पहली बार नए एपीएच का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में किया गया पोस्ट

विभिन्न हितग्राहियों से 600 से अधिक सुझाव और टिप्पणियां हुईं प्राप्त

नई दिल्ली।

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के चेयरमैन प्रोफेसर टी.जी. सीताराम ने उपाध्यक्ष डॉ. अभय जेरे और सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार के संग आज पत्र सूचना ब्यूरो कॉन्फ्रेंस हॉल, शास्त्री भवन, नई दिल्ली में शैक्षणिक वर्ष 2024-2027 के लिए एआईसीटीई अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक(अनुमोदन प्रक्रिया पुस्तिका) लॉन्च की। इस अवसर पर पत्र सूचना ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक श्रीमती शमीमा सिद्दीकी ने विषय-प्रवर्तन किया।

प्रो. सीताराम ने मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए बताया कि एआईसीटीई ने अगले तीन वर्षों के लिए लागू एक अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक प्रस्तुत की है। यह पुस्तिका उन प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताती है, जिनका संस्थानों को तकनीकी और प्रबंधन कार्यक्रम/पाठ्यक्रम चलाने के लिए अप्रूवल लेते समय पालन करने की आवश्यकता होती है। प्रोफेसर सीताराम ने उन संशोधनों और प्रावधानों पर भी प्रकाश डाला, जिन्हें इस वर्ष शिक्षा की गुणवत्ता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और उनके कार्यान्वयन में पारदर्शिता पर फोकस करने के साथ अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक में शामिल किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार एआईसीटीई ने विभिन्न हितग्राहियों और विशेषज्ञों से राय और सुझाव/प्रतिक्रिया लेने के लिए नए एपीएच का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में पोस्ट किया। विभिन्न हितग्राहियों से 600 से अधिक सुझाव और टिप्पणियां प्राप्त हुईं, जिनका एक विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन किया गया और कई सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल किया गया।

एपीएच में पेश किए गए नए बदलाव इस प्रकार हैं:

1- अच्छा प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के लिए अनुमोदन को तीन वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान।

2- अच्छा प्रदर्शन करने वाले मौजूदा संस्थानों द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों/कार्यक्रमों के लिए प्रवेश की ऊपरी सीमा में छूट दी गई है, हालंकि संस्थानों को प्रवेश लेने से पहले गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और योग्य संकाय के बारे में बताना होगा।

3- संबद्ध विश्वविद्यालय/राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार से भूमि दस्तावेजों और एनओसी की आवश्यकता से संबंधित अनुपालन में कटौती।

4- संबद्ध विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र के भीतर अच्छा प्रदर्शन करने वाले मौजूदा संस्थानों के लिए ऑफ-कैंपस प्रावधान की शुरुआत की गई।

5- तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा में समन्वित विकास सुनिश्चित करने के लिए कंप्यूटर एप्लीकेशन (जैसे बीसीए) और प्रबंधन (जैसे बीबीए/बीएमएस) में स्नातक कार्यक्रम/पाठ्यक्रमों को एआईसीटीई के दायरे में लाया गया है।

6- रोजगार प्राप्त/कार्यरत पेशेवरों के लिए समय का कोई बंधन नहीं रखा गया है। इस प्रणाली के माध्यम से डिप्लोमा/डिग्री/स्नातकोत्तर स्तर पर अपनी शैक्षणिक योग्यता/कौशल को उन्नत करने का प्रावधान किया गया है।

7- सुविधाओं के उन्नयन/पुनरुद्धार के आकांक्षी संस्थानों के लिए हाइबरनेशन का प्रावधान।

8- ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल)/ऑनलाइन लर्निंग (ओएल) के लिए अनुमोदन प्रक्रिया पर अधिक स्पष्टता।

9- सभी एआईसीटीई-अनुमोदित संस्थानों को मौजूदा बुनियादी सुविधाओं और मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से कौशल (व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से) के लिए डिफ़ॉल्ट अनुमोदन प्राप्त है।

10- एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित संस्थानों/विश्वविद्यालयों के लिए लागू मानदंडों और आवश्यकताओं के उल्लंघन के लिए संशोधित दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान।

11- इंडोवेशन कार्यक्रम के माध्यम से और अपने परिसरों में इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) की स्थापना करके नवाचार पर अत्यधिक जोर दिया गया।

बीसीए और बीबीए/बीएमएस पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले संस्थानों के लिए एआईसीटीई अप्रूवल का नया प्रावधान आदर्श पाठ्यक्रम के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता, प्रगति, सक्षम, स्वनाथ आदि जैसी छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए पात्रता, अटल अकादमी, गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम, अनुसंधान संवर्धन के माध्यम से एफडीपी में संकाय भागीदारी को सक्षम करेगा। संकाय के वित्त पोषण की योजना, छात्रों के लिए इनोवेशन सेल गतिविधियां, सभी तकनीकी पुस्तकों तक मुफ्त पहुंच, छात्र मूल्यांकन पोर्टल (परख-पीएआरएकेएच) तक पहुंच, एआईसीटीई के इंटर्नशिप और प्लेसमेंट पोर्टल के माध्यम से छात्रों के लिए प्लेसमेंट और इंटर्नशिप सुविधाएं मुहैया कराएगी।

एआईसीटीई 2047 तक भारत को एक तकनीकी केंद्र बनाने के लिए देश में समग्र, गुणात्मक, समावेशी और सुलभ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। एआईसीटीई अपने विविध हितधारकों की जरूरतों को पूरा करने वाला एक परामर्श-प्रदाता, सुविधा-प्रदाता और सहयोग-प्रदाता संस्थान है।

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