PM SHRI को लेकर केंद्र ने केरलम सरकार को दूसरी बार पत्र भेजा है। राज्य पहले ही योजना के लिए MoU साइन कर चुका है, लेकिन क्रियान्वयन रोक दिया गया। अब सरकार के सामने अंतिम फैसला लेने की चुनौती है।
तिरुवनंतपुरम: केरलम में प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया यानी PM SHRI योजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने केरलम सरकार से योजना को लागू करने पर जल्द फैसला लेने को कहा है। केंद्रीय शिक्षा सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव को इस संबंध में दोबारा पत्र भेजकर PM SHRI के क्रियान्वयन पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने शुक्रवार, 11 सितंबर को इसकी पुष्टि की। उनके मुताबिक, केंद्र की ओर से भेजा गया पत्र करीब दो-तीन दिन पहले राज्य सरकार को मिला है और इसमें कहा गया है कि राज्य जल्द फैसला करे, ताकि शिक्षा से जुड़ी अन्य योजनाओं की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सके।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केरलम सरकार पहले ही केंद्र के साथ PM SHRI को लेकर समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर कर चुकी है, लेकिन बाद में योजना के क्रियान्वयन को रोक दिया गया था। अब केंद्र के नए पत्र के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और सत्तारूढ़ UDF नेतृत्व को इस पर अंतिम रुख तय करना है। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व ने फिलहाल कैबिनेट की उपसमिति की रिपोर्ट का इंतजार करने का फैसला किया है।
केंद्र ने दूसरी बार भेजा पत्र
केंद्र का ताजा पत्र केरलम के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह UDF सरकार के सत्ता में आने के बाद PM SHRI के मुद्दे पर केंद्र की ओर से भेजा गया दूसरा संचार है। केंद्र ने पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि केरलम पहले ही PM SHRI योजना के लिए MoU पर हस्ताक्षर कर चुका है। इसलिए राज्य में आगे की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने की बात कही गई है।
केरलम के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपनी तरफ से कोई अंतिम घोषणा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और UDF नेतृत्व इस मामले पर चर्चा करेंगे और इसके बाद सरकार का रुख सामने आएगा। मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार की PM SHRI को लेकर आपत्तियां अभी खत्म नहीं हुई हैं और मामले के सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
केंद्र का कहना है कि PM SHRI पर राज्य का फैसला जरूरी है, क्योंकि इससे जुड़ी आगे की प्रक्रियाएं इसी निर्णय पर निर्भर हैं। केरलम सरकार दूसरी ओर इस बात को लेकर भी चिंतित है कि योजना पर फैसला नहीं होने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाली दूसरी शिक्षा संबंधी धनराशि प्रभावित हो सकती है।
कांग्रेस नेतृत्व ने क्या फैसला लिया?
PM SHRI को लेकर केरलम कांग्रेस के भीतर भी एक राय नहीं है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसके बाद पार्टी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह कैबिनेट की उपसमिति की रिपोर्ट का इंतजार करेगी।
केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा कि सरकार ने PM SHRI योजना का अध्ययन करने के लिए कैबिनेट उपसमिति गठित की है और इसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
कांग्रेस के कुछ नेता योजना को लागू करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका तर्क है कि PM SHRI के माध्यम से केंद्र की शिक्षा नीति से जुड़े प्रावधान राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अधिक प्रभावी तरीके से आ सकते हैं। दूसरी ओर, पार्टी के कुछ नेताओं ने इस बात पर चिंता जताई है कि योजना से दूर रहने पर राज्य को केंद्र से मिलने वाली शिक्षा राशि का नुकसान हो सकता है।
पिछली LDF सरकार ने क्यों साइन किया था MoU?
PM SHRI का विवाद केरलम में नया नहीं है। इसका मौजूदा विवाद पिछली LDF सरकार के दौरान हुए MoU से जुड़ा है।
केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में PM SHRI योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूदा सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके उन्हें मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। लेकिन केरलम में वाम मोर्चे के भीतर ही इस योजना को लेकर मतभेद रहे।
अक्टूबर 2025 में तत्कालीन पिनराई विजयन सरकार ने केंद्र के साथ PM SHRI को लागू करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए। इस फैसले पर LDF के घटक दल CPI ने आपत्ति जताई। CPI का कहना था कि योजना के जरिए केंद्र की शिक्षा नीति और विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़े प्रावधानों को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में लागू करने का रास्ता खुल सकता है।
MoU पर हस्ताक्षर के बाद LDF के भीतर विवाद बढ़ गया। CPI ने सरकार पर गठबंधन के भीतर पर्याप्त चर्चा किए बिना फैसला लेने का आरोप लगाया। स्थिति यहां तक पहुंची कि CPI के मंत्रियों ने अक्टूबर 2025 में कैबिनेट बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया था।
इसके बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने PM SHRI के क्रियान्वयन को फिलहाल रोकने का फैसला किया और मामले की समीक्षा के लिए सात सदस्यीय कैबिनेट उपसमिति गठित की। यानी MoU साइन हो जाने के बावजूद योजना जमीन पर लागू नहीं हो सकी।
UDF सरकार की चुनौती
2026 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह मुद्दा नई UDF सरकार के सामने आ गया। खास बात यह है कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस और UDF ने भी पिछली LDF सरकार के PM SHRI समझौते का विरोध किया था।
अब सरकार के सामने दो तरह की चुनौतियां हैं। पहली राजनीतिक और वैचारिक है, जबकि दूसरी आर्थिक है।
राजनीतिक स्तर पर UDF के भीतर यह सवाल है कि क्या पिछली सरकार द्वारा किए गए MoU को आगे बढ़ाया जाए या उससे पीछे हटने का रास्ता चुना जाए। वहीं, आर्थिक स्तर पर सरकार यह देख रही है कि PM SHRI को लागू नहीं करने का असर केंद्र से मिलने वाली अन्य शिक्षा योजनाओं की राशि पर तो नहीं पड़ेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की बैठक में कुछ नेताओं ने PM SHRI के विरोध में तर्क दिया, जबकि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की ओर से यह बात रखी गई कि पिछली सरकार पहले ही MoU पर हस्ताक्षर कर चुकी है, इसलिए राज्य के लिए सीधे इससे पीछे हटना आसान नहीं होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि स्कूलों के चयन और पाठ्यक्रम से जुड़े मामलों में केरलम अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।
केंद्र की फंडिंग भी बना बड़ा मुद्दा
PM SHRI विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू केंद्र से मिलने वाली शिक्षा संबंधी राशि है। केरलम सरकार का कहना है कि राज्य को केंद्र से शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी राशि मिलनी बाकी है।
सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने कहा कि केरलम की करीब 2,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय राशि बकाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र से यह स्पष्ट किया गया है कि PM SHRI को लागू नहीं करने के कारण केरलम के दूसरे फंड को रोका नहीं जाना चाहिए।
यह विवाद केवल केरलम तक सीमित नहीं रहा है। PM SHRI को लेकर केंद्र और कुछ विपक्ष शासित राज्यों के बीच पहले भी फंडिंग को लेकर मतभेद सामने आ चुके हैं। 2024-25 में केरलम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को ‘समग्र शिक्षा’ के तहत केंद्र का हिस्सा नहीं मिला था। केंद्र ने फंड जारी करने के लिए निर्धारित शर्तों और दिशानिर्देशों के पालन का मुद्दा उठाया था।
दिसंबर 2025 में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी केरलम के PM SHRI समझौते और उसके बाद पैदा हुई स्थिति पर संसद में जानकारी दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, MoU पर हस्ताक्षर के बाद केंद्र ने Samagra Shiksha Kerala के तहत बकाया राशि में से 92 करोड़ रुपये जारी किए थे, जबकि उस समय 109 करोड़ रुपये जारी किए जाने थे।
यही वजह है कि वर्तमान सरकार के सामने केवल वैचारिक या राजनीतिक सवाल नहीं है, बल्कि शिक्षा बजट और केंद्र से मिलने वाली सहायता का सवाल भी महत्वपूर्ण है।
आखिर PM SHRI योजना क्या है?
PM SHRI यानी Prime Minister Schools for Rising India केंद्र सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 7 सितंबर 2022 को मंजूरी दी थी। योजना का उद्देश्य देशभर में 14,500 से अधिक मौजूदा स्कूलों को मजबूत करके उन्हें ऐसे मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर शिक्षण वातावरण और नई तकनीक की सुविधाएं उपलब्ध हों।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, PM SHRI स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 यानी NEP 2020 के प्रदर्शन और क्रियान्वयन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाना है। योजना का लक्ष्य केवल भवन और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि शिक्षण पद्धति, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास, खेल, कला और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी जोर देना है।
केंद्र के अनुसार, योजना से 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों के सीधे लाभान्वित होने की उम्मीद है। इसे 2022-23 से 2026-27 तक पांच वर्षों में लागू करने का प्रस्ताव रखा गया था।
NEP 2020 को लेकर क्यों है विवाद?
केरलम में PM SHRI को लेकर मुख्य राजनीतिक विवाद का एक कारण इसका NEP 2020 से सीधा संबंध है। केंद्र PM SHRI स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मॉडल के तौर पर विकसित करना चाहता है। वहीं, केरलम में वाम दलों और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पहले भी केंद्र की शिक्षा नीति के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं।
विरोध करने वाले नेताओं और दलों की चिंता यह है कि PM SHRI के जरिए केंद्र की नीतियों का राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में प्रभाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, केंद्र का तर्क है कि PM SHRI का उद्देश्य स्कूलों की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करना है और इससे विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
यही अंतर केरलम में इस योजना को केवल शिक्षा से जुड़ा कार्यक्रम नहीं रहने देता और मामला राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है।
अब निगाहें कैबिनेट उपसमिति की रिपोर्ट और मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में UDF के अंतिम फैसले पर हैं। यही तय करेगा कि केरलम में PM SHRI योजना लागू होगी या राज्य एक बार फिर इससे दूरी बनाएगा।
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