नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे
हौसले बुलंद हों तो आसमान की ऊंचाई भी कम लगने लगती है। देहरादून की बेटी मुस्कान बिष्ट ने इस बात को सच कर दिखाया है। बॉक्सिंग रिंग में विरोधियों को ‘नॉकआउट’ करने वाली नेशनल बॉक्सर मुस्कान ने सीबीएसई 10वीं के नतीजों में भी ‘सुपर पंच’ मारा है। बंजारावाला की इस जांबाज खिलाड़ी ने 95.6% अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि खेल और पढ़ाई, दोनों मोर्चों पर एक साथ फतह हासिल की जा सकती है।
बचपन में सिर से उठा पिता का साया
मुस्कान की यह कामयाबी सिर्फ किताबी नहीं है, बल्कि कड़े संघर्ष की उपज है। छोटी उम्र में ही पिता को खोने के बाद मुस्कान के लिए राह आसान नहीं थी। लेकिन उनकी मां कमला बिष्ट (सीनियर ऑफिसर, राज्य कर विभाग) ने पहाड़ जैसा हौसला दिखाया। मां के संघर्षों को मुस्कान ने अपनी ताकत बनाया और आज नतीजा सबके सामने है।
मुस्कान का ‘पावर पंच’: मेडल भी और नंबर भी
सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल की छात्रा मुस्कान खेल के मैदान की भी मंझी हुई खिलाड़ी हैं नेशनल लेवल पर अब तक 4 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुकी हैं। स्टेट लेवल पर 7 राज्य स्तरीय पदकों पर कब्जा जमाया। अनुशासन की बात करें तो सुबह-शाम बॉक्सिंग रिंग में पसीना बहाना और दिन भर स्कूल-किताबों के बीच तालमेल बिठाना ही उनकी सफलता का मंत्र है।
सपना: नीले आसमान में उड़ने की तैयारी
मुस्कान केवल बॉक्सिंग रिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। उनका लक्ष्य बेहद स्पष्ट है—वे भारतीय वायुसेना (IAF) में ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। मुस्कान कहती हैं, बॉक्सिंग ने मुझे हार न मानना सिखाया, और वही जिद पढ़ाई में काम आई। अगर लक्ष्य साफ हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।”
मुस्कान की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो संसाधनों या परिस्थितियों का रोना रोते हैं। उन्होंने साबित किया कि जिंदगी के रिंग में असली ‘नॉकआउट पंच’ अनुशासन और मेहनत से ही लगता है।
