Monday, 12 October 2026
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जंतर-मंतर अब नहीं रहेगा प्रदर्शन स्थल! दिल्ली पुलिस ने बताए तीन वैकल्पिक स्थान, फैसले पर हाईकोर्ट में सुनवाई कल

दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर बहस तेज कर दी है। याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक जगह की उपलब्धता का मुद्दा उठाया है। हाईकोर्ट 13 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करेगा, जबकि पुलिस ने तीन अन्य स्थलों का उल्लेख किया है।

नई दिल्ली: दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के लिए लंबे समय से इस्तेमाल होने वाला जंतर-मंतर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दिल्ली पुलिस के इस स्थल को प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगहों की सूची से हटाने और इसके स्थान पर तीन अन्य स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने की व्यवस्था से जुड़ी खबरों ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है। इस बीच, फैसले को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई है। अदालत मंगलवार, 13 अक्टूबर को इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

मामला केवल एक प्रदर्शन स्थल के बदलने तक सीमित नहीं है। इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि राष्ट्रीय राजधानी में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर प्रशासन किस सीमा तक प्रतिबंध लगा सकता है।

जंतर-मंतर पर हाल के दिनों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध हुआ था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित प्रदर्शन के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। इसके बाद प्रदर्शन स्थलों और पुलिस की अनुमति से जुड़े नियमों पर बहस तेज हो गई।

जंतर-मंतर की जगह कहां कर सकेंगे प्रदर्शन?

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया है। इसके बाद प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है।

प्रदर्शन के लिए निर्धारित तीन स्थान हैं:

  1. रामलीला मैदान: मध्य दिल्ली में स्थित यह मैदान बड़े सार्वजनिक आयोजनों और राजनीतिक रैलियों के लिए जाना जाता है।
  2. बुराड़ी मैदान: बाहरी दिल्ली में स्थित इस मैदान को प्रदर्शन और जनसभाओं के लिए निर्धारित किया गया है।
  3. सीबीडी मैदान: पूर्वी दिल्ली में स्थित यह मैदान भी विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए नए निर्धारित स्थलों में शामिल है।

इस फैसले के लागू होने के बाद जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को निर्धारित वैकल्पिक स्थलों पर कार्यक्रम करने के लिए संबंधित अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी। हालांकि, प्रदर्शन के लिए लागू शर्तों, अनुमति प्रक्रिया और प्रतिबंधों से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आदेश को देखना जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अगर प्रशासन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देता और कोई दूसरा निर्धारित स्थान भी उपलब्ध नहीं कराता, तो शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट मंगलवार को दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इनमें एक याचिका जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद किए जाने के कथित फैसले से संबंधित है। दूसरी याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले सप्ताहांत हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ बाहरी लोगों ने प्रदर्शनकारियों को परेशान किया।

मामले को तत्काल सुनवाई के लिए पेश करते हुए वकील ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के लिए कोई वैकल्पिक स्थान निर्धारित न होने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस विवाद से जुड़े मुद्दों पर विचार कर रहा है और केंद्र सरकार से हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। इस वजह से हाईकोर्ट के सामने यह सवाल भी है कि मामले के किन पहलुओं पर अलग से विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और दिल्ली में कानून-व्यवस्था से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बीच सुप्रीम कोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही, पुलिस कार्रवाई और विरोध के अधिकार से संबंधित मुद्दे न्यायिक विचार के दायरे में आए हैं।

ऐसे मामलों में अदालतों को कई पहलुओं के बीच संतुलन बनाना होता है। एक ओर नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन को यातायात, सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं के संचालन का ध्यान रखना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार से हलफनामा मांगे जाने का उल्लेख हाईकोर्ट की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्ट में भी किया गया है। इससे साफ है कि जंतर-मंतर विवाद केवल स्थानीय प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है, बल्कि इसके व्यापक कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है।

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CJP के प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद

जंतर-मंतर को लेकर मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में 10 और 11 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन भी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे।

प्रदर्शन के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया और अलग-अलग इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए। 57 मेट्रो स्टेशन भी अस्थायी रूप से बंद किए गए थे। इन कदमों को लेकर राजनीतिक और नागरिक समूहों की ओर से आलोचना भी हुई।

दिल्ली पुलिस ने अपने कदम के पीछे प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जोड़कर देखा।

जंतर-मंतर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

दिल्ली के केंद्र में स्थित जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। यहां विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों, कर्मचारी संघों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया है।

राष्ट्रीय राजधानी में होने के कारण इस स्थल पर होने वाले प्रदर्शन मीडिया और राजनीतिक नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करते हैं। संसद, सरकारी कार्यालयों और अन्य प्रमुख संस्थानों के नजदीक होने से यहां आयोजित विरोध-प्रदर्शनों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती रही है।

जंतर-मंतर का महत्व केवल भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। कई संगठनों के लिए यह ऐसा स्थान रहा है जहां वे अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से सामने रख सकते हैं। यहां प्रदर्शन आयोजित करने से उन्हें मीडिया कवरेज और व्यापक जनचर्चा का अवसर मिलता है।

यदि प्रदर्शनकारियों को शहर के दूसरे हिस्सों में भेजा जाता है, तो उनके लिए वहां पहुंचने, लोगों को जुटाने और अपनी बात को सार्वजनिक विमर्श तक पहुंचाने की प्रक्रिया बदल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि वैकल्पिक स्थान कितने सुलभ हैं और वहां आयोजन के लिए किस तरह की अनुमति दी जाती है।

क्या हो सकते हैं प्रशासनिक कारण?

दिल्ली में किसी बड़े प्रदर्शन के दौरान यातायात बाधित होने, भीड़ को नियंत्रित करने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती रहती है। खासकर राजधानी के केंद्रीय हिस्से में राजनीतिक गतिविधियों के दौरान पुलिस को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या, आसपास की सड़कों पर यातायात, सरकारी कार्यालयों की आवाजाही और सुरक्षा संबंधी जरूरतें प्रशासन के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। यही वजह है कि प्रदर्शन के लिए स्थान और समय निर्धारित करने की व्यवस्था कई शहरों में लागू होती है।

लेकिन किसी प्रशासनिक कदम को उचित ठहराने के लिए केवल सामान्य कानून-व्यवस्था संबंधी तर्क पर्याप्त नहीं माने जा सकते। यह भी महत्वपूर्ण है कि लगाए गए प्रतिबंध जरूरी हों, उनका दायरा उचित हो और नागरिकों के अधिकारों पर अनावश्यक असर न पड़े।

जंतर-मंतर के मामले में भी यही सवाल सामने है। यदि प्रदर्शन को किसी दूसरे स्थान पर आयोजित करने की व्यवस्था की जाती है, तो यह देखना होगा कि क्या वह स्थान प्रदर्शनकारियों के लिए व्यावहारिक है और क्या वहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने के अधिकार की गारंटी देता है।

हालांकि, ये अधिकार पूर्ण या असीमित नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत निर्धारित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी इन प्रतिबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण आधारों में शामिल है।

इसका अर्थ है कि नागरिकों को हर जगह और हर परिस्थिति में अपनी पसंद के स्थान पर प्रदर्शन करने का असीमित अधिकार नहीं है। प्रशासन सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नियम बना सकता है। लेकिन इन नियमों को लागू करते समय शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को पूरी तरह अप्रभावी बना देना भी सवालों के घेरे में आ सकता है।

वैकल्पिक स्थानों की उपयोगिता पर भी होगी चर्चा

रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान जैसे वैकल्पिक स्थानों का उल्लेख इस बहस को व्यावहारिक दिशा देता है। लेकिन इन जगहों की उपयोगिता का आकलन करने के लिए कई बातों को देखना जरूरी है।

पहला, क्या वहां सार्वजनिक परिवहन के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है? दूसरा, क्या बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने के लिए पर्याप्त जगह है? तीसरा, क्या वहां पानी, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं? चौथा, क्या इन स्थानों पर अनुमति देने की प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध है?

यदि प्रशासन वैकल्पिक स्थानों को प्रभावी विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है, तो इन सवालों का जवाब देना भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि दिल्ली में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण विरोध का अवसर उपलब्ध कराने के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाता है। जंतर-मंतर का भविष्य केवल एक स्थान के इस्तेमाल का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह भी तय करेगा कि राष्ट्रीय राजधानी में नागरिकों को अपनी मांगें सार्वजनिक रूप से रखने के लिए किस तरह की व्यवस्था उपलब्ध रहती है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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