Monday, 03 August 2026
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“हैलो बंजारा—चलो दिल्ली” अभियान का दिल्ली में आगाज़; समुदाय ने भूमि अधिकार, राष्ट्रीय मान्यता और कल्याण योजनाओं की उठाई आवाज़

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में देशभर के बंजारा प्रतिनिधियों ने मूलभूत सुविधाओं, ऐतिहासिक भूमि मुआवजे, भाषाई मान्यता और सामाजिक–आर्थिक सुधारों की माँग तेज़ की।

नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025:

राष्ट्रीय राजधानी में आज “हैलो बंजारा – चलो दिल्ली / दिल्ली आओ बंजारा – बजाओ नंगड़ा” अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। बंजारा भारत और नवगठित अखिल भारतीय बंजारा महा सेवा संघ द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए बंजारा समुदाय के नेताओं और प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। इस मंच से समुदाय ने अपनी दीर्घकालिक समस्याओं, उपेक्षित विकास कार्यों और पहचान संबंधी मुद्दों को केंद्र सरकार तक सामूहिक रूप से पहुँचाने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम में ‘बंजारा भारत’ के संरक्षक और पूर्व सांसद रविंद्र नायक ने कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी लगभग बीस राज्यों में फैले बंजारा टांडे, नगले और डेरे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा जैसी जरूरतें आज भी अधूरी हैं। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक रूप से एकजुट यह व्यापक समुदाय अलग-अलग राज्यों में SC, ST, OBC और VJNT श्रेणियों में विभाजित है, जिसके कारण इसका राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक दावेदारी कमजोर हो जाती है। समुदाय की उपस्थिति लगभग 200 लोकसभा और 1,000 विधानसभा क्षेत्रों में है, फिर भी वह उपेक्षित बना हुआ है।

इस मौके पर आयोजकों ने लक्की शाह बंजारा के ऐतिहासिक योगदान को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि एक समय 350 एकड़ में फैले उनके टांडे की भूमि का हिस्सा आज रायसीना हिल्स के रूप में पहचाना जाता है, जहाँ राष्ट्रपति भवन और संसद भवन स्थित हैं। कार्यक्रम में इस भूमि से जुड़े लंबित मुआवजे के मसले के समाधान की माँग फिर से उठाई गई।

इसके साथ ही समुदाय ने देशभर के बंजारा धरोहर स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण पर भी जोर दिया। इनमें प्रमुख रूप से लोहारगढ़ (हरियाणा), मांगरह (राजस्थान), लखी सराय (बिहार), मथुरा–वृंदावन (उत्तर प्रदेश), सागर लक्की शाह झील (मध्य प्रदेश), बंजारा हिल्स और गोलकुंडा गेट (तेलंगाना), बाबा हाथीराम मठ (तिरुपति) और कदंबुर हिल्स (तमिलनाडु) शामिल हैं।

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माँग पत्र में बंजारा/गोर भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग दोहराई गई, जिसका प्रस्ताव पहले ही तेलंगाना विधानसभा में पास हो चुका है। इसके अलावा, सोलहों बंजारा उप-समूहों को समान राष्ट्रीय पहचान दिए जाने की माग की गई, ताकि राज्यों के बीच सामाजिक–संवैधानिक असमानता खत्म हो और “वन नेशन, वन बंजारा” की अवधारणा मजबूत हो सके।

समुदाय ने देशभर में बंजारा बस्तियों के विकास के लिए “राष्ट्रीय बंजारा टांडा–नगला–डेरे विकास बोर्ड” बनाने की अपील की। साथ ही दिल्ली और हैदराबाद में राष्ट्रीय बंजारा संग्रहालय और राष्ट्रीय बंजारा विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी सामने रखी गई। छोटे व्यापार और हॉकिंग से जुड़े यायावर बंजारा युवाओं के लिए पहचान पत्र जारी करने और सुरक्षा ढांचे के निर्माण पर भी ज़ोर दिया गया।

बंजारा महिलाओं की शिक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएँ जताई गईं। प्रतिनिधियों ने 200 जिला मुख्यालयों पर बंजारा महिला आवासीय विद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। साथ ही, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रमुख सड़कों का नाम बंजारा नायकों और प्रतीकों पर रखने, राष्ट्रीय बंजारा अनुसंधान एवं विकास आयोग के गठन, संसद परिसर में लक्की शाह बंजारा और मकन शाह लुबाना की मूर्तियाँ लगाने, “बंजारा भारत रेल” नाम से विशेष ट्रेन चलाने और बंजारा रेजिमेंट की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी प्रस्तुत की गईं।

कार्यक्रम का समापन समुदाय की एकता, अधिकारों और विकास के लिए सामूहिक संघर्ष को आगे बढ़ाने के संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी मुद्दों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करे।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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