Saturday, 01 August 2026
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Shraddha Walkar Murder Case: MA की परीक्षा के कारण टली आफताब की पेशी, 20 जुलाई को होनी थी सुनवाई

श्रद्धा वालकर मर्डर केस में 20 जुलाई की सुनवाई टल गई। जानिए क्यों आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की IGNOU एमए परीक्षा बनी अदालत की तारीख बदलने की वजह।

नई दिल्ली: करीब चार साल पहले देश को झकझोर देने वाला श्रद्धा वालकर हत्याकांड (Shraddha Walkar Murder Case) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई नया सबूत या अदालत का फैसला नहीं, बल्कि मुख्य आरोपी आफताब अमीन पूनावाला (Aaftab Amin Poonawala) की पढ़ाई है।

दिल्ली की एक अदालत ने 20 जुलाई को होने वाली निर्धारित सुनवाई रद्द कर दी, क्योंकि उसी दिन आफताब को इग्नू (IGNOU) की एमए (समाजशास्त्र) परीक्षा तिहाड़ जेल के परीक्षा केंद्र में देनी है।

अदालत के इस फैसले के बाद मामले ने नया कानूनी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर कानून प्रत्येक विचाराधीन कैदी (Undertrial Prisoner) को शिक्षा का अधिकार देता है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धा वालकर के परिवार और उनके वकीलों का कहना है कि लगातार टलती सुनवाई पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में और देरी कर रही है।

क्या है ताजा मामला?

दिल्ली की साकेत कोर्ट में 20 जुलाई को श्रद्धा वालकर हत्याकांड की सुनवाई निर्धारित थी। हालांकि अदालत को सूचित किया गया कि उसी दिन आरोपी आफताब अमीन पूनावाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की एमए (Sociology) परीक्षा देगा।

आफताब फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है और जेल प्रशासन की व्यवस्था के तहत उसे परीक्षा में शामिल होना है। इसी कारण अदालत ने 20 जुलाई की सुनवाई रद्द कर दी और अगली तारीख बाद में तय किए जाने की बात कही।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को भी शिक्षा जारी रखने का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार शिक्षा जैसे अवसरों तक भी विस्तारित माना गया है। इसी आधार पर कई जेलों में इग्नू और अन्य संस्थानों के माध्यम से कैदियों को पढ़ाई की सुविधा दी जाती है।

परिवार की वकील ने जताई नाराजगी

श्रद्धा वालकर के परिवार की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता सीमा समृद्धि कुशवाहा ने अदालत के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव पक्ष लगातार किसी न किसी आधार पर मुकदमे की कार्यवाही में देरी कर रहा है।

उनका कहना है कि इस तरह की बार-बार की स्थगन प्रक्रिया से मुकदमा लंबा खिंच रहा है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वह दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई (Speedy Trial) की मांग करते हुए याचिका दायर करेंगी।

सीमा समृद्धि कुशवाहा के अनुसार संविधान प्रत्येक नागरिक को त्वरित न्याय (Speedy Justice) का अधिकार देता है और ऐसे संवेदनशील मामलों में सुनवाई को अनावश्यक रूप से टालना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

श्रद्धा वालकर हत्याकांड क्या था?

यह मामला मई 2022 में हुई एक जघन्य हत्या से जुड़ा है। श्रद्धा वालकर और आफताब अमीन पूनावाला मुंबई में मिले थे। दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी और बाद में वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे।

कुछ समय बाद दोनों दिल्ली आ गए और दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में किराये के फ्लैट में रहने लगे। पुलिस जांच के अनुसार, दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। आरोप है कि 18 मई 2022 को झगड़े के दौरान आफताब ने श्रद्धा की गला दबाकर हत्या कर दी।

हत्या के बाद किए शव के टुकड़े

जांच एजेंसियों के अनुसार हत्या के बाद आफताब ने शव के कई टुकड़े किए। बताया गया कि उसने शव के टुकड़ों को रखने के लिए लगभग 300 लीटर का रेफ्रिजरेटर खरीदा और कई दिनों तक उन्हें उसमें रखा।

इसके बाद वह रात के समय दिल्ली के अलग-अलग इलाकों, विशेषकर महरौली के जंगलों में शव के हिस्सों को फेंकता रहा ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके।

यह मामला कई महीनों तक सामने नहीं आया। बाद में श्रद्धा के परिवार ने उससे संपर्क न होने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और आफताब के कथित बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।

जांच में मिले कई अहम सबूत मिले

दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। इनमें फ्लैट से बरामद खून के निशान, डिजिटल फोरेंसिक जांच, मोबाइल डेटा, खरीदारी के रिकॉर्ड, फ्रिज खरीदने से जुड़े दस्तावेज, जंगलों से बरामद मानव अवशेष और डीएनए जांच प्रमुख रहे।

जांच एजेंसियों ने यह भी बताया था कि बरामद हड्डियों और अन्य अवशेषों का डीएनए श्रद्धा वालकर के पिता के नमूनों से मेल खाता था। इसके अलावा पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी चार्जशीट का हिस्सा बनाया।

चार्जशीट में क्या-क्या आरोप लगाए गए?

दिल्ली पुलिस ने करीब 6,600 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। इसमें हत्या, सबूत मिटाने, शव के टुकड़े करने और पुलिस को गुमराह करने से जुड़े कई आरोप शामिल किए गए।

अभियोजन पक्ष (Prosecutor) के अनुसार इस मामले में 100 से अधिक गवाहों के बयान, डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज, डीएनए जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड को अदालत के सामने पेश किया गया।

आफताब पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और धारा 201 (सबूत नष्ट करना) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। चूंकि अपराध 2022 में हुआ था, इसलिए इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) नहीं बल्कि तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) के प्रावधान लागू होते हैं।

अदालत में अब तक की सुनवाई

मामले की सुनवाई पिछले कई महीनों से दिल्ली की साकेत कोर्ट में चल रही है। अभियोजन पक्ष (Prosecutor) अब तक बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज करा चुका है। इनमें पुलिस अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ, डॉक्टर, डिजिटल साक्ष्य विशेषज्ञ, फ्लैट मालिक, दुकानदार और जांच से जुड़े अन्य गवाह शामिल हैं।

हालांकि बीच-बीच में अलग-अलग कारणों से सुनवाई स्थगित भी होती रही है। कभी गवाहों की अनुपस्थिति, कभी प्रक्रियागत कारणों और अब आरोपी की एमए परीक्षा के चलते 20 जुलाई 2026 की सुनवाई भी टाल दी गई। इसी कारण पीड़ित पक्ष लगातार यह तर्क दे रहा है कि मुकदमे की गति अपेक्षा से धीमी बनी हुई है।

क्या शिक्षा का अधिकार सुनवाई से ऊपर है?

यह मामला दो संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का उदाहरण है। एक ओर किसी भी विचाराधीन कैदी को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष को त्वरित न्याय मिलने का भी संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए अदालतें परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेती हैं। इस मामले में अदालत ने परीक्षा को देखते हुए सुनवाई स्थगित कर दी, लेकिन इससे मुकदमे की मेरिट या आरोपों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सुनवाई अगली निर्धारित तारीख पर सामान्य रूप से आगे बढ़ेगी।

दोष सिद्ध हुआ, तो क्या हो सकती है सजा?

आफताब अमीन पूनावाला पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि अदालत में Prosecutor सभी आरोप संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहता है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उसे आजीवन कारावास या दुर्लभतम मामलों (Rarest of Rare) में मृत्युदंड तक की सजा सुनाई जा सकती है।

हालांकि अंतिम फैसला केवल अदालत ही सभी गवाहों, फोरेंसिक साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद करेगी। जब तक निर्णय नहीं आता, तब तक कानून की नजर में आरोपी को दोषी नहीं माना जाता।

अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर

20 जुलाई की सुनवाई टलने के बाद अब पीड़ित परिवार और देशभर की नजरें अगली अदालत की तारीख पर टिकी हैं। अधिवक्ता सीमा समृद्धि कुशवाहा पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई की मांग करेंगी, ताकि मुकदमे में और देरी न हो।

दूसरी ओर बचाव पक्ष कानून के तहत उपलब्ध सभी अधिकारों का उपयोग कर रहा है। ऐसे में यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि न्याय केवल निष्पक्ष ही नहीं, बल्कि समय पर भी मिलना चाहिए।

श्रद्धा वालकर हत्याकांड आज भी देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल है। अदालत की अंतिम सुनवाई और फैसले का इंतजार केवल पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा देश कर रहा है, क्योंकि यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें :- Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को 3 महीने की जेल, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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