Saturday, 18 July 2026
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कैमरा अब प्रदर्शन दिखाएगा, शरीर नहीं! महिला खिलाड़ियों की गरिमा के लिए यूरोप का बड़ा फैसला

महिला खिलाड़ियों की गरिमा की रक्षा के लिए European Athletics और EBU ने नई कैमरा गाइडलाइंस जारी की हैं। जानिए क्या बदलेंगे कैमरा एंगल, क्यों उठाया गया यह अहम कदम।

ब्रुसेल्स, बेल्जियम: कोई भी महिला खिलाड़ी वर्षों की मेहनत के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरती है। उसका लक्ष्य पदक जीतना होता है, लेकिन मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा उसके प्रदर्शन की नहीं, बल्कि टीवी कैमरे द्वारा दिखाए गए कुछ क्लोज-अप शॉट्स की होने लगती है।

कई बार ऐसे वीडियो लाखों बार शेयर किए जाते हैं और खिलाड़ियों को ऑनलाइन ट्रोलिंग, अभद्र टिप्पणियों और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए European Athletics और European Broadcasting Union (EBU) ने महिला एथलीटों की गरिमा और सम्मान की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

दोनों संस्थाओं ने हाल ही में “Raising the Bar: Guidelines for Respectful Media Coverage in Women’s Athletics” नामक 23 पन्नों की नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य खेल प्रसारण के दौरान ऐसे कैमरा एंगल और दृश्य सीमित करना है, जो महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बजाय उनके शरीर पर अनावश्यक फोकस करते हों।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब खेल प्रसारण में महिलाओं के चित्रण को लेकर वर्षों से बहस चल रही थी। कई महिला खिलाड़ियों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कुछ कैमरा एंगल उन्हें असहज महसूस कराते हैं और बाद में यही दृश्य सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में वायरल हो जाते हैं।

क्या हैं नई गाइडलाइंस?

European Athletics और European Broadcasting Union (EBU) की इस नई गाइडलाइन का मकसद कैमरों की संख्या कम करना या महिला खिलाड़ियों की कवरेज घटाना नहीं है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैमरा खिलाड़ियों की एथलेटिक क्षमता, तकनीक और प्रदर्शन को प्राथमिकता दे।

गाइडलाइन के अनुसार ब्रॉडकास्टरों से कहा गया है कि वे –

  • शरीर के किसी विशेष हिस्से पर लंबे समय तक टिके रहने वाले क्लोज-अप शॉट्स से बचें।
  • पीछे या नीचे से लिए जाने वाले लो-एंगल कैमरा शॉट्स का अनावश्यक उपयोग न करें।
  • ऐसे स्लो-मोशन रिप्ले न दिखाएं जिनका खेल या तकनीकी विश्लेषण से कोई संबंध न हो।
  • कैमरे का फोकस खिलाड़ी के प्रदर्शन, तकनीक और प्रतियोगिता पर रखें, न कि उसके शरीर पर।

किन खिलाड़ियों ने निभाई अहम भूमिका?

इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने में केवल अधिकारी ही शामिल नहीं थे, बल्कि कई पूर्व और वर्तमान महिला एथलीटों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

इनमें ब्रिटेन की पूर्व ओलंपियन हॉली ब्रैडशॉ (Holly Bradshaw), सर्बिया की विश्व चैंपियन लंबी कूद खिलाड़ी इवाना श्पानोविच (Ivana Španović) और क्रोएशिया की विश्व प्रसिद्ध हाई जंपर ब्लांका व्लाशिच (Blanka Vlasic) शामिल रहीं।

इन खिलाड़ियों ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान कुछ कैमरा एंगल उन्हें मानसिक रूप से असहज कर देते थे। कई बार प्रसारण के बाद उन्हीं वीडियो क्लिप्स का दुरुपयोग सोशल मीडिया पर किया जाता था, जिससे खिलाड़ियों को अभद्र टिप्पणियों और ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता था।

European Athletics का बड़ा फैसला

European Athletics के अध्यक्ष डोब्रोमिर करामारिनोव (Dobromir Karamarinov) ने कहा कि खेल प्रसारण का उद्देश्य खिलाड़ियों की प्रतिभा और उपलब्धियों को सामने लाना होना चाहिए, न कि ऐसा दृश्य प्रस्तुत करना जिससे उनकी गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचे।

उन्होंने कहा कि नई गाइडलाइन खेलों की गुणवत्ता कम नहीं करेगी, बल्कि दर्शकों का ध्यान उनके प्रदर्शन पर केंद्रित करेगी जिसके लिए खिलाड़ी वर्षों तक मेहनत करते हैं।

कब से लागू होंगी ये गाइडलाइंस?

इन दिशानिर्देशों को जुलाई 2026 में जारी किया गया है और इन्हें आगामी European Athletics Championships सहित यूरोपीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के प्रसारण में अपनाने की सिफारिश की गई है।

हालांकि ये कानूनी रूप से बाध्यकारी नियम नहीं हैं, लेकिन European Broadcasting Union से जुड़े प्रसारण संस्थानों के लिए इन्हें एक पेशेवर मानक के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है ‘Male Gaze’?

महिला खिलाड़ियों के संदर्भ में अक्सर “Male Gaze” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसका अर्थ है किसी महिला को उसके प्रदर्शन या व्यक्तित्व के बजाय मुख्य रूप से उसके शारीरिक आकर्षण के नजरिए से प्रस्तुत करना।

खेल प्रसारण में यह तब दिखाई देता है जब कैमरे बार-बार ऐसे क्लोज-अप या लो-एंगल शॉट दिखाते हैं जिनका प्रतियोगिता या तकनीकी विश्लेषण से कोई संबंध नहीं होता।

उदाहरण के लिए, स्टार्टिंग ब्लॉक पर खड़ी धाविका, लंबी कूद की तैयारी कर रही खिलाड़ी या प्रतियोगिता के बाद आराम कर रही एथलीट के ऐसे दृश्य, जिनका खेल से कोई विशेष संबंध नहीं होता, लेकिन उन्हें लंबे समय तक प्रसारित किया जाता है।

नई गाइडलाइन का उद्देश्य इसी प्रवृत्ति को बदलना है, ताकि महिला खिलाड़ियों को सबसे पहले एथलीट के रूप में देखा जाए, न कि मनोरंजन का माध्यम बनाकर।

सोशल मीडिया ने बढ़ाई समस्या

पहले टीवी प्रसारण केवल उसी समय देखा जाता था जब प्रतियोगिता चल रही होती थी। लेकिन अब हर क्लिप कुछ ही मिनटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो सकती है।

कई बार किसी प्रतियोगिता का पूरा प्रदर्शन चर्चा में नहीं आता, बल्कि कैमरे का कोई एक क्लोज-अप वीडियो लाखों बार साझा किया जाता है। ऐसे वीडियो पर अभद्र टिप्पणियां, मीम्स और यौन संकेतों वाले संदेश भी पोस्ट किए जाते हैं।

इसी कारण कई महिला खिलाड़ियों ने कहा कि यह केवल कैमरा एंगल का सवाल नहीं है, बल्कि ऑनलाइन उत्पीड़न (Online Harassment) से भी जुड़ा मुद्दा है।

क्या इससे खेल प्रसारण प्रभावित होगा?

कुछ लोगों ने आशंका जताई कि नए दिशा-निर्देशों से प्रसारण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। हालांकि European Athletics और European Broadcasting Union ने स्पष्ट किया है कि ऐसा नहीं होगा।

नई गाइडलाइन का उद्देश्य कैमरों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि उनके संपादकीय उपयोग को बेहतर बनाना है। प्रतियोगिता के हर महत्वपूर्ण पल, जैसे दौड़ की शुरुआत, फिनिश लाइन, तकनीकी मूवमेंट, जंप, थ्रो और खिलाड़ियों की भावनात्मक प्रतिक्रियाएं पहले की तरह दिखाई जाएंगी।

फर्क केवल इतना होगा कि कैमरे उन शॉट्स से बचेंगे जिनका खेल से कोई सीधा संबंध नहीं है और जो खिलाड़ियों को अनावश्यक रूप से वस्तु की तरह प्रस्तुत करते हैं।

क्या दूसरे खेल भी अपना सकते हैं यह नियम?

यूरोपियन एथलेटिक्स की यह पहल भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

हाल के वर्षों में FIFA, UEFA, IOC (International Olympic Committee) और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल संगठन लैंगिक समानता और खिलाड़ियों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रहे हैं। महिला फुटबॉल, क्रिकेट, टेनिस और जिम्नास्टिक जैसे खेलों में भी प्रसारण को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है।

यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में अन्य खेल संगठनों द्वारा भी कैमरा संचालन और प्रसारण से जुड़े ऐसे ही दिशा-निर्देश अपनाए जा सकते हैं।

भारत के लिए क्या है सीख?

भारत में भी महिला खेल तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पी. वी. सिंधु, मीराबाई चानू, निकहत ज़रीन, विनेश फोगाट, हरमनप्रीत कौर, सविता पूनिया, अवनि लेखरा और कई अन्य खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।

महिला खेलों की लोकप्रियता बढ़ने के साथ भारतीय प्रसारण संस्थानों की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी कवरेज खिलाड़ियों की उपलब्धियों, तकनीक और संघर्ष पर केंद्रित रहे।

भारत में अभी इस तरह की कोई विशेष कैमरा गाइडलाइन लागू नहीं है, लेकिन वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव भारतीय खेल प्रसारण उद्योग के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत हैं।

दर्शकों की सोच भी बदलनी होगी

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कैमरा एंगल बदल देने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। यदि सोशल मीडिया पर दर्शक महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बजाय उनके पहनावे या शरीर पर टिप्पणी करते रहेंगे, तो सम्मानजनक खेल संस्कृति विकसित नहीं हो पाएगी।

इसलिए जरूरत केवल प्रसारण नियमों की नहीं, बल्कि दर्शकों की सोच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और डिजिटल साक्षरता की भी है।

जब तक खेल को मनोरंजन के बजाय प्रतिभा और मेहनत के नजरिए से नहीं देखा जाएगा, तब तक ऐसे विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं होंगे।

क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा?

कुछ आलोचकों का तर्क है कि कैमरा एंगल्स पर दिशा-निर्देश प्रसारण की रचनात्मक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन European Athletics ने स्पष्ट किया है कि इन गाइडलाइंस का उद्देश्य सेंसरशिप लागू करना नहीं है।

ये अनिवार्य कानूनी प्रतिबंध नहीं, बल्कि संपादकीय मानक (Editorial Guidelines) हैं। इनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खेल कवरेज में महिला खिलाड़ियों का चित्रण सम्मानजनक और पेशेवर तरीके से हो।

खेल पत्रकारिता को मिलती नई दिशा

डिजिटल मीडिया के दौर में खेल पत्रकारिता पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। अब किसी प्रतियोगिता की तस्वीरें और वीडियो कुछ ही मिनटों में पूरी दुनिया तक पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में कैमरे की हर फ्रेम और हर संपादकीय निर्णय का महत्व बढ़ गया है।

European Athletics की यह पहल बताती है कि भविष्य की खेल पत्रकारिता केवल हाई-डेफिनिशन कैमरों और आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसमें नैतिकता, संवेदनशीलता और खिलाड़ियों के सम्मान को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जाएगी।

ये भी पढ़ें :- RIP Sir Garry Sobers: नहीं रहे वेस्टइंडीज के ‘क्रिकेट सम्राट’ सर गैरी सोबर्स, 89 की उम्र में निधन

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MD Faijan

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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