2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच अंबड क्षेत्र के भूजल में क्रोमियम मिलने से जल सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। गोदावरी तक प्रदूषित पानी पहुंचने के दावे के बीच जानिए नदी के पानी की जांच और सुरक्षित जलापूर्ति क्यों जरूरी है।
नई दिल्ली/नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में अगले साल होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। शहर के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के पास एकत्र किए गए पानी के नमूने की प्रयोगशाला जांच में कुल क्रोमियम की मात्रा 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली। इसमें 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर हेक्सावैलेंट क्रोमियम था।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पेयजल मानक में क्रोमियम की स्वीकार्य सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर निर्धारित है। इस तरह जांच किए गए नमूने में क्रोमियम का स्तर तय सीमा से 1,000 गुना से भी अधिक पाया गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि नासिक में कुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोदावरी नदी के घाट धार्मिक स्नान के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। ऐसे में नदी से जुड़ी जलधाराओं और आसपास के भूजल में औद्योगिक प्रदूषण की आशंका ने पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अंबड इलाके में सामने आया मामला
नासिक के अंबड इलाके में रहने वाले लोगों ने अपने बोरवेल से निकलने वाले पानी का रंग पीला होने की शिकायत की थी। इसके बाद स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश पंडित और ‘साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल’ (SANDRP) से जुड़ी पर्यावरण कार्यकर्ता परिनीता दांडेकर ने इलाके का दौरा किया और पानी के नमूने जांच के लिए एक प्रयोगशाला में भेजे।
रिपोर्ट के मुताबिक, पानी के नमूने 3 अक्टूबर 2026 को अश्वमेध इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स नाम की निजी प्रयोगशाला में जांचे गए थे। प्रयोगशाला की रिपोर्ट में क्रोमियम की मात्रा निर्धारित सीमा से बहुत अधिक मिली। इसके बाद जांच के निष्कर्ष संबंधित सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाए गए। मामला सामने आने के बाद कुंभ मेले की तैयारियों की जिम्मेदारी संभाल रहे राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे से इस संबंध में चर्चा की।
SANDRP ने 8 अक्टूबर को जारी अपने बयान में अंबड के भूजल में गंभीर रासायनिक प्रदूषण की बात कही। संगठन के अनुसार, स्थानीय निवासियों की शिकायतों और पानी के रंग में आए बदलाव ने इस मामले की जांच की जरूरत को सामने रखा।
कितना खतरनाक है हेक्सावैलेंट क्रोमियम?
क्रोमियम एक रासायनिक तत्व है, जिसके अलग-अलग रूप पाए जाते हैं। इनमें हेक्सावैलेंट क्रोमियम यानी क्रोमियम-6 (Cr VI) को विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है। इसका इस्तेमाल कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है। इनमें धातुओं की सतह पर परत चढ़ाना, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, धातुओं की फिनिशिंग और कुछ प्रकार के रंग एवं कोटिंग तैयार करना शामिल है।
औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाला अपशिष्ट यदि उचित उपचार के बिना जमीन, नालों या जलस्रोतों में पहुंचता है, तो इससे पानी दूषित हो सकता है। जमीन में पहुंचने वाले कुछ प्रदूषक भूजल तक भी पहुंच सकते हैं। हालांकि, किसी क्षेत्र में क्रोमियम मिलने के बाद उसके सटीक स्रोत और प्रदूषण फैलने के तरीके की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है।
हेक्सावैलेंट क्रोमियम को कैंसरकारी पदार्थ के रूप में जाना जाता है। इसके संपर्क में आने का जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस माध्यम से, कितनी मात्रा में और कितने समय तक इसके संपर्क में रहा है। लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके प्रभावों में श्वसन तंत्र को नुकसान, त्वचा में जलन और घाव जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता
SANDRP और स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अनुसार, अंबड के प्रभावित इलाके में कुछ परिवारों ने त्वचा संबंधी समस्याओं, चकत्तों, फफोले और घावों की शिकायत की है। संगठन ने बच्चों और महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों तथा कुछ लोगों के लिम्फ नोड्स में सूजन की बात भी कही है।
बयान में दो महिलाओं के गर्भपात की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, इन घटनाओं का कारण क्रोमियम के संपर्क को माना जाए, इसके लिए चिकित्सकीय जांच और प्रमाण की आवश्यकता है। केवल एक साथ दो घटनाएं सामने आने से उनके बीच कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों की मुश्किलों को बढ़ाने वाला एक अन्य पहलू पानी की उपलब्धता है। पर्यावरण कार्यकर्ता राजेश पंडित के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि नगर निगम की ओर से पानी की आपूर्ति कम और अनियमित होने के कारण कुछ परिवार नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने जैसे घरेलू कामों के लिए भी बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं।
यदि पानी दूषित है, तो उसका इस्तेमाल केवल पीने तक सीमित न रहने के कारण लोगों के संपर्क में आने के अन्य रास्ते भी हो सकते हैं। हालांकि, त्वचा पर किसी खास लक्षण का दिखाई देना अपने आप में क्रोमियम विषाक्तता की पुष्टि नहीं करता। प्रभावित लोगों को डॉक्टरों से जांच करानी चाहिए और स्वास्थ्य विभाग को इलाके में संभावित संपर्क की स्थिति का आकलन करना चाहिए।
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क्या गोदावरी नदी तक पहुंच रहा है प्रदूषित पानी?
इस मामले की गंभीरता केवल स्थानीय भूजल तक सीमित नहीं है। SANDRP का दावा है कि दूषित पानी स्थानीय नाले के माध्यम से गोदावरी नदी तक पहुंच रहा है। संगठन ने नदी से जुड़ी जलधाराओं और कुंभ मेले के घाटों के आसपास पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
नासिक में गोदावरी नदी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। इसलिए यदि औद्योगिक अपशिष्ट नदी तक पहुंच रहा है, तो उसके स्रोत और प्रभाव का पता लगाना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गोदावरी नदी के सभी घाटों का पानी दूषित है या वहां स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को निश्चित रूप से स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होगा। नदी में प्रदूषण की स्थिति जानने के लिए संदिग्ध नाले के पानी, उसके नदी में मिलने के स्थान और उससे आगे नदी के अलग-अलग हिस्सों से नमूने लेने होंगे।
कुंभ मेले से पहले यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े धार्मिक आयोजनों में जलस्रोतों की स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य का प्रबंधन बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है। समय रहते प्रदूषण के स्रोत की पहचान और नियंत्रण से संभावित जोखिमों को कम किया जा सकता है।
औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की मांग
प्रदूषण के संभावित स्रोत को लेकर SANDRP ने अंबड महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) क्षेत्र की इकाइयों पर सवाल उठाए हैं। संगठन के अनुसार, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, मेटल फिनिशिंग, पेंट और अन्य औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाला अपशिष्ट प्रदूषण की वजह हो सकता है।
हालांकि, किसी विशेष कंपनी को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले जांच एजेंसियों को संबंधित इकाइयों के अपशिष्ट, निकासी व्यवस्था और आसपास के जलस्रोतों की जांच करनी होगी। प्रयोगशाला में क्रोमियम का अधिक स्तर मिलने से प्रदूषण की गंभीरता सामने आती है, लेकिन इसके स्रोत की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य जरूरी हैं।
राज्य की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ तत्काल और उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी ओर, SANDRP ने अपने बयान में आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 30 सितंबर 2026 को एक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन प्रभावित लोगों को जांच संबंधी जानकारी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई। यह संगठन का आरोप है। इस मामले में कार्रवाई की पूरी स्थिति जानने के लिए संबंधित विभागों के विस्तृत आधिकारिक जवाब और जांच के नतीजों की आवश्यकता है।
प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित पानी की जरूरत
SANDRP ने प्रभावित बस्ती में वैकल्पिक जलापूर्ति सुनिश्चित करने और संदिग्ध बोरवेल को बंद करने की मांग की है। संगठन ने स्वास्थ्य शिविर लगाने, बच्चों और त्वचा संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की जांच कराने तथा गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
संगठन ने अंबड औद्योगिक क्षेत्र की विस्तृत जांच करने और पानी के परीक्षण से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही गोदावरी नदी और उससे जुड़ी जलधाराओं में प्रदूषण की स्थिति पता लगाने के लिए नमूने एकत्र करने की जरूरत बताई है।
SANDRP के बयान में यह भी कहा गया कि 9 अक्टूबर से प्रभावित क्षेत्र में टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति शुरू हुई। हालांकि, इससे सभी प्रभावित परिवारों तक नियमित और पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पानी पहुंचने की पुष्टि नहीं होती। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैकल्पिक जलापूर्ति कितने परिवारों तक पहुंच रही है और वह उनकी घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त है या नहीं।
2027 के कुंभ मेले से पहले क्यों जरूरी है कार्रवाई?
नासिक में 2027 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए जलस्रोतों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से पानी की मांग बढ़ेगी। ऐसे में स्थानीय निवासियों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ नदी और उससे जुड़ी जलधाराओं की गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल तीन हैं। पहला, क्या अंबड में दूषित भूजल का फैलाव सीमित क्षेत्र तक है या आसपास के अन्य जलस्रोत भी प्रभावित हैं? दूसरा, क्या नंदिनी नदी तंत्र और गोदावरी में भी क्रोमियम की खतरनाक मात्रा मौजूद है? और तीसरा, क्या प्रभावित परिवारों को लगातार सुरक्षित पानी और जरूरी चिकित्सा सहायता मिल रही है?
कुंभ मेले से पहले नासिक के सामने चुनौती केवल आयोजन की तैयारियां पूरी करने की नहीं, बल्कि शहर के निवासियों और आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित जलस्रोत सुनिश्चित करने की भी है। समय पर कार्रवाई से न केवल मौजूदा संकट को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में औद्योगिक प्रदूषण से होने वाले नुकसान को रोकने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
