Wednesday, 15 July 2026
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Expiry Date बदलकर आपकी रसोई तक पहुंच रहा ज़हर? दिल्ली के ओखला से सामने आए फूड रैकेट ने बढ़ाई चिंता

क्या आपकी रसोई तक भी बदली हुई एक्सपायरी डेट वाला खाना पहुंच रहा है? जानिए दिल्ली के ओखला फूड रैकेट की पूरी कहानी, FSSAI की गाइडलाइंस और बचाव के आसान तरीके।

नई दिल्ली: हाल ही में नई दिल्ली में सामने आए एक बड़े फूड रैकेट ने देशभर के उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मैगी, बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, घी, कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस जैसे नामी ब्रांडों के उत्पाद कथित तौर पर उनकी असली एक्सपायरी डेट मिटाकर दोबारा बाजार में बेचे जा रहे थे।

इससे एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदा गया हर पैकेज्ड फूड वास्तव में सुरक्षित है?

दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में पकड़े गए इस कथित रैकेट ने केवल नकली लेबल लगाने की समस्या ही नहीं उजागर की, बल्कि यह भी दिखाया कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में थोड़ी-सी लापरवाही लाखों लोगों की सेहत को खतरे में डाल सकती है। इस मामले की जांच में दिल्ली पुलिस के साथ भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी शामिल है।

क्या है ओखला का Expired Food Racket मामला?

जुलाई 2026 की शुरुआत में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के Okhla Phase-II स्थित एक औद्योगिक इकाई पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का खुलासा किया, जो कथित तौर पर एक्सपायर्ड और नियर-एक्सपायरी (Near Expiry) खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग से छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा बाजार में बेच रहा था।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें कंपनी का मालिक दर्शन सिंह सचदेवा भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, मौके से करीब 20 लाख रुपये मूल्य के खाद्य और पेय पदार्थ बरामद किए गए।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई शुरुआत में बाल श्रम की सूचना मिलने पर की गई थी।दिल्ली पुलिस, एसडीएम कार्यालय, FSSAI और एक स्वयंसेवी संस्था की संयुक्त टीम जब परिसर में पहुंची तो वहां कोई बाल मजदूर तो नहीं मिला, लेकिन जांच के दौरान अधिकारियों को एक ऐसा सेटअप मिला जहां खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग से कथित तौर पर व्यवस्थित तरीके से छेड़छाड़ की जा रही थी। इसके बाद पूरी फैक्ट्री को सील कर दिया गया और जांच शुरू हुई।

कैसे काम करता था यह कथित फूड रैकेट?

पुलिस जांच के अनुसार, पूरा नेटवर्क कई चरणों में काम करता था।

सबसे पहले विभिन्न राज्यों के थोक विक्रेताओं से ऐसे उत्पाद खरीदे जाते थे जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी होती थी या कुछ ही दिनों में समाप्त होने वाली होती थी। ऐसे उत्पाद सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर मिल जाते थे।

इसके बाद कथित तौर पर पैकेट पर छपी Manufacturing Date और Expiry Date को केमिकल थिनर से मिटाया जाता था।

फिर हैंडहेल्ड प्रिंटिंग मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से नई तारीखें छापी जाती थीं। जहां पुरानी तारीख पूरी तरह नहीं मिटती थी, वहां उस पर नया स्टिकर चिपका दिया जाता था।

यही नहीं, पुलिस के अनुसार कई पैकेजों पर नकली बैच नंबर, बारकोड, एमआरपी स्टिकर और यहां तक कि Nutrition Label भी लगाए जा रहे थे ताकि उत्पाद बिल्कुल असली दिखाई दें।

किन-किन ब्रांडों के उत्पाद मिले?

पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार जब्त किए गए सामान में कई लोकप्रिय ब्रांडों के उत्पाद शामिल थे, जिनमें—

  • Maggi
  • Bournvita
  • Horlicks
  • Thums Up
  • Fanta
  • Paper Boat
  • घी के विभिन्न ब्रांड
  • दो लीटर की सॉफ्ट ड्रिंक बोतलें
  • पैकेज्ड पेय पदार्थ शामिल थे।

हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि ये ब्रांड इस कथित अपराध में आरोपी नहीं हैं। पुलिस का कहना है कि असली ब्रांडेड उत्पादों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें दोबारा बाजार में उतारा जा रहा था।

पहले भी सामने आते रहे हैं मामले?

भारत में एक्सपायर्ड या गलत लेबल वाले खाद्य उत्पादों के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।

असम में बाढ़ राहत के दौरान एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बांटने के आरोप लगे थे। हैदराबाद में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर एक्सपायर्ड डेयरी उत्पाद और बिना लेबल वाले खाद्य पदार्थ जब्त किए थे। मुंबई में भी कई प्रतिष्ठित भोजनालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की गई।

हाल के दिनों में FSSAI ने उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Swiggy Instamart को भी कथित रूप से एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य सामग्री की डिलीवरी से जुड़े मामलों में कई नोटिस जारी किए हैं। हालांकि यह मामला ओखला रैकेट से अलग है।

क्या कहती हैं FSSAI की गाइडलाइंस?

भारत में पैकेज्ड खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) करता है। इसकी स्थापना Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत की गई थी।

खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग के लिए वर्तमान में Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations, 2020 (संशोधित 2025 तक) लागू हैं।

इन नियमों के अनुसार हर पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर स्पष्ट रूप से निम्न जानकारी देना अनिवार्य है—

  • उत्पाद का नाम
  • निर्माता का नाम और पता
  • बैच या लॉट नंबर
  • निर्माण तिथि (Manufacturing Date)
  • Best Before या Use By/Expiry Date
  • शुद्ध मात्रा
  • सामग्री (Ingredients)
  • पोषण संबंधी जानकारी
  • FSSAI लाइसेंस नंबर

FSSAI के नियमों के अनुसार इन जानकारियों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, गलत लेबलिंग या भ्रामक जानकारी देना कानूनन अपराध है।

Expiry Date, Best Before और Use By में क्या अंतर है?

अक्सर उपभोक्ता इन तीनों शब्दों को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि इनके अर्थ अलग-अलग हैं।

Best Before Date का मतलब यह नहीं होता कि उस तारीख के बाद उत्पाद तुरंत खराब हो जाएगा। इसका अर्थ है कि उस तिथि तक उत्पाद अपनी सर्वोत्तम गुणवत्ता, स्वाद और बनावट बनाए रखेगा। कुछ मामलों में यदि पैकेज सही स्थिति में हो तो Best Before Date के बाद भी सीमित अवधि तक उत्पाद सुरक्षित हो सकता है।

Expiry Date या Use By Date अधिक महत्वपूर्ण होती है। इस तारीख के बाद उत्पाद का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा माना जाता है। विशेष रूप से डेयरी उत्पाद, शिशु आहार, मांस, पेय पदार्थ और कुछ तैयार खाद्य पदार्थों में एक्सपायरी के बाद बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।

Expired Food खाना कितना खतरनाक हो सकता है?

सभी एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ एक जैसे नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे उत्पादों में कई तरह के जोखिम हो सकते हैं।

समय बीतने के साथ खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया, फफूंद (Mould), यीस्ट और अन्य सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

कुछ मामलों में खराब खाद्य पदार्थों में ऐसे विषैले तत्व (Toxins) बन जाते हैं जिन्हें केवल गर्म करने से भी पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।

इनमें दूध और डेयरी उत्पाद, घी और मक्खन, ब्रेड, पैकेज्ड जूस, रेडी-टू-ईट भोजन, शिशु आहार, मांस एवं मछली जैसे उत्पादों को सबसे धिक जोखिम भरा माना जाता है।  

बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग ऐसे खाद्य पदार्थों से अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

उपभोक्ता कैसे पहचानें कि पैकेट से छेड़छाड़ हुई है?

विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारी करते समय कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यदि पैकेट पर दो-दो स्टिकर लगे हों, प्रिंटिंग धुंधली दिखाई दे, अलग-अलग फॉन्ट इस्तेमाल किए गए हों, निर्माण और एक्सपायरी तिथि असामान्य लगे या पैकेजिंग पर खरोंच और केमिकल के निशान दिखाई दें, तो ऐसे उत्पाद खरीदने से बचना चाहिए।

अगर किसी बोतल या डिब्बे का सील टूटा हो, पैकिंग फूली हुई लगे या उसमें असामान्य गंध आए तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

ऑनलाइन ग्रॉसरी के दौर में बढ़ी नई चुनौती

भारत में Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart, BigBasket, Flipkart Minutes और Amazon Fresh जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। लाखों उपभोक्ता बिना दुकान गए घर बैठे खाद्य सामग्री खरीद रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन जितनी लंबी होगी, निगरानी की चुनौती भी उतनी बढ़ेगी। यदि किसी स्तर पर डिस्ट्रीब्यूटर, वेयरहाउस या थोक विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका असर सीधे उपभोक्ता तक पहुंच सकता है।

इसी कारण FSSAI समय-समय पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों पर निरीक्षण अभियान चलाता रहता है।

क्या केवल सख्त कानून काफी हैं?

ओखला में सामने आया मामला बताता है कि केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग, सप्लाई चेन की पारदर्शिता और उपभोक्ताओं की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रत्येक उत्पाद को स्रोत से उपभोक्ता तक डिजिटल रूप से ट्रैक करने की व्यवस्था भविष्य में ऐसे मामलों को काफी हद तक रोक सकती है। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों, थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों की जवाबदेही भी तय करनी होगी।

सस्ती खरीद पड़ सकती है महंगी

दिल्ली के ओखला में पकड़ा गया कथित एक्सपायर्ड फूड रैकेट केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों की भी याद दिलाता है। जिस भोजन पर लोग अपने परिवार की सेहत के लिए भरोसा करते हैं, यदि उसी की एक्सपायरी डेट बदली जाने लगे तो यह सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन जाता है।

FSSAI के नियम स्पष्ट हैं और ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है, लेकिन केवल सरकारी निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। निर्माता, डिस्ट्रीब्यूटर, ई-कॉमर्स कंपनियां और खुद उपभोक्ता सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

खरीदारी से पहले उपभोक्ता को पैकेजिंग, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट को ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है। ये आम-सी लगने वाली सावधानियां कई बार आपको किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचा सकती है। ओखला की यह घटना इसी बात की चेतावनी देती है कि सस्ते सौदे के लालच में अनजाने में अपनी सेहत से समझौता नहीं करना चाहिए।

ये भी पढ़ें ;- E20 पेट्रोल: देश के लिए हरित भविष्य या वाहन मालिकों के लिए नई चुनौती? आखिर क्यों छिड़ी है एथेनॉल पर इतनी बड़ी बहस

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MF

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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