Thursday, 16 July 2026
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राष्ट्रपति मुर्मू ने युवा पर्वतारोही विश्वनाथ कार्तिकेय को किया प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित

16 वर्ष की उम्र में 7 समिट्स चैलेंज पूरा कर सबसे कम उम्र के भारतीय और दुनिया के दूसरे सबसे युवा पर्वतारोही बने विश्वनाथ कार्तिकेय पडाकंती को मिला राष्ट्रीय सम्मान

नई दिल्ली: 26 दिसंबर को भारत सरकार द्वारा युवा पर्वतारोही विश्वनाथ कार्तिकेय पडाकंती को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 प्रदान किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों पर विजय प्राप्त कर 7 समिट्स चैलेंज पूरा करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा। 16 वर्ष की उम्र में यह कारनामा कर वे सबसे कम उम्र के भारतीय और दुनिया के दूसरे सबसे युवा पर्वतारोही बने हैं।

26 दिसंबर को हर वर्ष वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में समर्पित है। इसी अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की असाधारण उपलब्धियों को छह श्रेणियों—वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी—में मान्यता देता है।

यह राष्ट्रीय सम्मान 16 वर्ष की आयु में विश्वनाथ कार्तिकेय द्वारा 7 समिट्स चैलेंज पूरा करने के लिए दिया गया है। इस चुनौती में सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों—माउंट एवरेस्ट (एशिया), अकोंकागुआ (दक्षिण अमेरिका), डेनाली (उत्तरी अमेरिका), माउंट एल्ब्रुस (यूरोप), माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका), माउंट कोसियुस्को (ऑस्ट्रेलिया) और माउंट विंसन (अंटार्कटिका)—पर सफल आरोहण शामिल है।

30 अक्टूबर 2008 को हैदराबाद में जन्मे और वर्तमान में फीरोजगुड़ा, बालानगर में रहने वाले विश्वनाथ कार्तिकेय ने वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान पर्वतारोहण की शुरुआत की। 11 वर्ष की आयु में उन्होंने उत्तराखंड में रुद्रगैरा पर अपना पहला उच्च-ऊंचाई प्रयास किया। शिखर तक न पहुंच पाने के बावजूद, इसी अभियान से उनके अनुशासित और निरंतर पर्वतारोहण सफर की नींव पड़ी।

इसके बाद उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर अत्यधिक ऊंचाई वाले अभियानों के लिए आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा कौशल अर्जित किए। औपचारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्होंने कठोर फिटनेस दिनचर्या अपनाई, जो अक्सर सुबह 4 बजे से शुरू होती थी। अगले पांच वर्षों में उन्होंने विभिन्न महाद्वीपों में 23 पर्वत शिखरों पर चढ़ाई की और कई आयु-आधारित कीर्तिमान स्थापित किए।

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उनकी यात्रा का निर्णायक क्षण 27 मई 2025 को आया, जब उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई कर 7 समिट्स चैलेंज पूरा किया।

इस पूरे दौर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अभियानों की कठिन मांगों के साथ अपनी स्कूली पढ़ाई को भी संतुलित बनाए रखा।

विश्वनाथ कार्तिकेय की इस यात्रा में उनके परिवार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। उनके माता-पिता राजेंद्र प्रसाद और लक्ष्मी, दादा-दादी शिवा कुमार और सौम्या लक्ष्मी, तथा बड़ी बहन वैष्णवी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनके प्रशिक्षण और अभियानों में कोच भरत थामिनेनी, Boots & Crampon के संस्थापक, और रोमिल बार्थवाल का मार्गदर्शन निर्णायक रहा।

उल्लेखनीय है कि यह सम्मान Boots & Crampon के लिए भी एक उपलब्धि है। इससे पहले संस्था से जुड़े सामन्यु पोथुराजू (2020) और विराट चंद्र तेलुकुंटा (2022) को भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिल चुका है, जिससे यह एक ‘हैट्रिक’ बनती है।

सम्मान मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वनाथ कार्तिकेय ने कहा कि पर्वतारोहण ने उन्हें अनुशासन, निरंतरता और कठिन परिस्थितियों में धैर्य सिखाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित होना उन्हें खेल में और ऊंचे लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।

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Mansi Sharma

लेखक

Mansi Sharma is a journalist covering Global Affairs, and wellness, known for turning complex ideas into sharp, engaging narratives. Her work is driven by curiosity, depth, and a constant urge to question and explore. When she’s not writing, you’ll often find her diving into new ideas—preferably with a cup of coffee in hand, one sip at a time.

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