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RBI का बड़ा कदम, ₹10 और ₹20 के Polymer Notes का होगा फील्ड ट्रायल

भारत में Currency को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। RBI ₹10 और ₹20 के Polymer Notes का Trial करेगा। जानिए क्या ये Paper Notes से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ होंगे।

नई दिल्ली: भारत में नोटों का रंग और डिजाइन बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब देश की Currency के कागज के स्थान पर अन्य मटेरियल का उपयोग करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। Reserve Bank of India (RBI) अब ₹10 और ₹20 के Polymer Banknotes का Field Trial करने की तैयारी में है।

केंद्र सरकार ने RBI के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत दोनों Denominations के पॉलीमर नोट का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि, इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि भारत में Paper Currency अचानक बंद होने जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि Polymer Notes को फिलहाल मौजूदा Paper Notes के साथ जारी करने की योजना है।

इस फैसले ने भारत में करेंसी के भविष्य को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। आखिर Polymer Notes क्या होते हैं? क्या ये वास्तव में Plastic से बने होते हैं?  Paper Notes की तुलना में इनमें क्या खास है? क्या इनसे नकली नोटों पर लगाम लग सकती है? क्या इनकी वजह से सरकार और RBI का Currency Printing पर खर्च कम होगा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या भारत भी Australia, Canada और UK जैसे देशों की तरह बड़े पैमाने पर Polymer Currency की ओर बढ़ सकता है?

इन सवालों का जवाब समझने के लिए RBI के मौजूदा Trial और दुनिया में Polymer Banknotes के अनुभव को समझना जरूरी है।

₹10 और ₹20 के कितने Polymer Notes का होगा Trial?

केंद्र सरकार ने लोकसभा में दी गई जानकारी में बताया है कि RBI के Central Board की सिफारिश के आधार पर ₹10 और ₹20 के Polymer Banknotes के Field Trial का प्रस्ताव भेजा गया था। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है।

योजना के तहत ₹10 के एक अरब और ₹20 के एक अरब Polymer Notes, यानी कुल दो अरब नोट, Field Trial के लिए प्रस्तावित हैं। इन दोनों Denominations की कुल Face Value ₹3,000 करोड़ होगी।

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि ₹10 और ₹20 के सभी पेपर नोटों को तुरंत पॉलीमर करेंसी से बदल दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर करेंसी को Paper-substrate Banknotes के साथ जारी करने की योजना है और फिलहाल पेपर करेंसी को पूरी तरह हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

इसलिए आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फिलहाल Replacement नहीं, बल्कि Trial है। Trial के दौरान यह देखा जाएगा कि भारत के अलग-अलग मौसम, तापमान, नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल में पॉलीमर नोट कैसा प्रदर्शन करते हैं।

RBI पहले भी कर चुका है Polymer Notes का प्रयोग

भारत में पॉलीमर करेंसी का विचार पहली बार सामने नहीं आया है। RBI इससे पहले भी इस दिशा में कदम उठा चुका है।

2009 में RBI ने ₹10 के पॉलीमर नोटों के लिए टेंडर आमंत्रित किया था। बाद में ऐसे नोटों के Field Trial की योजना बनाई गई थी। 2014 में सरकार ने संसद में बताया था कि ₹10 के करीब एक अरब प्लास्टिक नोटों को पांच शहरों कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर में ट्रायल के लिए इस्तेमाल करने की योजना थी।

इन शहरों का चयन भी रणनीतिक था। भारत के अलग-अलग जलवायु क्षेत्र (Climatic Zones) को ध्यान में रखते हुए इन जगहों को चुना गया था, ताकि यह देखा जा सके कि पॉलीमर के नोट गर्म और आर्द्र तटीय इलाकों से लेकर ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों तक अलग-अलग परिस्थितियों में कैसे टिकते हैं।

हालांकि, यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी और कुछ तकनीकी (Technical) तथा कार्यात्मक (Operational) समस्याओं के कारण परीक्षण को रोक दिया गया। अब करीब डेढ़ दशक बाद Polymer Currency को लेकर फिर से कदम उठाया जा रहा है।  

इस बार RBI की तैयारी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित दिखाई दे रही है। जुलाई 2026 में RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Pvt Ltd (BRBNMPL) ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए वैश्विक निविदा (Global Tender) भी जारी किया। इन Sheets में Security Features को शामिल किया जाना है।

Polymer Note आखिर होता क्या है?

नाम से भले ही इसे आम बोलचाल में Plastic Note कहा जाता है, लेकिन Polymer Banknote सामान्य Plastic Sheet जैसा नहीं होता। इसे विशेष प्रकार के Durable Polymer Substrate से तैयार किया जाता है।

पेपर करेंसी की तुलना में इसकी सतह ज्यादा मजबूत होती है और यह नमी तथा गंदगी के प्रति अधिक प्रतिरोधी (Resistant) होती है। यही कारण है कि Polymer Notes लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

UK के Bank of England के अनुसार, उसके Polymer Notes Paper Notes की तुलना में कम से कम लगभग ढाई गुना अधिक लंबे समय तक चल सकते हैं। पॉलीमर नोटों की चिकनी सतह उन्हें धूल और नमी के प्रति भी अधिक प्रतिरोधी बनाती है।

भारत जैसे देश में इसका महत्व और बढ़ जाता है, जहां छोटे Denomination के नोट अक्सर बहुत तेजी से खराब हो जाते हैं। ₹10 और ₹20 के नोट रोजमर्रा के लेन-देन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। ये नोट दुकानों, सार्वजनिक परिवहन, छोटे कारोबार और Cash Transactions में लगातार हाथ बदलते रहते हैं।

ऐसे में इनकी Durability बढ़ने से RBI को पुराने और खराब नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम हो सकती है।

पेपर से पॉलीमर पर जाने का फायदा

पॉलीमर करेंसी के पक्ष में सबसे मजबूत तर्क इसकी Durability है।

पेपर नोट पानी, पसीने, नमी और लगातार मोड़े जाने से जल्दी खराब हो सकते हैं। इसके विपरीत पॉलीमर नोटों को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे सामान्य इस्तेमाल में ज्यादा समय तक टिक सकें।

इसका सीधा फायदा यह हो सकता है कि RBI को खराब नोटों को जल्दी-जल्दी वापस लेकर नए नोट छापने की जरूरत कम पड़े। यानी लंबे समय में मुद्रा प्रबंधन (Currency Management) की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि पॉलीमर नोट बनाना शुरू से ही सस्ता होगा। इनका उत्पादन करने के लिए अलग तरह की तकनीकी, कच्चे माल, छपाई के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा प्रणालियों की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए असली आर्थिक फायदा तभी स्पष्ट होगा, जब परीक्षण के बाद इनकी पूरी जीवन चक्र लागत का कागजी नोटों से तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।

क्या Polymer Notes ज्यादा सुरक्षित होंगे?

पॉलीमर नोटों का एक और बड़ा फायदा उनकी सुरक्षा विशेषताओं को लेकर माना जाता है।

इनमें Transparent या See-through Windows, Holograms और अन्य Advanced Security Features को शामिल करना संभव होता है। Bank of England के अनुसार, पॉलीमर नोटों में मौजूद कुछ विशेष सुरक्षा विशेषताएँ होती हैं जीससे असली और नकली नोट की पहचान संभवतः आसान होती है।

भारत में नकली करेंसी को रोकना हमेशा से RBI और सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रही है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में Currency Printing पर ₹4,875 करोड़ खर्च हुए, जबकि इसी अवधि में जांट किए गए फेक नोटों की संख्या भी बढ़ी थी।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि Polymer Notes से नकली नोटों की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। Counterfeiters समय के साथ नई तकनीक विकसित कर सकते हैं। फिर भी, बेहतर सुरक्षा विशेषताएँ नकली नोट तैयार करना अधिक कठिन बना सकते हैं।

नमी, पानी और गंदगी से ज्यादा सुरक्षा

भारत में बारिश और नमी वाले इलाकों में नोटों के जल्दी खराब होने की समस्या आम है। पेपर नोट पानी लगने या ज्यादा नमी के कारण कमजोर हो सकते हैं।

Polymer Notes की चिकनाई और गैर-छिद्रपूर्ण सतह (Non-porous Surface) उन्हें पानी और गंदगी के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाती है। इसका मतलब है कि छोटे Denomination के नोटों की Physical Condition लंबे समय तक बेहतर रह सकती है।

हालांकि, Polymer Notes पूरी तरह Waterproof या Indestructible नहीं होते। Bank of England भी स्पष्ट करता है कि Polymer Notes मजबूत होने के बावजूद पूरी तरह नष्ट न होने वाले नहीं हैं।

पर्यावरण के लिए फायदा या नई चुनौती?

Polymer Currency को लेकर पर्यावरणीय बहसभी महत्वपूर्ण है। एक तरफ, Polymer Notes लंबे समय तक चलते हैं। इसलिए कम बार नए नोट बनाने और पुराने नोटों को नष्ट करने की जरूरत पड़ सकती है। इससे मुद्रा उत्पादन से जुड़े संसाधनों की खपत कम हो सकती है।

दूसरी तरफ, Polymer एक Plastic-based Material है। इसलिए इसके इस्तेमाल और जीवन के अंत में Recycling का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

अगर पुराने Polymer Notes को प्रभावी तरीके से Recycle किया जाए, तो उनका Environmental Impact कम किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए एक मजबूत Recycling System जरूरी होगा।

इसलिए भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि Polymer Currency अपनाने के साथ-साथ उसके End-of-Life Management की व्यवस्था भी विकसित की जाए।

भारत में Cash की भूमिका

Digital Payments और UPI के तेज विस्तार के बावजूद भारत में कैश की भूमिका खत्म नहीं हुई है।

RBI के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश में Currency in Circulation का Value सालाना आधार पर बढ़कर करीब ₹41.23 लाख करोड़ हो गया था। इसका मतलब है कि डिजिटल भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद कैश की मांग बनी हुई है।

इसलिए Polymer Currency का Trial Digital Payments को खत्म करने की दिशा में कदम नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य कैश को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाना है।

दुनिया के किन देशों में चलते हैं Polymer Notes?

भारत से पहले कई देश पॉलीमर मुद्रा अपना चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और मैक्सिको जैसे देश शामिल हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुसार, दुनिया के कई देशों में पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल हो रहा है।

1) ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया को पॉलीमर बैंक नोटों की शुरुआत करने वाला पहला देश माना जाता है। उसने 1988 में पॉलीमर मुद्रा जारी की थी। इसके बाद कई अन्य देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया।

2) कनाडा

कनाडा ने भी अपनी मुद्रा को धीरे-धीरे पॉलीमर सबस्ट्रेट पर स्थानांतरित किया। कनाडाई पॉलीमर नोटों में उन्नत सुरक्षा विशेषताओं और पारदर्शी खिड़कियों जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

3) यूनाइटेड किंगडम

यूनाइटेड किंगडम ने पॉलीमर मुद्रा को चरणबद्ध तरीके से अपनाया। बैंक ऑफ इंग्लैंड ने पॉलीमर £5 का नोट सितंबर 2016 में जारी किया। इसके बाद पॉलीमर £10 का नोट 2017 में आया और £20 का नोट 2020 में जारी किया गया। वर्तमान में बैंक ऑफ इंग्लैंड के चारों चलन वाले मूल्यवर्ग £5, £10, £20 और £50 पॉलीमर पर छपे हैं।

4) न्यूजीलैंड और सिंगापुर

न्यूजीलैंड और सिंगापुर भी उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने पॉलीमर बैंक नोटों को अपनाया है। इन देशों में भी बेहतर टिकाऊपन और सुरक्षा को इसके प्रमुख कारणों में गिना जाता है।

Polymer Currency के सामने क्या चुनौतियां होंगी?

1) उत्पादन लागत (Production Cost): पॉलीमर नोटों की शुरुआती निर्माण लागत कागजी नोटों से अधिक हो सकती है।

2) पुनर्चक्रण (Recycling): पुराने पॉलीमर नोटों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से पुनर्चक्रित करना जरूरी होगा।

3) बुनियादी ढांचा (Infrastructure): ATMs, Cash Counters और Currency Processing Machines को नए नोटों के अनुसार ढालना पड़ सकता है।

4) जलवायु परीक्षण (Climate Testing): भारत की भौगोलिक और जलवायु विविधता बहुत बड़ी है। केरल की नमी, राजस्थान की गर्मी और हिमालयी क्षेत्रों की ठंड में नोटों का प्रदर्शन अलग हो सकता है।

5) जनता द्वारा स्वीकार्यता (Public Acceptance): लोगों को नए नोटों की अलग बनावट और रख-रखाव की आदत डालने में भी समय लग सकता है।

इसके अलावा, Polymer Notes के Production के लिए इस्तेमाल होने वाले Material और Security Substrate की Supply Chain भी महत्वपूर्ण होगी। भारत को इस क्षेत्र में सुरक्षित और भरोसेमंद Procurement व्यवस्था विकसित करनी होगी।

क्या भारत में सभी नोट Polymer हो जाएंगे?

सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि Polymer Notes को Paper Currency के साथ जारी करने का प्रस्ताव है और Paper Notes को पूरी तरह हटाने की कोई योजना नहीं है। इसलिए आने वाले समय में भारत में दोनों तरह की Currency साथ-साथ चल सकती है।

₹10 और ₹20 के Field Trial का उद्देश्य भी यही समझना है कि Polymer Currency भारतीय परिस्थितियों में कितना प्रभावी साबित होती है। Trial के परिणामों के आधार पर ही आगे की नीति तय होने की संभावना है।

एक तरफ भारत के सामने बढ़ती Cash Circulation, पुराने नोटों को बदलने की लागत और Currency Security जैसी चुनौतियां हैं। दूसरी तरफ Digital Payments के बावजूद करोड़ों लोगों के लिए Cash आज भी रोजमर्रा के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसे में Polymer Notes भारत को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित Cash System की ओर ले जा सकते हैं। लेकिन इस बदलाव की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि Polymer Notes कितने मजबूत हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या भारत इन्हें बड़े पैमाने पर किफायती, सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और व्यावहारिक तरीके से इस्तेमाल कर सकता है।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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