Wednesday, 30 September 2026
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स्टीफन फ्लेमिंग बने इंग्लैंड के नए टेस्ट कोच, जो रूट होंगे नए कप्तान! मैक्कुलम युग के बाद नई शुरुआत की तैयारी

जो रूट की कप्तानी में वापसी और स्टीफन फ्लेमिंग की कोचिंग इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट को नई दिशा दे सकती है। जानिए स्टोक्स-मैक्कुलम युग के बाद टीम के सामने क्या चुनौतियां हैं।

लंदन: इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां टीम एक साथ दो बड़े बदलावों से गुजरती नजर आ रही है। एक तरफ बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद इंग्लैंड को जो रूट के रूप में नया टेस्ट कप्तान मिला है। वहीं दूसरी  ओर ‘Bazball’ युग के प्रमुख वास्तुकार ब्रेंडन मैक्कुलम के टेस्ट कोच पद से हटने के बाद अब न्यूजीलैंड के महान कप्तान और चेन्नई सुपर किंग्स के लंबे समय तक सफल कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग को नई जिम्मेदारी मिली है।

ऐसे समय में अनुभवी बल्लेबाज जो रूट का दोबारा कप्तानी संभालना और फ्लेमिंग का कोचिंग की कमान लेना इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेट में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने 12 जुलाई को घोषणा की थी कि मैक्कुलम चार साल तक टेस्ट टीम की कमान संभालने के बाद इस भूमिका से हटेंगे। हालांकि, वह इंग्लैंड की व्हाइट-बॉल टीमों के मुख्य कोच बने रहेंगे।

ECB ने उस समय कहा था कि अब टेस्ट टीम के लिए बदलाव का सही समय है और उसका बड़ा लक्ष्य आगामी एशेज में जीत हासिल करना है।

अब फ्लेमिंग के आने से इंग्लैंड को उम्मीद है कि उनकी शांत रणनीतिक सोच, लंबा अंतरराष्ट्रीय अनुभव और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सफलता टीम को टेस्ट क्रिकेट के अगले दौर के लिए तैयार कर सकती है।

फ्लेमिंग के सामने बड़ी जिम्मेदारी

स्टीफन फ्लेमिंग का नाम विश्व क्रिकेट में केवल न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान के रूप में ही नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के सबसे सफल कोचों में भी लिया जाता है। उनकी कोचिंग की सबसे बड़ी पहचान चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ जुड़ी रही है, जहां उन्होंने लंबे समय तक टीम की रणनीति और संस्कृति को आकार दिया।

फ्लेमिंग की कोचिंग शैली मैक्कुलम की आक्रामक और जोखिम लेने वाली सोच से अलग मानी जाती है। ‘बेज़बॉल’ ने इंग्लैंड को टेस्ट क्रिकेट में एक अलग पहचान दी, लेकिन अब फ्लेमिंग के सामने चुनौती यह होगी कि वह टीम की आक्रामक मानसिकता को बनाए रखते हुए उसमें रणनीतिक संतुलन और निरंतरता कैसे लाते हैं।

मैक्कुलम के कार्यकाल में इंग्लैंड ने टेस्ट क्रिकेट को देखने का नजरिया बदल दिया था। बेन स्टोक्स की कप्तानी और मैक्कुलम की कोचिंग जोड़ी ने टीम को आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, ECB के अनुसार मैक्कुलम का टेस्ट कार्यकाल अब समाप्त हो चुका है और वह व्हाइट-बॉल टीमों के साथ बने रहेंगे।

फ्लेमिंग के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इस विरासत को पूरी तरह खत्म किए बिना टीम को अपनी शैली में ढालें। उनके सामने केवल मैच जीतने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि एक ऐसी टेस्ट टीम तैयार करने की जिम्मेदारी भी होगी जो अगले कई वर्षों तक इंग्लैंड को मजबूत स्थिति में रख सके।

जो रूट की फिर हुई कप्तानी में वापसी

इंग्लैंड के लिए कोचिंग में बदलाव के साथ कप्तानी का चेहरा भी बदल गया है। बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद जो रूट को फिर से कप्तानी की जिम्मेदारी मिली है।

रूट पहले भी इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान रह चुके हैं। उन्होंने 2017 में एलिस्टेयर कुक के बाद कप्तानी संभाली थी और अप्रैल 2022 में इस पद से इस्तीफा दिया था। वे इंग्लैंड के सबसे ज्यादा टेस्ट मैचों और सबसे अधिक जीत वाले कप्तान रहे हैं।

उनके नेतृत्व में इंग्लैंड ने भारत के खिलाफ 2018 में घरेलू टेस्ट सीरीज 4-1 से जीती और 2020 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उसकी धरती पर 3-1 से सीरीज अपने नाम की। श्रीलंका में भी उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने महत्वपूर्ण सीरीज जीत दर्ज की थी।

2026 में परिस्थितियां अलग हैं। इस बार रूट को एक ऐसी टीम की कमान संभालनी है जो स्टोक्स के बाद संक्रमण के दौर से गुजर रही है। उनके सामने युवा खिलाड़ियों को संभालने, अनुभवी खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराने और फ्लेमिंग के साथ मिलकर टीम की नई दिशा तय करने की जिम्मेदारी होगी।

रूट की सबसे बड़ी ताकत उनका अनुभव है। वह इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ टेस्ट बल्लेबाजों में शामिल हैं और टीम के ड्रेसिंग रूम में उनकी वरिष्ठता नए खिलाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

बेन स्टोक्स का युग हुआ समाप्त

इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट में इस बदलाव की सबसे बड़ी वजहों में से एक बेन स्टोक्स का संन्यास है। 28 जून 2026 को स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया और न्यूजीलैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में खेला गया तीसरा टेस्ट उनका अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच रहा। उन्होंने अप्रैल 2022 से इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी की थी।

स्टोक्स के नेतृत्व में इंग्लैंड ने टेस्ट क्रिकेट को एक नया आक्रामक अंदाज दिया। मैक्कुलम के साथ उनकी जोड़ी को ‘Bazball’ युग की सबसे महत्वपूर्ण ताकत माना गया। स्टोक्स की कप्तानी में टीम ने कई ऐसे मुकाबले जीते, जिनमें वह मुश्किल स्थिति में थी।

उनका प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा। 2019 वनडे विश्व कप फाइनल में उनका नाबाद 84 रन और उसी वर्ष एशेज में हेडिंग्ले टेस्ट की 135 रन की पारी क्रिकेट इतिहास के यादगार प्रदर्शनों में शामिल हैं। ECB ने भी स्टोक्स को अपनी पीढ़ी के महान खिलाड़ियों और नेताओं में गिना है।

अब उनकी अनुपस्थिति इंग्लैंड के लिए बड़ी चुनौती होगी। रूट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि क्या वह स्टोक्स जैसी ऊर्जा और आक्रामक नेतृत्व शैली को अपने तरीके से आगे बढ़ा पाएंगे।

टीम में क्यों महत्वपूर्ण हैं फ्लेमिंग?

ब्रेंडन मैक्कुलम के कार्यकाल ने इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेट को एक नई पहचान दी। 2022 के बाद इंग्लैंड ने सकारात्मक और आक्रामक क्रिकेट पर जोर दिया। बल्लेबाजों को निडर होकर खेलने की आजादी मिली और टीम ने कई बार मुश्किल परिस्थितियों में भी जीत के लिए जोखिम उठाए।

लेकिन टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक सफलता के लिए केवल आक्रामक रवैया पर्याप्त नहीं होता। परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बदलना, गेंदबाजों का सही इस्तेमाल, बल्लेबाजी क्रम में स्थिरता और युवा खिलाड़ियों का विकास भी उतना ही जरूरी है।

फ्लेमिंग इस मामले में अलग तरह का अनुभव लेकर आते हैं। उन्होंने खिलाड़ी के रूप में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट देखा है और कोच के रूप में अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों के साथ काम किया है। उनका अनुभव रेड-बॉल क्रिकेट से लेकर दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग तक फैला हुआ है।

यही कारण है कि इंग्लैंड में उनकी नियुक्ति को केवल एक कोच बदलने के रूप में नहीं देखा जा रहा। यह टीम की रणनीतिक दिशा में बदलाव का संकेत भी हो सकता है।

IPL में फ्लेमिंग की सफलता

फ्लेमिंग का IPL करियर भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए विशेष रूप से जाना-पहचाना है। चेन्नई सुपर किंग्स के साथ उनका जुड़ाव टीम की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

CSK ने 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में IPL खिताब जीते और फ्लेमिंग लंबे समय तक टीम के कोचिंग सेटअप का प्रमुख चेहरा रहे। IPL की आधिकारिक टीम जानकारी में भी उन्हें CSK का कोच बताया गया है।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि उन्होंने अलग-अलग पीढ़ियों के खिलाड़ियों के साथ काम करते हुए टीम की संस्कृति को बनाए रखा। महेंद्र सिंह धोनी जैसे अनुभवी खिलाड़ी से लेकर युवा प्रतिभाओं तक, फ्लेमिंग ने अलग-अलग प्रकार के खिलाड़ियों के साथ काम किया।

अब यही अनुभव इंग्लैंड के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि IPL और टेस्ट क्रिकेट के बीच बड़ा अंतर है। टी20 में जहां कुछ घंटों के भीतर रणनीति बदलनी पड़ती है, वहीं टेस्ट क्रिकेट में पांच दिनों तक चलने वाली परिस्थितियों, पिच, मौसम और खिलाड़ियों की मानसिक व शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखना होता है।

फ्लेमिंग के सामने चुनौती होगी कि वह फ्रेंचाइजी क्रिकेट से मिले आधुनिक रणनीतिक अनुभव को इंग्लैंड के पारंपरिक टेस्ट ढांचे के साथ किस तरह जोड़ते हैं।

इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेट का भविष्य

फ्लेमिंग और रूट की जोड़ी के सामने सबसे पहला बड़ा लक्ष्य एक मजबूत संक्रमण तैयार करना होगा। इंग्लैंड की मौजूदा टीम में जो रूट और हैरी ब्रूक जैसे बल्लेबाज हैं, जबकि जैकब बेथेल, एमिलियो गे और जेमी स्मिथ जैसे खिलाड़ियों से भविष्य की उम्मीदें जुड़ी हैं।

2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड ने युवा खिलाड़ियों को भी टीम में जगह दी थी। ECB की टीम घोषणा में एमिलियो गे, सन्नी बेकर और जेम्स रेव जैसे अनकैप्ड खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। इससे साफ है कि टीम प्रबंधन नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।

अब फ्लेमिंग की भूमिका इन खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके सामने यह तय करने की चुनौती होगी कि कब युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जाए और कब अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा किया जाए।

इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेट का अगला बड़ा लक्ष्य एशेज भी होगा। ECB ने मैक्कुलम के टेस्ट पद से हटने की घोषणा करते समय स्पष्ट किया था कि बदलाव के पीछे अगले एशेज में जीत हासिल करने की महत्वाकांक्षा भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

ऐसे में फ्लेमिंग के लिए एशेज केवल एक सीरीज नहीं, बल्कि उनके कार्यकाल की शुरुआती बड़ी परीक्षा होगी।

क्या ‘Bazball’ का अस्तित्व खत्म हो जाएगा?

मैक्कुलम और स्टोक्स ने जो मानसिकता विकसित की, वह इंग्लैंड के खिलाड़ियों के खेलने के तरीके का हिस्सा बन चुकी है। फ्लेमिंग के लिए इसे पूरी तरह बदलना जरूरी भी नहीं होगा।

वह आक्रामक क्रिकेट को बनाए रखते हुए उसमें अधिक रणनीतिक अनुशासन जोड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए, हर स्थिति में आक्रमण करने के बजाय परिस्थितियों के अनुसार गति बदलना, लंबे स्पेल में गेंदबाजों का उपयोग करना और टेस्ट मैच के पांच दिनों के हिसाब से योजनाएं बनाना उनके दृष्टिकोण का हिस्सा हो सकता है।

रूट-फ्लेमिंग साझेदारी पर रहेंगी निगाहें

इंग्लैंड के लिए आने वाला समय दिलचस्प होने वाला है। एक तरफ रूट जैसा अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान है, दूसरी तरफ फ्लेमिंग जैसा रणनीतिक रूप से मजबूत कोच।

दोनों की भूमिकाएं अलग हैं, लेकिन दोनों का अनुभव टीम के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। रूट ड्रेसिंग रूम और मैदान पर नेतृत्व देंगे, जबकि फ्लेमिंग टीम की रणनीति और खिलाड़ियों के विकास पर काम करेंगे।

हालांकि, इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों के बीच काम करने का तरीका कितना प्रभावी रहता है। रूट को स्टोक्स जैसी आक्रामक कप्तानी की विरासत के बाद अपनी नेतृत्व शैली स्थापित करनी होगी और फ्लेमिंग को मैक्कुलम की लोकप्रियता और सफलता के बाद अपनी पहचान बनानी होगी।

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MD Faijan

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लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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