Saturday, 27 June 2026
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रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने आईसीसी सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव 2023 के 5वें संस्करण का आयोजन किया

नई दिल्ली।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय का रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग तथा भारतीय रसायन परिषद (आईसीसी) “रासायनिक उद्योग के लिए स्थिरता और व्यापार रणनीति का समेकन-चुनौतियों और अवसरों पर ध्यान” विषय पर दो दिवसीय कॉन्क्लेव का आयोजन कर रहे हैं।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा, ओडिशा सरकार के उद्योग, ऊर्जा और एमएसएमई मंत्री श्री प्रताप केशरी देब, रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा और रसायन तथा उर्वरक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीसी के अधिकारी और उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

श्री भगवंत खुबा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और 80000 से अधिक वाणिज्यिक उत्पादों की विविध रेंज की पेशकश करने वाले कई सेक्टरों के लिए आधारभूत उद्योग के रूप में कार्य करता है। यह देखते हुए कि सरकार ने आयात पर हमारी निर्भरता को कम करने, बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और कारोबारी माहौल में सुधार करने के लिए सराहनीय कदम उठाए हैं, यह आवश्यक है कि हम विकास की इस गाथा में रासायनिक निर्वहनीयता पर मजबूती से ध्यान केंद्रित करें। हमारा उद्योग अपने वर्तमान मूल्य लगभग 215 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 तक अनुमानित 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की योजना बना रहा है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि यह वृद्धि सतत विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ हो।

श्री ख़ुबा ने कहा कि वह रासायनिक क्षेत्र के निरंतर रूप से विकसित होने, कार्बन उत्सर्जन में कमी आने और पर्यावरण में सकारात्मक योगदान देने की कल्पना करते हैं। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि उद्योग अपनी वृद्धि बरकरार रखेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बना रहेगा।

इस अवसर पर, रसायन और पेट्रो-रसायन विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कहा कि मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड के उद्देश्य से, भारत सरकार सभी क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अपने ‘संपूर्ण सरकारी’ दृष्टिकोण के साथ हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा विभाग रसायन उद्योग को बढ़ावा देने और आवश्यकता पड़ने पर व्यापार करने की सुगमता बढ़ाने में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। हमारा लक्ष्य विश्व में एक सुरक्षित और विश्वसनीय औद्योगिक ईको-सिस्टम प्रदान करना है और भारत में रासायनिक क्षेत्र में विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। अपने प्राकृतिक लाभों के साथ, भारत निवेश के लिए एक आकर्षक स्थान है और यह इस तथ्य से पता चलता है कि 2021-22 में रासायनिक क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

रसायनों के संपूर्ण जीवन चक्र के प्रबंधन में स्थिरता को प्रोत्साहित करने के लिए यह भारतीय रसायन उद्योग की एक प्रमुख पहल है। इस सेक्टर की विश्व स्तर पर प्रसिद्ध इकाई पर्यावरण संसाधन प्रबंधन (ईआरएम) इस कॉन्क्लेव के लिए नॉलेज पार्टनर है।

आईसीसी सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने, कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग को बढ़ाने और टिकाऊ कॉर्पोरेट प्रथाओं को प्रोत्साहित करने की भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं की रोशनी में अत्यधिक महत्व रखता है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में ईएसजी रणनीतियों, डी-कार्बोनाइजेशन, नेट-शून्य परिवर्तन,डिजिटल रुपांतरण, हरित विकास, स्वच्छ ऊर्जा, सुरक्षा संवर्धन, और विनियमों से आगे उत्पाद प्रबंधन सहित ट्रेंडिंग मुद्दों और अवसरों पर चर्चा करने के लिए भारतीय और वैश्विक कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, बहुपक्षीय संगठनों, रासायनिक उद्योग निकायों और शैक्षणिक विशेषज्ञों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एकजुट होंगे।

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Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

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