Thursday, 16 July 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
भारत टेक्स 2026 में बिहार पैवेलियन का जलवा बरकरार, तीसरे दिन भी आगंतुकों की रही भारी भीड़ ISIS Supporter Jailed: लखनऊ की NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को 5 साल की सजा जब एक छात्रा की पढ़ाई के लिए चलता रहा पूरा रेलवे स्टेशन! जानिए जापान के Kyu-Shirataki Station की चर्चित कहानी भारत की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए PHFI-IPHS तैयार कर रहा है नई पीढ़ी के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ भारत में हर दिन बंद हो रहे हैं 25 सरकारी स्कूल, भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर उठते नए सवाल Environmental Performance Index 2026: 177 देशों में भारत 176वें स्थान पर, जानिए क्यों पिछड़ा देश का पर्यावरण प्रदर्शन? ‘यहां फेल होना ही एडमिशन की पहली शर्त है’…आखिर क्यों SECMOL में सिर्फ नाकाम छात्रों के लिए खुलते हैं शिक्षा के दरवाजे? ICC ने बदली World Cup की तस्वीर, 2027 वनडे और 2028 टी20 विश्व कप के लिए लागू हुए नए फॉर्मेट और नियम भारत टेक्स 2026 में बिहार पैवेलियन का जलवा बरकरार, तीसरे दिन भी आगंतुकों की रही भारी भीड़ ISIS Supporter Jailed: लखनऊ की NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को 5 साल की सजा जब एक छात्रा की पढ़ाई के लिए चलता रहा पूरा रेलवे स्टेशन! जानिए जापान के Kyu-Shirataki Station की चर्चित कहानी भारत की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए PHFI-IPHS तैयार कर रहा है नई पीढ़ी के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ भारत में हर दिन बंद हो रहे हैं 25 सरकारी स्कूल, भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर उठते नए सवाल Environmental Performance Index 2026: 177 देशों में भारत 176वें स्थान पर, जानिए क्यों पिछड़ा देश का पर्यावरण प्रदर्शन? ‘यहां फेल होना ही एडमिशन की पहली शर्त है’…आखिर क्यों SECMOL में सिर्फ नाकाम छात्रों के लिए खुलते हैं शिक्षा के दरवाजे? ICC ने बदली World Cup की तस्वीर, 2027 वनडे और 2028 टी20 विश्व कप के लिए लागू हुए नए फॉर्मेट और नियम

दिल्ली सरकार के शेल्टर होम में 14 लोगों की मौत से हड़कंप, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश

दिल्ली सरकार के शेल्टर होम

नई दिल्ली।

दिल्ली सरकार के शेल्टर होम

रोहिणी में दिल्ली सरकार के शेल्टर होम ‘आशा किरण’ में रहने वाले मानसिक रूप से बीमार 14 लोगों की मौतें होने की बात सामने आई है। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद अरविंद केजरीवाल सरकार ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश देते हुएइ 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के रोहिणी स्थित सरकारी शेल्टर होम ‘आशा किरण’ में जनवरी 2024 से अब तक हुई 14 मौतों से संबंधित मामले में दिल्ली की मंत्री आतिशी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) को तत्काल पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू करने और 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

मंत्री ने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश करने का भी निर्देश दिया है, जिनकी लापरवाही के कारण ये मौतें हुई हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सुझावात्मक उपाय सुझाने के भी निर्देश दिए हैं।

आतिशी ने कहा कि राजधानी दिल्ली में ऐसी बुरी खबर सुनना बहुत चौंकाने वाला है और अगर यह सच पाया जाता है तो हम इस तरह की चूक बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए। एक सरकारी अधिकारी सूत्र ने बताया, “जनवरी में तीन, फरवरी में दो, मार्च में एक, अप्रैल में तीन और मई में शून्य मौतें हुई थीं। हालांकि, जून और जुलाई में संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई।”

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मरने वाले अधिकांश लोगों की उम्र 20 से 30 साल के बीच थी और मौत का कारण फेफड़ों में इन्फेक्शन, टीबी और निमोनिया सहित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं बताया गया है। सूत्रों ने बताया कि रोहिणी में दिल्ली सरकार द्वारा संचालित बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में दो शवों का पोस्टमॉर्टम होना बाकी है।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि ऐसे मामले भी थे, जिनमें लोगों में कुपोषण के लक्षण दिखे। फूड पॉइजनिंग की संभावना को खारिज करने के लिए फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 350 लोगों के रहने की क्षमता वाले इस शेल्टर होम की स्थापना 1989 में रोहिणी सेक्टर-1 में की गई थी। उस समय यह पूरे उत्तर भारत में मानसिक रूप से कमजोर लोगों के लिए एकमात्र सरकारी शेल्टर होम था। हालांकि, आशा किरण पिछले कुछ वर्षों में हुई मौतों के कारण विवादों में घिरा रहा है।

रिकॉर्ड के अनुसार 2011 से 2017 के बीच आशा किरण में 123 पुरुष और 73 महिलाओं की मौत हुई। 2008-09 में नवंबर और दिसंबर में 16 मौतें हुईं। दिसंबर और जनवरी 2009-10 के बीच कुल 23 लोगों की मौत हुई,

अगस्त और सितंबर 2012-13 के बीच 9, अक्टूबर और नवंबर 2013-14 में 13, अप्रैल-मई 2014-15 में 11 और नवंबर-दिसंबर 2015-16 में 13, वहीं वर्ष 2017-18 में नवंबर-दिसंबर की अवधि में 7 मौतें हुईं। प्रत्येक मौत की सूचना मिलने के बाद स्थानीय जिला मजिस्ट्रेट को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट भेजनी होती है।

इसे भी पढे:-

ईपीएस-95 का सफल आंदोलन, केंद्रीय श्रम मंत्री और ईपीएफओ ने बुलाई बैठक

शेयर करें: Facebook X WhatsApp

Aniket

लेखक

Aniket Sardhana is a journalism graduate with hands-on experience in field reporting, camera operations, and news production. With a strong understanding of newsroom workflows and on-ground storytelling, he has developed a practical and detail-oriented approach to reporting. Aniket writes extensively on cryptocurrency and current affairs, focusing on policy developments, market trends, and their broader socio-economic impact.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version