Thursday, 22 October 2026
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बनी-ठनी से पिछवाई तक, बीकानेर हाउस में जीवंत हुई राजस्थान की सदियों पुरानी चित्रकला विरासत

प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों से तैयार कलाकृतियां बनीं आकर्षण का केंद्र, नई पीढ़ी को कला विरासत से जोड़ने पर जोर

नई दिल्ली: बीकानेर हाउस में चल रहे ‘तीजोत्सव-2026’ में राजस्थान के कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकलाओं के जरिए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दिल्ली तक पहुंचा रहे हैं। आयोजन में बनी-ठनी, पिछवाई और अन्य पारंपरिक शैलियों में तैयार कलाकृतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि तीजोत्सव में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए चित्रकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और कलाकृतियों के विपणन के लिए मंच दिया गया है। मेले में बनी-ठनी, पिछवाई और अन्य पारंपरिक शैलियों में तैयार चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक तकनीकों से बनाई गई इन कलाकृतियों में राजस्थान के लोक जीवन, संस्कृति और कला की खास झलक देखने को मिलती है।

बनी-ठनी और पिछवाई कला को जीवंत रख रहे पुष्पेंद्र साहू


तीजोत्सव में राजस्थान के किशनगढ़ से आए चित्रकार श्री पुष्पेंद्र साहू भी अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार तीसरे वर्ष तीजोत्सव में हिस्सा ले रहे हैं। वह बनी-ठनी और पिछवाई शैली में चित्र बनाते हैं और अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी के कलाकार के तौर पर इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहे हैं।

पुष्पेंद्र साहू के मुताबिक, पारंपरिक चित्रकला को तैयार करने में काफी समय और धैर्य लगता है। हर चित्र में बारीक काम किया जाता है, जिसके लिए कलाकार को लंबे समय तक एकाग्र होकर काम करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब तकनीक ने लोगों की जिंदगी को काफी तेज बना दिया है, ऐसे में नई पीढ़ी को ऐसी कला से जोड़ना आसान नहीं है, जिसमें समय और धैर्य दोनों की जरूरत होती है। यही वजह है कि पारंपरिक चित्रकला के संरक्षण को लेकर कलाकारों के बीच चिंता भी बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि तीजोत्सव जैसे आयोजन पारंपरिक कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होते हैं। यहां उन्हें अपनी कलाकृतियां लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ कला के बारे में लोगों से सीधे बातचीत करने और नई पीढ़ी को इसकी बारीकियों से परिचित कराने का मौका मिलता है।

तीसरी पीढ़ी के कलाकार ओंकार लाल कर रहे पिछवाई कला का संरक्षण


उदयपुर से आए श्री ओंकार लाल मेघवाल भी तीजोत्सव में अपनी पारंपरिक चित्रकलाओं के साथ शामिल हुए हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार तीसरी बार बीकानेर हाउस के तीजोत्सव में हिस्सा ले रहे हैं।

श्री ओंकार लाल राजस्थान के भील जनजातीय समुदाय से आते हैं और अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के कलाकार हैं। वह पिछवाई चित्रकला की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ इसके संरक्षण के लिए भी काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक कला को बचाए रखने के लिए केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय और जनजातीय क्षेत्रों से मिलने वाला सहयोग कलाकारों को आगे बढ़ने में मदद करता है। वह ‘मां चामुंडा सेल्फ हेल्प ग्रुप’ से भी जुड़े हैं। इस समूह के माध्यम से राजस्थान के अलग-अलग जनजातीय क्षेत्रों के लोग पारंपरिक चित्रकला को संरक्षित करने और उसे आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

श्री ओंकार लाल ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी राजस्थान सरकार कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों को इसी तरह प्रोत्साहित करती रहेगी और उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन के लिए अधिक से अधिक मंच उपलब्ध कराएगी।

बच्चों ने मैथेमैटिकल रेस में लिया हिस्सा


तीजोत्सव में सिर्फ कला और संस्कृति ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि शुक्रवार को बच्चों के लिए ‘मैथेमैटिकल रेस’ प्रतियोगिता आयोजित की गई।

इस प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को मनोरंजन के साथ-साथ गणित से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का अवसर मिला।

दिनभर की गतिविधियों के बाद शाम को आयोजित लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजस्थान की पारंपरिक संगीत और नृत्य शैलियों की रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में अल्गोजा, सारंगी, भपंग, मशक और खड़ताल जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियों ने माहौल को राजस्थानी रंग में रंग दिया। इसके साथ ही चरी और घूमर नृत्य की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।

लोक कलाकारों ने अपने संगीत और नृत्य के जरिए राजस्थान की सदियों पुरानी लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत किया। कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उनका उत्साह बढ़ाया।

एनजीटी के जजों और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी देखा मेला


तीजोत्सव के दौरान कई गणमान्य लोगों ने बीकानेर हाउस पहुंचकर मेले का भ्रमण किया। प्रमुख आवासीय आयुक्त श्री रोहित कुमार ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और प्रोफेसर ए. सेंथिल वेल ने मेले का दौरा किया और वहां मौजूद विभिन्न स्टॉल और कलाकृतियों को देखा।

इसके अलावा इंद्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के साथ करीब 40 विद्यार्थी भी मेले में पहुंचे। विद्यार्थियों ने राजस्थान की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को करीब से देखा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया।

इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार ने भी मेले का दौरा किया और वहां मौजूद कलाकारों एवं आर्टिजंस से बातचीत कर उनका उत्साह बढ़ाया।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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