“पाकिस्तान किसी भ्रम में न रहे”: ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सख्त चेतावनी

“पाकिस्तान किसी भ्रम में न रहे”: ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सख्त चेतावनी

“यह मज़ाक नहीं, बल्कि विफलता की स्वीकारोक्ति है” – राजनाथ सिंह

नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025


शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को दो टूक संदेश दिया कि भारत की शक्ति को लेकर पड़ोसी देश किसी भी तरह का भ्रम न पाले, खासकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद। उन्होंने कहा कि हालिया सीमा पार की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भारत सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए अडिग और तैयार है।

सिंह ने बिना नाम लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के हालिया बयानों की कड़ी आलोचना की। मुनीर ने परमाणु हथियारों और पाकिस्तान की तुलना “डम्पर ट्रक” से की थी। राजनाथ ने इसे पाकिस्तान की विफलताओं की स्वीकारोक्ति और “लूटेरी मानसिकता” का प्रतीक बताया। इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए उन्होंने कहा, “पाक सेना प्रमुख ने अनजाने या जानबूझकर उस लूटेरी मानसिकता को उजागर किया है, जिसने पाकिस्तान को जन्म से ही परेशान किया है।”

राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने हमारी दृढ़ता पहले ही दिखा दी है। हम पाकिस्तान को भारत की ताकत को लेकर किसी भ्रम में नहीं रहने देंगे।” यह ऑपरेशन 7 मई को उन आतंकवादी ठिकानों पर किया गया था, जो पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में स्थित थे। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोग मारे गए थे) के जवाब में की गई थी। चार दिनों तक संघर्ष के बाद, 10 मई को दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई।

मुनीर द्वारा पाकिस्तान को “कंकड़ भरे डम्पर ट्रक” और भारत को “मर्सिडीज” कहे जाने पर राजनाथ ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “यदि दो देश एक साथ आज़ाद हुए और एक ने दूरदर्शिता और नीतियों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को स्पोर्ट्स कार की तरह आगे बढ़ाया, जबकि दूसरा विफलता में ही अटका रहा – तो यह उनकी अपनी गलती है। यह मज़ाक नहीं, बल्कि स्वीकारोक्ति है।”

सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की नीति प्रभुत्व स्थापित करने की नहीं बल्कि वैश्विक शांति और सहयोग की है। उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा में शक्ति का मापदंड आदेश देने की क्षमता नहीं, बल्कि देखभाल करने और वैश्विक हित में योगदान देने की प्रतिबद्धता है।”

इस मंच का उपयोग करते हुए रक्षा मंत्री ने विदेशी कंपनियों को भारत के रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और मजबूत रक्षा क्षमता दोनों पक्षों के लिए अवसर लेकर आती हैं।

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