24 दिन के छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC CGL 2023 परीक्षा रद्द कर दी। फैसले से 1,932 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के लिए जिस परीक्षा का परिणाम लंबे इंतजार के बाद उम्मीद लेकर आया था, अब उसी परीक्षा को सरकार ने रद्द कर दिया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा यानी JSSC-CGL/JGGLCCE 2023 को रद्द करने के साथ सरकार ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) द्वारा 2014 से अब तक कराई गई परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों को भी रद्द करने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मैराथन कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने यह घोषणा की। इसके साथ ही भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति बनाने का भी फैसला लिया गया है।
लेकिन सरकार के इस फैसले ने एक नया सवाल भी खड़ा कर दिया है। जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कर ली, जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी और जिन्हें सरकारी नौकरी मिलने वाली थी, उनका क्या होगा? यही वजह है कि जहां एक तरफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने फैसले को अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थियों का एक समूह सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।
24 दिन बाद सरकार का बड़ा फैसला
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई से चल रहा था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार शामिल थे।
आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कई अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। महतो ने लगातार 16 दिनों तक भूख हड़ताल भी की। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने इसे झारखंड के छात्रों की बड़ी जीत बताया।
सरकार के फैसले के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों में जश्न का माहौल देखा गया। कई छात्रों ने तिरंगा लहराकर फैसले का स्वागत किया। हालांकि आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ, क्योंकि छात्रों की एक प्रमुख मांग सीबीआई जांच को सरकार ने फिलहाल स्वीकार नहीं किया है।
आखिर क्यों उठे थे JSSC-CGL पर सवाल?
JSSC-CGL परीक्षा की कहानी केवल 2026 के आंदोलन से शुरू नहीं होती। इस भर्ती प्रक्रिया को कई चरणों में विवादों का सामना करना पड़ा।
Jharkhand General Graduate Level Combined Competitive Examination (JGGLCCE) 2023 के लिए JSSC ने 2023 में विज्ञापन जारी किया था। इसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों पदों पर नियुक्ति की जानी थी। परीक्षा की प्रक्रिया लंबी चली और आखिरकार लिखित परीक्षा सितंबर 2024 में आयोजित की गई।
परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को राज्यभर के 823 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। करीब 6.4 लाख अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। भर्ती में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक-सह-कानूनगो जैसे पद शामिल थे।
परीक्षा से पहले भी पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। इसी वजह से परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल अदालत तक पहुंचे। झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की जांच जारी रखते हुए बाद में परिणाम जारी करने की अनुमति दी थी।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ था रिजल्ट
JSSC-CGL की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी दिसंबर 2025 में सामने आई। झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को परिणाम जारी करने और सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित अनियमितताओं से जुड़े उम्मीदवारों की जांच जारी रहेगी।
इसके बाद JSSC ने दिसंबर 2025 में परिणाम जारी किया। कुल 1,932 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। इनमें अलग-अलग सरकारी पदों के लिए चयनित उम्मीदवार शामिल थे।
इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, प्लानिंग असिस्टेंट, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और अंचल निरीक्षक-सह-कानूनगो जैसे पद शामिल थे।
अदालत के निर्देश के तहत कुछ उम्मीदवारों के परिणाम अलग रखे गए थे। विशेष रूप से 10 उम्मीदवारों के परिणाम SIT की जांच पूरी होने तक रोकने का निर्देश था। यदि जांच में कोई चयनित उम्मीदवार अनियमितता में शामिल पाया जाता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती थी।
यानी एक तरफ अदालत की निगरानी में चयन प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी और दूसरी तरफ परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
1,932 चयनित अभ्यर्थियों को मिली थी नियुक्ति की उम्मीद
दिसंबर 2025 में परिणाम आने के बाद सफल उम्मीदवारों के लिए तस्वीर काफी हद तक साफ दिखाई दे रही थी। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी और रिपोर्टों के मुताबिक दिसंबर के अंत में 1,932 सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी की गई थी।
यही वजह है कि 2026 में परीक्षा रद्द किए जाने का फैसला इन उम्मीदवारों के लिए बेहद बड़ा झटका बन गया है।
इन अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर अदालत के आदेश के बाद परीक्षा का परिणाम जारी हुआ, चयन हुआ और नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो अब पूरी परीक्षा को रद्द करने की जिम्मेदारी उन पर क्यों डाली जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने रांची में सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और मुख्यमंत्री से फैसला वापस लेने की अपील की। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2,000 चयनित उम्मीदवारों के भविष्य पर इस फैसले का असर पड़ सकता है।
JSSC-CGL के अलावा TDPL की परीक्षाएं भी रद्द
इस फैसले का दायरा केवल JSSC-CGL तक सीमित नहीं है। सरकार ने TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) द्वारा 2014 से अब तक कराई गई भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों को भी रद्द करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और प्रकाशित परिणामों को निरस्त किया जाएगा।
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था में पहले से हुई प्रक्रियाओं की व्यापक जांच का रास्ता खुल गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल एक परीक्षा से जुड़ी समस्या को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है।
जांच में सामने आए ‘चौंकाने वाले तथ्य’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि CID और विशेष जांच दल की जांच में कुछ “चौंकाने वाले तथ्य” सामने आए हैं, जिन्हें फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में काम कर रही कई कंपनियां एक बड़े परीक्षा रैकेट में शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में कौन-कौन लोग या संस्थाएं वास्तव में शामिल थीं।
CID की ओर से JSSC कार्यालय में भी कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच जारी है और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
छात्रों ने की थी सीबीआई जांच की मांग
JSSC-CGL विवाद में छात्रों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य की एजेंसियों से जांच कराने के बजाय पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के बावजूद छात्रों ने कहा कि जब तक सीबीआई जांच की मांग स्वीकार नहीं होती, आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने पर फैसला नहीं लिया गया है।
विपक्षी दल भाजपा ने भी सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया है। विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार से इस मांग को स्वीकार करने की अपील की और 20 अगस्त को प्रस्तावित प्रदर्शन को नैतिक समर्थन देने की बात कही।
नौकरी की तैयारी कर चुके चयनित उम्मीदवारों की चिंता
सरकार के फैसले का सबसे पेचीदा पहलू यही है। एक ओर वे छात्र हैं जो परीक्षा रद्द होने को भर्ती व्यवस्था में सुधार की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं। दूसरी ओर वे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने उसी परीक्षा में सफलता हासिल की और नियुक्ति की उम्मीद में अपनी जिंदगी की अगली योजना बनाई थी।
इन चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो जांच के आधार पर दोषी उम्मीदवारों या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों की नियुक्ति को खत्म करना उचित नहीं है।
रिपोर्टों के अनुसार, चयनित अभ्यर्थियों के एक समूह ने राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। उनका दावा है कि लगभग 2,000 उम्मीदवारों की नौकरी इस फैसले से प्रभावित हो सकती है।
यह स्थिति सरकार के सामने एक कठिन प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़ा करती है। अगर पूरी परीक्षा दोबारा होती है तो पहले से चयनित उम्मीदवारों को कोई विशेष राहत मिलेगी या उन्हें भी नए सिरे से परीक्षा देनी होगी?
फिलहाल सरकार की ओर से इन उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर विस्तृत वैकल्पिक व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए यह मुद्दा आने वाले दिनों में विवाद का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।
परीक्षा सुधार समिति का महत्तव
सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक परीक्षा सुधार समिति बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन करना और उसे मजबूत बनाने के उपाय सुझाना है।
यह समिति केवल JSSC-CGL विवाद के संदर्भ में ही महत्वपूर्ण नहीं है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों ने परीक्षा संचालन, पेपर सुरक्षा, एजेंसियों की जवाबदेही, डिजिटल सिस्टम और परिणामों की विश्वसनीयता जैसे सवाल खड़े किए हैं।
अगर समिति की सिफारिशें प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो इससे भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि राज्य में पहले से लागू झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण) कानून को सख्ती से लागू किया जाएगा।
छात्रों की जीत, लेकिन हजारों अभ्यर्थियों के सामने नई चुनौती
झारखंड सरकार का JSSC-CGL रद्द करने का फैसला लंबे छात्र आंदोलन के बाद आया है। आंदोलनकारी छात्रों के लिए यह उनकी मांगों की दिशा में बड़ी सफलता है। 16 दिन की भूख हड़ताल के बाद देवेंद्र नाथ महतो का अनशन खत्म होना भी इसी घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
लेकिन कहानी का दूसरा पक्ष उतना ही महत्वपूर्ण है। जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास की, परिणाम सूची में अपना नाम देखा और नियुक्ति की उम्मीद में आगे बढ़े, उनके सामने अब फिर से अनिश्चितता खड़ी हो गई है।
इसलिए आने वाले दिनों में झारखंड सरकार के सामने दोहरी चुनौती होगी। पहला, भर्ती परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करना और दूसरा, पहले से चयनित उम्मीदवारों के भविष्य पर स्पष्ट फैसला लेना।
JSSC-CGL का रद्द होना शायद एक परीक्षा का अंत हो, लेकिन इससे जुड़े सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। अब असली परीक्षा सरकार और भर्ती संस्थाओं की है। क्या वे ऐसी व्यवस्था बना पाएंगे जिसमें लाखों युवाओं को परीक्षा के बाद अपने परिणाम पर भरोसा हो, और किसी भी गड़बड़ी की कीमत ईमानदारी से तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को न चुकानी पड़े?
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