मशहूर फुटवियर कंपनी Bata India ने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए संजय राव को नया CEO बनाया है। इस फैसले के बाद Bata India के शेयर और स्टॉक्स में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है।
नई दिल्ली: देश की सबसे पुरानी और सबसे चर्चित फुटवियर कंपनियों में से एक, Bata India ने 18 जून 2026 को अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए संजय राव को नया मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है।
कंपनी के इस फैसले को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया और नियुक्ति की घोषणा के बाद Bata India के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली।
संजय राव ऐसे समय में Bata India की कमान संभाल रहे हैं जब कंपनी बदलती उपभोक्ता पसंद, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल रिटेल के विस्तार के बीच अपनी विकास रणनीति को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राव इससे पहले वैश्विक स्पोर्ट्सवियर दिग्गज Nike से जुड़े रहे हैं और रिटेल, ब्रांड प्रबंधन तथा उपभोक्ता व्यवसाय में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं।
Share Market ने किया स्वागत
संजय राव की नियुक्ति की घोषणा के बाद Bata India के स्टॉक में 18% का उछाल दर्ज किया गया। साथ ही 18 जून को Bata India के शेयर 800.75 रुपए के इंट्रा डे हाई पर पहुंच चुके हैं।
निवेशकों का मानना है कि संजय राव का Nike जैसे वैश्विक ब्रांड में काम करने का अनुभव Bata के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय फुटवियर बाजार तेजी से बदल रहा है। युवा ग्राहकों की पसंद, ई-कॉमर्स का विस्तार और प्रीमियम फुटवियर की बढ़ती मांग कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर रही है। ऐसे में रिटेल और ब्रांड निर्माण का अनुभव रखने वाला नेतृत्व कंपनी को नई दिशा दे सकता है।
इसी उम्मीद का असर बाजार में भी देखने को मिला और निवेशकों ने इस नियुक्ति को सकारात्मक संकेत माना।
कौन हैं संजय राव?
संजय राव भारतीय रिटेल और उपभोक्ता व्यवसाय क्षेत्र के अनुभवी पेशेवरों में गिने जाते हैं। Bata India में आने से पहले वे Nike India के नेतृत्व से जुड़े रहे थे और कंपनी के रिटेल संचालन, बाजार विस्तार और ब्रांड रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
उद्योग जगत में उनकी पहचान ऐसे पेशेवर के रूप में है जिन्होंने उपभोक्ता व्यवहार, आधुनिक रिटेल नेटवर्क और ब्रांड पोजिशनिंग को करीब से समझा है।
Nike में काम करने के दौरान उन्होंने ऐसे दौर में जिम्मेदारी संभाली जब खेल और लाइफस्टाइल फुटवियर की मांग तेजी से बढ़ रही थी। डिजिटल बिक्री, ओमनी-चैनल रणनीति और युवा ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव Bata के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कंपनी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में Bata अपनी पारंपरिक ताकत को बरकरार रखते हुए नए ग्राहकों तक पहुंच बना सकेगी।
Bata India ने नेतृत्व परिवर्तन क्यों किया?
पिछले कुछ वर्षों में Bata India ने अपने व्यवसाय को आधुनिक बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। कंपनी ने अपने स्टोर्स को अपग्रेड किया, प्रीमियम उत्पादों पर जोर दिया और डिजिटल बिक्री को मजबूत करने का प्रयास भी किया है।
हालांकि Footwear Market में प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। अब Bata को केवल स्थानीय कंपनियों से ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स, स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनियों और ऑनलाइन-फर्स्ट ब्रांड्स से भी चुनौती मिल रही है।
ऐसे माहौल में कंपनी ऐसे नेतृत्व की तलाश में थी जो ब्रांड को अगले चरण की वृद्धि तक ले जा सके। संजय राव की नियुक्ति को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
Bata की शुरुआत कैसे हुई?
Bata का इतिहास 130 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इसकी शुरुआत 1894 में वर्तमान चेक गणराज्य के शहर ज़्लिन में हुई थी। कंपनी की स्थापना Tomáš Baťa, उनके भाई Antonín Baťa और बहन Anna Baťová ने की थी।
छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे दुनिया के सबसे बड़े फुटवियर ब्रांड्स में बदल गया।
Bata ने शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर उत्पादन तकनीकों को अपनाया, जिससे जूते अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध होने लगे। यही रणनीति उसकी वैश्विक सफलता का आधार बनी।
भारत में Bata की एंट्री
भारत में Bata की शुरुआत 1931 में हुई थी। इसके बाद कंपनी ने पश्चिम बंगाल के कोन्नगर के पास एक Industrial Township विकसित की, जिसे आज बाटानगर (Batanagar) के नाम से जाना जाता है। यहीं से Bata India की औपचारिक यात्रा शुरू हुई।
दशकों तक Bata भारतीय परिवारों के लिए भरोसे का नाम बना रहा। स्कूल शूज़ से लेकर ऑफिस फुटवियर और दैनिक उपयोग के जूतों तक, Bata ने देश के मध्यम वर्ग के बीच मजबूत पहचान बनाई। भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसने कभी न कभी Bata के जूते न खरीदे हों।
कैसे बना भारतीय बाजार का बड़ा नाम?
Bata की सफलता के पीछे कई कारण रहे।
सबसे बड़ा कारण था उसका व्यापक वितरण नेटवर्क (Extensive Distribution Network), कंपनी ने बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और शहरों तक अपनी पहुंच बनाई।
दूसरा कारण था किफायती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना।
तीसरा कारण था ग्राहकों का भरोसा। लंबे समय तक Bata को टिकाऊ और भरोसेमंद फुटवियर ब्रांड के रूप में देखा गया।
इन्हीं कारणों से Bata भारत के सबसे बड़े Footwear Brands में शामिल हुआ।
90 के दशक में बढ़ी Bata की चुनौतियां
हर बड़ी कंपनी की तरह Bata को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
1990 के दशक के बाद भारतीय बाजार में वैश्विक ब्रांड्स की एंट्री शुरू हुई। बाद में Adidas, Puma, Nike, Skechers और अन्य कंपनियों ने तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ाई।
इसके साथ ही स्थानीय कंपनियां भी अधिक फैशनेबल और युवा ग्राहकों को आकर्षित करने वाले उत्पाद लेकर आईं।
एक समय ऐसा भी आया जब Bata को केवल “School Shoes” और “Formal Footwear” ब्रांड के रूप में देखा जाने लगा। युवा ग्राहकों के बीच उसकी अपील अपेक्षाकृत कम हो रही थी। यही वह दौर था जब कंपनी को अपनी ब्रांड छवि बदलने की जरूरत महसूस हुई।
बदलाव की दिशा में Bata के कदम
पिछले एक दशक में Bata ने खुद को आधुनिक बनाने के लिए कई प्रयास भी किए हैं।
कंपनी ने:
- नए स्टोर फॉर्मेट शुरू किए,
- प्रीमियम उत्पाद लॉन्च किए,
- महिलाओं और युवाओं के लिए नई रेंज पेश की,
- ऑनलाइन बिक्री बढ़ाई,
- डिजिटल मार्केटिंग पर निवेश किया।
इसके अलावा Bata ने Hush Puppies, Power, North Star और Weinbrenner जैसे ब्रांड पोर्टफोलियो को भी मजबूत किया।
इन कोशिशों का असर कंपनी की बाजार स्थिति पर भी दिखा।
भारतीय फुटवियर बाजार कितना बड़ा है?
आपको बता दें कि, भारत का फुटवियर मार्केट ₹1.5 लाख करोड़ ($18 अरब) का है, जो कि दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश की युवा आबादी, तेजी से होते शहरीकरण और बढ़ती कमाई के दम पर यहाँ हर साल 2 अरब जोड़ी जूतों का उत्पादन होता है।
आज का उपभोक्ता सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल, फैशन और ब्रांड स्टेटस के लिए जूते खरीद रहा है। यही वजह है कि यह पूरा सेक्टर बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारतीय युवा उपभोक्ता अब ब्रांड, डिजाइन और अनुभव को पहले से अधिक महत्व दे रहे हैं। यही कारण है कि फुटवियर कंपनियां लगातार नवाचार और ब्रांडिंग पर निवेश कर रही हैं।
संजय राव के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
नए CEO के रूप में संजय राव के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।
1. युवा ग्राहकों को आकर्षित करना
Bata की मजबूत पहचान है, लेकिन युवा ग्राहकों के बीच इसकी प्रासंगिकता बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
2. डिजिटल बिक्री का विस्तार
ऑनलाइन शॉपिंग तेजी से बढ़ रही है। कंपनी को ई-कॉमर्स और ओमनी-चैनल मॉडल को और मजबूत करना होगा।
3. प्रीमियम सेगमेंट में विस्तार
उच्च आय वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए प्रीमियम उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार जरूरी होगा।
4. बढ़ती प्रतिस्पर्धा
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों प्रकार के ब्रांड्स से मुकाबला आसान नहीं होगा।
निवेशकों की बढ़ी उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि संजय राव का अनुभव Bata के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
उन्होंने ऐसे ब्रांड के साथ काम किया है जो वैश्विक स्तर पर युवा ग्राहकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यदि वे उसी अनुभव को Bata India में सफलतापूर्वक लागू कर पाते हैं, तो कंपनी अपने पारंपरिक ग्राहक आधार को बनाए रखते हुए नए उपभोक्ताओं तक भी पहुंच बना सकती है।
यही वजह है कि उनकी नियुक्ति के बाद निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि Nike में अपने अनुभव के आधार पर संजय राव Bata India को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या वे कंपनी को भारतीय फुटवियर बाजार के अगले विकास चरण का नेतृत्व दिलाने में सफल होते हैं।
