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YuviPep नेक्स्ट-जेन फाउंडर्स ग्रैंड फिनाले में युवा इनोवेटर्स का दमखम, इसरो वैज्ञानिकों से मिला सीधा मार्गदर्शन

देशभर के स्कूल छात्रों ने YuviPep ग्रैंड फिनाले में वास्तविक समस्याओं पर आधारित नवाचार प्रस्तुत किए, जहाँ इसरो वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों से मिला मूल्यवान फीडबैक और मेंटरशिप।

दिल्ली/बेंगलुरु | 15 जनवरी, 2026

YuviPep के नेक्स्ट-जेन फाउंडर्स ग्रैंड फिनाले ने देशभर के स्कूल छात्रों को एक साझा मंच पर लाकर युवा नवाचार की बढ़ती राष्ट्रीय पहुँच को रेखांकित किया। इस आयोजन में बेंगलुरु सहित कई राज्यों से आए छात्रों ने भाग लिया और अपने विचारों को इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों व उद्योग विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया।

ग्रैंड फिनाले के दौरान छात्रों को विशेषज्ञों से सीधा संवाद करने का अवसर मिला, जहाँ उनके नवाचारों का मूल्यांकन प्रस्तुति की स्पष्टता, निष्पादन क्षमता और वास्तविक दुनिया में उपयोगिता जैसे मानकों पर किया गया। इस मंच ने स्कूल स्तर पर सोच को केवल विचारों तक सीमित न रखते हुए उसे व्यावहारिक समाधान में बदलने की दिशा दी।

करीब 100 छात्रों ने 50 टीमों के रूप में सतत विकास, स्वास्थ्य, शहरी जीवन, शिक्षा और सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर अपने समाधान पेश किए। कर्नाटक के बाहर के राज्यों से बढ़ती भागीदारी ने यह संकेत दिया कि YuviPep अब एक राष्ट्रीय स्तर का इनोवेशन प्लेटफॉर्म बन चुका है। पूरे कार्यक्रम के दौरान मेंटर्स ने टीमों को निरंतर मार्गदर्शन दिया, जिससे प्रस्तुतियाँ सुचारू रहीं और किसी भी तकनीकी बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।

जूरी पैनल में अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी और उद्योग जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें पद्मश्री सम्मानित क्रायोजेनिक रॉकेटरी विशेषज्ञ वी. ज्ञान गांधी, इसरो के पूर्व निदेशक आर. एस. भाटिया, पूर्व वैज्ञानिक एवं पावर सिस्टम्स विशेषज्ञ श्रीनिवास प्रसाद के, इसरो सैटेलाइट सेंटर के पूर्व ग्रुप डायरेक्टर एम. एस. श्रीनिवासन, टेलावर्ज कम्युनिकेशंस के अमित जैन और वैश्विक इनोवेशन सलाहकार रमेश वी. राम शामिल रहे।

पारंपरिक प्रतियोगिताओं से अलग, इस कार्यक्रम में योजना, निष्पादन और फीडबैक के ज़रिए सीखने पर विशेष ज़ोर दिया गया। छात्रों ने न केवल अपने समाधान प्रस्तुत किए, बल्कि यह भी बताया कि किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और विशेषज्ञ सुझावों से उनके विचार कैसे परिष्कृत हुए। इस प्रक्रिया ने उन्हें यह समझाया कि नवाचार एक अनुशासित और निरंतर सीखने वाली यात्रा है।

विशेषज्ञों ने छात्रों की गंभीर सोच और तकनीकी स्पष्टता की सराहना की। वी. ज्ञान गांधी ने कहा कि इतनी कम उम्र में वास्तविक समस्याओं की गहरी समझ भविष्य के बड़े राष्ट्रीय मिशनों के लिए आवश्यक सोच विकसित करती है। वहीं एम. एस. श्रीनिवासन और आर. एस. भाटिया ने छात्रों में दिखे अनुशासन, स्वामित्व और संतुलित निर्णय क्षमता को प्रेरणादायक बताया।

कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में सभी टीमों ने जूरी के सामने प्रस्तुति दी, जिसके बाद शीर्ष टीमों को गहन संवाद के लिए चुना गया। दूसरे चरण में अंक, चरणबद्ध प्रदर्शन और दर्शकों के मतदान के संयुक्त मूल्यांकन से विजेताओं का चयन किया गया, जिससे प्रक्रिया वास्तविक दुनिया की समीक्षा प्रणाली के काफ़ी करीब रही।

समापन समारोह में ग्रीनर बेंगलुरु, स्ट्रेस एंड पोस्टर बडी और सेंसिबल हेडफोन्स जैसी टीमों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। विजेता टीम को सिंगापुर में पूर्ण प्रायोजित अंतरराष्ट्रीय शिक्षण अनुभव मिला, जबकि शीर्ष टीमों को कुल तीन लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

छात्रों ने आयोजन को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह मंच आत्मविश्वास, सीख और अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा देता है। इसरो वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और संरचित मेंटरशिप के माध्यम से YuviPep लगातार भारत के स्कूल छात्रों में व्यावहारिक नवाचार क्षमता विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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