नई दिल्ली: देश की मीडिया के अब ऐसे हालात आ गए हैं कि मणिपुर और देश के बाकी हिस्सों में जो घटनाए हो रही उस पर देश के बड़े बड़े पत्रकार अपने ए सी वाले रूम में बैठ कर प्राइम टाइम में झालमुरी के उपर चर्चा की जा रही है।
वहीं देश के कई हिस्सों में हो रही घटनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है।
मीडिया चैनल में दिखाया जा रहा है झाल पूरी और उसका इतिहास और उसी को बड़ी खबर बनाकर आम जनता को दिखाया जा रहा है।
भाई सवाल यह नहीं है कि कोई क्या खा रहा है सवाल यह है कि क्या देश की मीडिया के पास यही मुद्दे हैं बात करने के लिए
जब देश के कई हिस्सों में लोग हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई और जरूरी सुविधाओं की कमी से परेशान हो रहे हैं वहां मीडिया का ध्यान इस तरह की हल्की फुल्की खबरों को लोगों के सामने परोस रहा है।
आज हालात ऐसे हो गए हैं कि धुरंधर जैसी मूवी को भी इस तरह दिखाया जाता है जैसे वही देश का सबसे बड़ा मुद्दा हो जबकि असल में जो मुद्दे होते हैं।
उनको यूटूब पर आए एड की तरहा स्किप कर दिया जाता है और देश के असल मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। खेल और हल्की खबरें अपनी जगह सही हैं लेकिन जब वे गंभीर मुद्दों को दबाने लगें, तब सवाल उठना जरूरी हो जाता है।
