Wednesday, 07 October 2026
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जंतर-मंतर मारपीट केस: स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत, कोर्ट ने कहा- सबूतों के आधार पर होगा फैसला

स्वतंत्र भारद्वाज को 5 सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। 7 सितंबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और अब पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान दलित छात्रा के पिता से कथित मारपीट के मामले में आरोपी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने मंगलवार, 15 सितंबर को यह आदेश दिया। खास बात यह है कि भारद्वाज ने अंतरिम जमानत के लिए अलग से आवेदन नहीं दिया था, बल्कि उन्होंने नियमित जमानत की मांग की थी। कोर्ट ने फिलहाल तीन सप्ताह की अंतरिम राहत देते हुए कहा कि इस अवधि में उनके आचरण को देखा जाएगा और उसके बाद नियमित जमानत की याचिका पर विचार किया जाएगा।

मामला 23 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान गाजियाबाद निवासी संजय कुमार को सिर में चोट लगी थी। वह अपनी 14 वर्षीय बेटी और प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचे थे। शुरुआत में भारद्वाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2) यानी चोट पहुंचाने और 126(2) यानी गलत तरीके से रोकने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।

बाद में जातिसूचक टिप्पणी और नाबालिग लड़की को ऑनलाइन धमकी दिए जाने के आरोपों के बाद मामले में एससी/एसटी कानून की धाराएं जोड़ी गईं और पॉक्सो कानून के तहत अलग एफआईआर दर्ज की गई।

तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत

पटियाला हाउस कोर्ट ने भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देते हुए कई पहलुओं पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की हिरासत में पूछताछ पूरी हो चुकी है और जिन अपराधों में उसे आरोपी बनाया गया है, उनमें अधिकतम सजा सात वर्ष तक है। अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा महत्वपूर्ण है और उचित शर्तों के जरिए इसे सुनिश्चित किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि भारद्वाज की करीब 10 दिन से अधिक की हिरासत उन्हें अपने आचरण पर विचार करने का पर्याप्त समय दे चुकी है। इसी आधार पर कोर्ट ने नियमित जमानत पर अंतिम फैसला लेने से पहले तीन सप्ताह की अंतरिम राहत देने का रास्ता अपनाया। विस्तृत आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के इस दौरान आचरण को देखा जाएगा।

इस फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोशल मीडिया से जुड़ी टिप्पणी है। कोर्ट ने कहा कि मामले का फैसला सार्वजनिक बहस या सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि अदालत में पेश किए गए सबूतों के आधार पर होगा।

दौरान सोशल मीडिया पर टिप्पणी पर रोक

अंतरिम जमानत के साथ भारद्वाज पर सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। अदालत ने उन्हें मामले, अपनी बचाव रणनीति, शिकायतकर्ता या उसके परिवार के बारे में सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या प्रिंट मीडिया पर कोई पोस्ट या टिप्पणी करने से रोक दिया है। यानी तीन सप्ताह की अंतरिम राहत के दौरान इस मामले को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी करना उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

कोर्ट की चिंता मुख्य रूप से शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी की सुरक्षा को लेकर रही। अदालत ने माना कि आरोपी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन साथ ही पीड़ित पक्ष की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसी संतुलन के आधार पर अंतरिम जमानत को शर्तों से जोड़ा गया है।

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 23 जून को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। प्रदर्शन का मुद्दा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और नीट से जुड़े सवालों को लेकर था।

इसी प्रदर्शन में 14 वर्षीय छात्रा निशू आजाद भी शामिल थीं। उनके पिता संजय कुमार भी उनके साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां वीडियो बनाने को लेकर विवाद हुआ और इसके बाद संजय कुमार के साथ मारपीट हुई।

पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान संजय कुमार के सिर में हाथ में पहने गए कड़े से चोट लगी थी। दिल्ली पुलिस ने बाद में कहा था कि उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया और मेडिकल रिपोर्ट में चोटों को सामान्य प्रकृति का बताया गया।

शुरुआत में मामले में भारद्वाज और एक अन्य आरोपी के खिलाफ सामान्य चोट और गलत तरीके से रोकने से जुड़ी धाराएं लगाई गई थीं। बाद में मामला तब दोबारा सुर्खियों में आया जब भारद्वाज से जुड़े एक वीडियो पॉडकास्ट के अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें उन्होंने संजय कुमार पर हमले की बात करते हुए अपने प्रभाव और राजनीतिक संपर्कों का भी दावा किया था।

सोशल मीडिया पर वीडियो के बाद बढ़ा विवाद

मामले में नया मोड़ सितंबर की शुरुआत में आया। भारद्वाज के एक वीडियो पॉडकास्ट के अंश सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें उन्होंने कथित तौर पर संजय कुमार पर हमला करने की बात कही। इसके बाद CJP और अन्य संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी।

भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठने के बाद CJP के प्रतिनिधियों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छात्रा और उसके परिवार के साथ राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के शामिल होने की खबरें भी सामने आईं। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई तेज की।

पुलिस ने 5 सितंबर को भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया। उन्हें दिल्ली लाया गया और अदालत ने शुरुआत में एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा। इसके बाद 7 सितंबर को उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

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दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज हुई याचिका

गिरफ्तारी के बाद भारद्वाज ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख भी किया था। उन्होंने अपनी हिरासत और गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका यानी हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि भारद्वाज फिलहाल न्यायिक आदेश के तहत हिरासत में हैं और गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए उचित ट्रायल कोर्ट का रास्ता उपलब्ध है।

इसके बाद मामला पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत की सुनवाई तक पहुंचा। भारद्वाज की ओर से नियमित जमानत मांगी गई थी, लेकिन मंगलवार को अदालत ने तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत देने का फैसला किया।

भारद्वाज के वकील ने क्या दलील दी?

जमानत की सुनवाई के दौरान भारद्वाज के वकील ने गिरफ्तारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। बचाव पक्ष का कहना था कि वास्तव में शिकायतकर्ता ने ही भारद्वाज पर हमला किया था और इस संबंध में वीडियो भी मौजूद है। वकील ने अदालत के सामने यह तर्क रखा कि पुलिस ने शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने इसके विपरीत दलील दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारद्वाज ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और बाद में खुद एक वीडियो में हमले की बात स्वीकार की।

SC/ST एक्ट भी जुड़ा

मामले की शुरुआती एफआईआर में जातिसूचक टिप्पणी का आरोप दर्ज नहीं था। बाद में शिकायतकर्ता के एक अतिरिक्त बयान में जातिसूचक टिप्पणी किए जाने का आरोप सामने आया, जिसके बाद एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून की धाराएं जोड़ी गईं।

अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में इस पहलू पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि शुरुआती एफआईआर में जाति आधारित अपमान का आरोप नहीं था और यह आरोप करीब 10 सप्ताह बाद सामने आया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि देर से लगाया गया आरोप केवल इस वजह से झूठा नहीं माना जा सकता।

नाबालिग छात्रा से जुड़ा पॉक्सो केस

मामले में एक अलग एफआईआर पॉक्सो कानून के तहत भी दर्ज की गई है। यह मामला नाबालिग छात्रा को कथित ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रा की ओर से शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया।

रिपोर्ट के अनुसार, भारद्वाज को एससी/एसटी कानून वाली एफआईआर में गिरफ्तार किया गया था, जबकि पॉक्सो मामले में उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। मंगलवार की सुनवाई में दोनों एफआईआर के अस्तित्व का भी उल्लेख हुआ।

अदालत ने यह भी नोट किया कि कई नंबरों से शिकायतकर्ता और उसकी नाबालिग बेटी को भेजे गए कथित आपत्तिजनक और यौन प्रकृति के संदेशों का भारद्वाज से संबंध फिलहाल स्थापित नहीं हुआ है। इस पहलू की जांच भी मामले की आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है।

क्या भारद्वाज को मिलेगी क्लीन चिट?

तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत का मतलब यह नहीं है कि भारद्वाज को मामले में क्लीन चिट मिल गई है। आपराधिक मामला और उससे जुड़ी जांच व न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। कोर्ट ने अंतरिम अवधि के दौरान उनके आचरण को देखने की बात कही है और इसके बाद नियमित जमानत की मांग पर आगे विचार किया जाएगा।

अदालत के विस्तृत आदेश में जांच से जुड़ी कुछ कमियों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही कोर्ट ने यह साफ किया है कि आरोपों की अंतिम सच्चाई जमानत के स्तर पर तय नहीं की जा सकती। मुकदमे में साक्ष्यों, बयानों, वीडियो और अन्य जांच सामग्री के आधार पर ही यह तय होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी।

इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारद्वाज को तीन सप्ताह के लिए अस्थायी राहत मिली है, लेकिन उन पर लगी कानूनी कार्यवाही समाप्त नहीं हुई है। अदालत ने सोशल मीडिया पर मामले से जुड़ी बयानबाजी पर भी रोक लगाई है। इसलिए आने वाले हफ्तों में उनका आचरण, जांच की प्रगति और शिकायतकर्ता पक्ष की सुरक्षा इस मामले में खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगी।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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