Monday, 02 November 2026
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क्या है दीपिंदर गोयल का Temple Wearable? प्री-ऑर्डर खुलते ही क्रैश हुई वेबसाइट; जानें फीचर्स और कीमत

Temple Wearable मेक-टू-ऑर्डर मॉडल पर तैयार किया जाएगा, इसलिए प्री-ऑर्डर के बाद डिलीवरी में तीन महीने तक लग सकते हैं। शुरुआती खेप को Batch 01 नाम दिया गया है। कंपनी ने शिपिंग से पहले रिफंड का अनुरोध करने का विकल्प भी दिया है।

नई दिल्ली: Zomato के संस्थापक दीपिंदर गोयल एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह फूड डिलीवरी कारोबार नहीं, बल्कि उनका नया हेल्थ-टेक प्रोडक्ट है। गोयल की नई पहल Temple एक ऐसा वियरेबल डिवाइस है, जिसे कलाई पर स्मार्टवॉच की तरह पहनने के बजाय सिर के कनपटी वाले हिस्से के पास लगाया जाता है।

कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस दिमाग में रक्त प्रवाह से जुड़े संकेतों, शारीरिक तनाव और हार्ट रेट जैसी गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद करता है। भारतीय ग्राहकों के लिए प्री-ऑर्डर शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद Temple की आधिकारिक वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक के कारण तकनीकी समस्या आ गई। दीपिंदर गोयल ने खुद इस परेशानी को स्वीकार किया और बाद में वेबसाइट के दोबारा चालू होने की जानकारी दी।

क्या है Temple और कैसे काम करता है यह डिवाइस?

Temple एक छोटा, गोली के आकार का वियरेबल डिवाइस है। इसे पारंपरिक स्मार्टवॉच की तरह कलाई पर नहीं पहना जाता, बल्कि माथे और कान के बीच कनपटी के पास त्वचा पर लगाया जाता है।

इसे त्वचा से चिपकाने के लिए कंपनी ने Grips नाम के विशेष एडहेसिव पैच दिए हैं। यह डिवाइस ऑप्टिकल सेंसर और कंपनी की BrainFlow तकनीक का इस्तेमाल करता है।

इसका मुख्य उद्देश्य दिमाग में रक्त प्रवाह यानी सेरेब्रल ब्लड फ्लो में होने वाले बदलावों से जुड़े संकेतों को ट्रैक करना है।

आमतौर पर स्मार्टवॉच कदमों की संख्या, हार्ट रेट, नींद और शारीरिक गतिविधियों जैसी चीजों पर ध्यान देती हैं। Temple का फोकस इससे अलग है। यह दिमाग में रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन से जुड़े संकेतों के साथ-साथ शारीरिक तनाव को समझने के लिए कुछ अलग मापदंड उपलब्ध कराने का दावा करता है। कंपनी की योजना इस जानकारी को ऐप के जरिए उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने की है।

प्री-ऑर्डर शुरू होते ही वेबसाइट पर बढ़ा ट्रैफिक

Temple के लिए भारत में प्री-ऑर्डर 1 नवंबर 2026 को रात 9:30 बजे शुरू हुए थे। कंपनी ने ग्राहकों को अपनी वेबसाइट temple.com और मोबाइल ऐप के जरिए ऑर्डर करने का विकल्प दिया था।

हालांकि, बुकिंग शुरू होने के कुछ ही मिनटों में वेबसाइट पर इतना ट्रैफिक आ गया कि कई यूजर्स को इसे खोलने और ऑर्डर करने में परेशानी हुई। इस तकनीकी समस्या के बाद दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि वेबसाइट पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक आ रहा है और उनकी टीम इसे ठीक करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वेबसाइट में दिक्कत के बावजूद ऐप के जरिए ऑर्डर किए जा सकते हैं।

एक यूजर ने जब वेबसाइट की क्षमता को लेकर सवाल उठाया, तो गोयल ने माना कि उनकी टीम ने आने वाले ट्रैफिक का सही अनुमान नहीं लगाया था। उन्होंने इसे ‘रूकी मिस्टेक’ बताते हुए कहा कि वेबसाइट में ऑटो-स्केलिंग की व्यवस्था नहीं थी। ऑटो-स्केलिंग ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए किसी वेबसाइट या सर्वर पर अचानक बढ़ने वाले ट्रैफिक के हिसाब से उसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। बाद में गोयल ने बताया कि तकनीकी टीम ने समस्या दूर कर दी है और वेबसाइट फिर से काम करने लगी है। उन्होंने यूजर्स से जल्दबाजी न करने की अपील भी की।

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शारीरिक तनाव को समझने की कोशिश  

Temple की एक खासियत इसका Entropy स्कोर है। कंपनी के अनुसार, यह स्कोर 1 से 250 के बीच होता है और हर सेकंड अपडेट किया जाता है। दीपिंदर गोयल ने इसे शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक दबाव या ‘फिजियोलॉजिकल स्ट्रेन’ को समझने का एक तरीका बताया है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ता को यह संकेत देना है कि अलग-अलग परिस्थितियों में शरीर पर कितना दबाव पड़ रहा है।

इस स्कोर पर कई चीजों का असर पड़ सकता है। इनमें नींद की गुणवत्ता, व्यायाम, तनाव और कैफीन का सेवन शामिल हैं। उदाहरण के लिए, कठिन शारीरिक गतिविधि या पर्याप्त नींद न मिलने के बाद शरीर की प्रतिक्रिया बदल सकती है। Temple इसी तरह के बदलावों को आंकड़ों के रूप में दिखाने की कोशिश करता है। कंपनी का कहना है कि इससे खिलाड़ियों और फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोगों को अपनी गतिविधियों और रिकवरी को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।

कैसे पहन सकते हैं Temple?

Temple को सिर पर लगाने के लिए किसी सामान्य स्ट्रैप या बैंड की जरूरत नहीं होती। इसे त्वचा पर चिपकाने के लिए कंपनी ने Grips नाम के डिस्पोजेबल एडहेसिव पैच तैयार किए हैं। ये पैच डिवाइस को कनपटी के पास अपनी जगह पर बनाए रखते हैं। कंपनी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि उपयोगकर्ता दौड़ने, तैरने और नहाने जैसी गतिविधियों के दौरान भी डिवाइस पहन सकें। इसे चश्मा पहनने वालों के लिए भी अनुकूल बताया गया है।

कंपनी के अनुसार, एक Grip लगभग सात दिन तक चल सकता है। हालांकि, अगर उपयोगकर्ता को ज्यादा पसीना आता है या वह धूल वाली जगह पर रहता है, तो पैच को दो से तीन दिन में बदलने की सलाह दी गई है। यानी डिवाइस खरीदने के बाद उसके इस्तेमाल में इन पैच की जरूरत भी बनी रहेगी। कंपनी की ओर से इसके साथ लाइफटाइम सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन देने की बात कही गई है।

भारत में कितनी होगी कीमत?

Temple की भारत में शुरुआती कीमत 85,000 रुपये रखी गई है। यह कीमत शुरुआती एक्सेस के लिए भेजे गए आमंत्रण और कंपनी की प्री-ऑर्डर जानकारी में बताई गई है। इस कीमत में लाइफटाइम सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन शामिल होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इतनी अधिक कीमत के कारण यह डिवाइस सामान्य फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच के मुकाबले प्रीमियम श्रेणी में आता है।

कंपनी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि डिवाइस की डिलीवरी में खरीदारी की तारीख से तीन महीने तक का समय लग सकता है। इसकी वजह कंपनी का मेक-टू-ऑर्डर मॉडल है। यानी ऑर्डर मिलने के बाद डिवाइस तैयार किया जाएगा। शुरुआती खेप को Batch 01 नाम दिया गया है और इसके सीमित रहने की जानकारी दी गई है। ग्राहकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डिवाइस शिप होने से पहले रिफंड का अनुरोध किया जा सकता है।

Temple छह रंगों में उपलब्ध होगा। इनमें True Gold, Rose Gold, Black Mirror, Real Jade, Deep Blue और Purple Funk शामिल हैं। कंपनी ने Real Jade, Deep Blue और Purple Funk को सीमित संस्करण वाले रंगों के तौर पर पेश किया है।

कैसे कर सकते हैं Temple की बुकिंग?

भारत में इच्छुक ग्राहक Temple की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए प्री-ऑर्डर कर सकते हैं। ऐप Apple App Store और Google Play Store पर उपलब्ध है। बुकिंग की तैयारी के लिए ग्राहकों को पहले ऐप या वेबसाइट पर शुरुआती सेटअप पूरा करना होता है। इसके बाद वे डिवाइस चुनकर उसे कार्ट में जोड़ सकते हैं और आवश्यक संख्या दर्ज कर सकते हैं। फिर नाम और डिलीवरी पते जैसी जानकारी भरनी होती है। जहां लागू हो, वहां GSTIN जैसी वैकल्पिक जानकारी भी दी जा सकती है।

ग्राहक प्री-ऑर्डर खुलने से पहले ही अपना कार्ट और शिपिंग विवरण तैयार कर सकते हैं। भुगतान प्री-ऑर्डर के दिन किया जाना था। कंपनी की ओर से अलग-अलग देशों के लिए बुकिंग का समय अलग रखा गया था। भारत में इसकी शुरुआत 1 नवंबर की रात 9:30 बजे हुई थी। वेबसाइट पर आई तकनीकी परेशानी के दौरान ऐप के जरिए ऑर्डर करने का विकल्प उपलब्ध रहने की जानकारी भी गोयल ने दी थी।

पीवी सिंधु ने बताया ‘गेम चेंजर’

Temple को लेकर चर्चा उस समय और बढ़ गई, जब भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने सार्वजनिक रूप से इसकी तारीफ की। 1 नवंबर को X पर एक पोस्ट में सिंधु ने बताया कि वह खुद इस डिवाइस का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने इसे ‘गेम चेंजर’ बताते हुए कहा कि वह दीपिंदर गोयल और उनकी टीम के साथ मिलकर ऐसे मेट्रिक्स पहचानने पर काम कर रही हैं, जो केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी हों।

सिंधु के मुताबिक, डिवाइस का इस्तेमाल करने के साथ उनका भरोसा उस तकनीक पर बढ़ा है जिसे टीम विकसित कर रही है। उनका कहना था कि आकार में छोटा होने के बावजूद यह डिवाइस प्रभावी तरीके से काम कर सकता है। कंपनी के मुताबिक, खिलाड़ियों के लिए इस तरह के आंकड़े उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि अभ्यास, प्रतियोगिता, नींद और रिकवरी के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया को समझना खेल प्रदर्शन का अहम हिस्सा है।

बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु के अलावा क्रिकेटर शुभमन गिल को भी Temple पहने हुए देखा गया है।

इन्फ्लुएंसर्स को मुफ्त में डिवाइस देने के आरोपों पर गोयल की सफाई

Temple के लॉन्च से पहले कुछ इन्फ्लुएंसर्स और चर्चित लोगों को यह डिवाइस पहने देखा गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि क्या कंपनी ने प्रचार के लिए उन्हें डिवाइस मुफ्त में दिए हैं या पेड प्रमोशन कराया है।

Temple की वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया है कि कंपनी किसी को भी डिवाइस पहनने या उसका प्रचार करने के लिए भुगतान नहीं करती। दीपिंदर गोयल ने भी इन सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वह इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के बजाय प्रोडक्ट पर ध्यान देना चाहते हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गोयल ने कहा कि कुछ लोगों को आधिकारिक लॉन्च से पहले डिवाइस का बीटा वर्जन जरूर मिला था, लेकिन सभी ने इसके लिए भुगतान किया था। उनके शब्दों में, बीटा वर्जन पाने वाले हर व्यक्ति ने पैसे दिए। बीटा वर्जन किसी उत्पाद का शुरुआती या परीक्षण वाला संस्करण होता है, जिसे अंतिम लॉन्च से पहले कुछ उपयोगकर्ताओं को इस्तेमाल के लिए दिया जाता है।

गोयल ने यह भी कहा कि वह लंबे समय में यह जानना चाहते हैं कि उत्पाद वास्तव में काम कर रहा है या नहीं, न कि उसकी मार्केटिंग कितनी सफल है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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