना जाने लगा।
हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में जीते दो स्वर्ण पदक
नीरज यादव ने 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने पुरुषों की एफ55 श्रेणी की भाला फेंक स्पर्धा और एफ54/55/56 श्रेणी की चक्का फेंक स्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया। इन उपलब्धियों के साथ एशियन पैरा गेम्स में उनके स्वर्ण पदकों की कुल संख्या तीन हो गई थी। इससे पहले उन्होंने 2018 में जकार्ता में आयोजित प्रतियोगिता में भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीता था।
हांगझोउ में मिली सफलता ने नीरज को भारत के प्रमुख पैरा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके लिए खेल पुरस्कार और सरकारी नौकरी पाने की संभावनाएं भी बनी थीं। भारतीय पैरा एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उपलब्धियों के आधार पर संबंधित नियमों के तहत पुरस्कार और सरकारी सेवाओं में अवसर मिल सकते हैं।
भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण के अनुसार, नीरज इन उपलब्धियों के बाद उत्तर प्रदेश में प्रथम श्रेणी की सरकारी नौकरी पाने की संभावना रखते थे। हालांकि, बाद में डोपिंग मामले में उन पर लगे प्रतिबंध और पदकों को रद्द किए जाने से उनके खेल करियर पर असर पड़ा।
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क्या था डोपिंग का मामला?
नीरज यादव के करियर में डोपिंग विवाद एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (एनएडीए) ने अक्टूबर 2023 में बेंगलुरु में प्रतियोगिता से बाहर लिए गए उनके नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल पाए जाने के बाद कार्रवाई शुरू की थी। स्टैनोजोलोल एक एनाबॉलिक स्टेरॉयड है, जो प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में शामिल है।
इसके बाद नीरज पर अस्थायी निलंबन लगाया गया और आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया चली। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी की प्रकाशित सूची में नीरज यादव के नाम के साथ पैरा एथलेटिक्स, स्टैनोजोलोल और चार साल की अयोग्यता का उल्लेख दर्ज है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, चार साल का प्रतिबंध 7 नवंबर 2023 से प्रभावी था।
रिपोर्टों के अनुसार, नीरज ने डोपिंग मामले की प्रक्रिया के दौरान अपने नमूने की डीएनए जांच कराने की मांग भी की थी। इस मामले की प्रक्रिया के बाद एशियन पैरालंपिक समिति ने हांगझोउ एशियन पैरा गेम्स में जीते उनके दोनों स्वर्ण पदक वापस ले लिए। इसका मतलब यह है कि 2018 में जकार्ता में जीता उनका स्वर्ण पदक और 2023 में हांगझोउ में जीते दोनों पदक एक जैसी स्थिति में नहीं रहे। बाद के दोनों पदक डोपिंग कार्रवाई के बाद रद्द कर दिए गए थे।
एशियन पैरा गेम्स में नहीं ले सके हिस्सा
नीरज यादव के लिए 2026 में आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा लेना संभव नहीं हो सका। भारतीय पैरा एथलेटिक्स टीम के मुख्य कोच के अनुसार, नीरज ने चयन ट्रायल में भाग लेने की संभावना के बारे में उनसे बात की थी, लेकिन प्रतिबंध की अवधि पूरी नहीं होने के कारण उन्हें अनुमति नहीं मिल सकी।
एक खिलाड़ी के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में हिस्सा लेना केवल पदक जीतने का अवसर नहीं होता, बल्कि अपनी तैयारी, मेहनत और प्रदर्शन को साबित करने का मौका भी होता है। नीरज के मामले में प्रतिबंध के कारण यह अवसर छिन गया। उनके कोच ने बताया कि पदकों के रद्द होने, पुरस्कार राशि से जुड़े नुकसान और नौकरी की संभावनाओं पर पड़े असर ने उन्हें परेशान किया था।
फिलहाल, उनके निधन से जुड़ी जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। उपलब्ध रिपोर्टें उनके खेल करियर, डोपिंग मामले और हाल के दिनों में बताए गए तनाव की जानकारी देती हैं, लेकिन घटना के सटीक कारणों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं देतीं। उनके करियर की उपलब्धियों और विवादों को दर्ज करते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
