वृंदावन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात, जीवन मूल्यों पर हुई चर्चा

ब्रज दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के वृंदावन कार्यक्रमों ने ध्यान खींचा है, प्रेमानंद महाराज से हुई मुलाकात और कार्यक्रम से जुड़ी अहम बातें जानें

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की वृंदावन यात्रा इन दिनों खूब चर्चा में है। उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय धार्मिक दौरे के दौरान आज 20 मार्च 2026 को उन्होंने वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की।सुबह 7:30 बजे राष्ट्रपति आश्रम पहुंचीं, जहां ‘राधे-राधे’ के जयकारों और मंत्रोच्चार के साथ उनका भव्य स्वागत हुआ। मुलाकात में उन्होंने संत महाराज का आशीर्वाद लिया और लगभग 27 मिनट तक एकांत में बातचीत की। चर्चा का मुख्य विषय आध्यात्मिक जीवन, सेवा, जनकल्याण, संयम, करुणा और समाज के लिए नेक काम रहे। राष्ट्रपति ने संत के सरल जीवन और उपदेशों की बहुत सराहना की।

संत से मुलाकात का उद्देश्य

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति का यह दौरा केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ब्रज क्षेत्र की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ना भी है। वृंदावन में संतों से मिलना, उनका आशीर्वाद लेना और वहां के धार्मिक माहौल को समझना इस यात्रा का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

सादगी भरे माहौल में बातचीत

वृंदावन के आश्रम में हुई इस मुलाकात का माहौल बेहद सरल और सादगीपूर्ण रहा। राष्ट्रपति ने संत का आशीर्वाद लिया और आश्रम की परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश की। इस दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने उन्हें आध्यात्मिक जीवन के महत्व के बारे में बताया।

जीवन के मूल्यों पर हुई बातचीत

सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान मानव जीवन के उद्देश्य, सेवा और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर बातचीत हुई। संत ने जीवन को बेहतर बनाने के लिए संयम, करुणा और भक्ति के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने भी इन विचारों को ध्यान से सुना और अपनी रुचि दिखाई।

ब्रज दौरे का पूरा कार्यक्रम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने ब्रज दौरे के दौरान मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के प्रमुख धार्मिक और सामाजिक स्थलों का दौरा करेंगी। उनके कार्यक्रम में वृंदावन में नीम करोली बाबा के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करना, रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में नए ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन करना और साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित वात्सल्य ग्राम जाना शामिल है, जहां वे संस्था के कार्यों को समझेंगी। इसके अलावा, उनका गोवर्धन के दानघाटी मंदिर में पूजा-अर्चना करने और पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा में भाग लेने का भी कार्यक्रम है, जो इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक हिस्सा माना जाता है।

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