नई दिल्ली: उत्तराखंड के चम्पावत जिले में स्थित पूर्णागिरि मंदिर देश के प्रमुख सिद्धपीठों में से एक है। टनकपुर के पास लगभग 3,000 फीट ऊँचे अन्नपूर्णा शिखर पर बसे इस मंदिर की धार्मिक महत्ता और प्राकृतिक सुंदरता दोनों ही इसे विशेष बनाते हैं। यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
धार्मिक महत्व
पूर्णागिरि मंदिर को 108 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहाँ माता सती की नाभि गिरी थी जिसके कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है और यहाँ साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है।
विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है। इस समय लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए कठिन यात्रा कर यहाँ पहुँचते हैं।
पूर्णागिरि मंदिर तक पहुँचने के लिए सबसे पहले टनकपुर पहुँचना होता है ।
कैसे पहुँचें
टनकपुर से थुल्लीगाड़ तक लगभग 20 किलोमीटर की दूरी वाहन से तय की जाती है। इसके बाद करीब 3–3.5 किलोमीटर का कठिन पैदल ट्रैक चढ़ना पड़ता है, जिसमें 3–4 घंटे का समय लग सकता है। यह यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ साहस और धैर्य की भी परीक्षा लेती है।
मंदिर परिसर से काली नदी और नेपाल के खूबसूरत गाँवों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। पहाड़ों की ठंडी हवा और हरियाली भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।
रेल मार्ग निकटतम रेलवे स्टेशन टनकपुर है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग टनकपुर तक बस या निजी गाड़ियां से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
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ध्यान देने वाली बातें
- चढ़ाई कठिन होती है, इसलिए आरामदायक जूते पहनना बेहद जरूरी है।
- पानी और हल्का भोजन साथ रखें।
- भीड़ के समय सावधानी बरतें, खासकर नवरात्रि में।
- मंदिर के आसपास धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं, जहाँ ठहरने की व्यवस्था की जा सकती है।
पूर्णागिरि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और साहस का अद्भुत संगम है। यहाँ की यात्रा व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि जीवन में एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता भी भर देती है। अगर आप उत्तराखंड की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पूर्णागिरि मंदिर को अपनी सूची में जरूर शामिल करें।
