क्या ईरान संघर्ष जल्द खत्म होगा? तेल संकट 6-8 हफ्ते जारी रहने के संकेत, ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध 2-3 हफ्तों में थम सकता है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से वैश्विक तेल संकट लंबा खिंच सकता है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन हफ्तों में हालात काबू में आ सकते हैं, क्योंकि अमेरिकी लक्ष्य लगभग पूरे हो चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना अमेरिका की प्राथमिकता नहीं है और इस मुद्दे को अन्य देशों पर छोड़ा जा सकता है।

क्षेत्र में तनाव बरकरार, सप्लाई पर असर

फरवरी के अंत में शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में बाजार में अनिश्चितता तेजी से बढ़ी है।

युद्ध थमेगा, लेकिन तेल संकट बना रहेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध कुछ हफ्तों में खत्म हो जाए, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा। तेल उत्पादन और सप्लाई को पटरी पर लौटने में 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं। इसके अलावा समुद्र में फंसे टैंकरों को निकालना और सप्लाई चेन को दोबारा शुरू करना भी एक लंबी प्रक्रिया होगी।

समुद्री रास्तों में बिछाई गई माइंस को हटाना जोखिम भरा और समय लेने वाला काम है। इसी बीच शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव बना हुआ है और टैंकरों का किराया कई गुना तक बढ़ चुका है।

खतरा अभी टला नहीं, बढ़ सकता है संकट

अगर यमन के हूती विद्रोही अन्य अहम समुद्री मार्गों को प्रभावित करते हैं, तो यह संकट और गहरा सकता है। फिलहाल कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।

भारत पर असर, महंगाई बढ़ने की आशंका

भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि देश अपनी अधिकांश तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। फिलहाल वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडार के चलते बड़ा संकट टला हुआ है, लेकिन ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी साफ दिख रही है।

अगर कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो महंगाई बढ़ सकती है और आयात बिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके साथ ही शेयर बाजार पर भी असर देखने को मिल रहा है, जहां खासकर रिफाइनरी कंपनियों के शेयर दबाव में हैं।

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