लंबे समय से सत्ता हस्तांतरण से जुड़ी खबरों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अगले उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया है।
सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा बदलाव नजर आने वाला है। कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही सत्ता नेतृत्व की अटकलों पर आखिरकार पूर्ण विराम लग चुका है। गुरुवार (28 मई) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ पर हुए ब्रेकफास्ट मीटिंग के दौरान सीएम सिद्धारमैया ने अपने कैबिनेट से आज दोपहर 3 बजे अपने पद से इस्तीफे की बात कुबूल कर ली है। इस मीटिंग में केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल, प्रियांक खर्गे, एचके पाटिल, रामलिंगा रेड्डी समेत कर्नाटक कांग्रेस के कई बड़े नेता और मंत्री शामिल रहे। इस ब्रेकफास्ट मीटिंग से ठीक पहले सिद्धारमैया ने AICC (All India Congress Committee) के प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला से भी मुलाकात की थी। आपको बता दें कि सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस ने कर्नाटक में 3 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया था।
डीके शिवकुमार पर लगी मुहर
ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद यह साफ होता दिख रहा है कि कर्नाटक में अगले 2 साल के लिए नेतृत्व की कमान डीके शिवकुमार के हाथों में जा सकती है। कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल ने भी मीडिया के सामने एक बयान देते हुए इस बात की पुष्टि कर दी है कि सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक के वर्तमान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे। मीटिंग के दौरान भी डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद मांगा, जिसे भी सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है। इसके बाद दोनों नेताओं ने एक दूसरे को गले भी लगाया।
कांग्रेस ने दी बधाई
इस बीच कांग्रेस की तरफ से भी कर्नाटक में हुए इस बड़े राजनीतिक बदलाव पर प्रतिक्रिया आई है। कर्नाटक कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मीटिंग के दौरान की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा – “वह दिन, यह दिन, हमेशा के लिए… एकता हमारी शक्ति है! जनसेवा हमारी शाश्वत प्रतिबद्धता है”!
क्या है सिद्धारमैया के इस्तीफा की असली वजह
आपको याद दिला दें कि, साल 2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी थी। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने इस जीत के दो सबसे बड़े नायक सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल के सत्ता नेतृत्व पर सहमति बनाई थी। इस सहमति के बाद 20 मई, 2023 को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। गणित के अनुसार वे तय की गई अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहे।
पिछले कुछ दिनों में राहुल गाधी ने भी पार्टी की विश्वसनीयता बरकरार रखने के लिए सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ संयुक्त और अलग-अलग कई बार बैठकें की और उन्हें पार्टी के पुराने वादों को याद दिलाया। जिसके बाद सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने को राजी हो गए।
सिद्धारमैया के लिए अब आगे क्या
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि सिद्धारमैया दिल्ली जाकर कांग्रेस हाईकमान से उपमुख्यमंत्री पद के लिए अंतिम मंजूरी ले सकते हैं।
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