Saturday, 03 October 2026
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‘विकसित भारत 2047 में हरित ऊर्जा’ पर संगोष्ठी आयोजित, प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के नेतृत्व पर चर्चा, समाजसेवी और पत्रकार सम्मानित

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्षों की यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर किशोरी लाल फाउंडेशन ने “विकसित भारत 2047 में हरित ऊर्जा : एक महत्वपूर्ण कदम” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के समाजसेवियों और पत्रकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘सद्भावना सम्मान’ देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में हिल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष श्री कुलदीप सिंह, कोयला मंत्रालय के उपसचिव श्री राम कुमार, संसद टीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज वर्मा, पीसीएस अधिकारी सुश्री मदिरा शर्मा, भारत सरकार के अवर सचिव श्री संजय कुमार तथा भाजपा पूर्वांचल मोर्चा, दिल्ली प्रदेश के महासचिव श्री जगदंबा सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे और उन्होंने विषय पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के अध्यक्ष श्री कुलदीप शर्मा द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुई।
इस अवसर पर हिल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष श्री कुलदीप सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2023 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 200 गीगावाट के पार पहुंच चुकी है, जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत तथा परमाणु ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत विश्व में चौथे और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो देश के कुल ऊर्जा मिश्रण का 50 प्रतिशत होगा। यह लक्ष्य न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि भारत को वैश्विक जलवायु नेतृत्व की भूमिका में भी स्थापित करेगा।

श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत की ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक पहल है। वर्ष 2023 में शुरू हुए इस मिशन के तहत 2030 तक 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन उद्योग, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के साथ-साथ 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रयासों में भी सशक्त योगदान देगी।

उन्होंने आगे कहा कि भारत की हरित ऊर्जा यात्रा को वैश्विक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं से भी मजबूती मिली है। वर्ष 2015 में भारत द्वारा शुरू किया गया अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ परियोजना के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में इस गठबंधन से 110 से अधिक देश जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 के COP-26 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘पंचामृत’ संकल्प ने भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को और मजबूत किया। इसके तहत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, हरित ऊर्जा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर के विदेशी निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है।

संसद टीवी के वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने और देश को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का मजबूत आधार बना है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा, सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान बनाई है और ऊर्जा सुरक्षा एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और किसानों के कल्याण के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने 2030 तक 50 प्रतिशत स्वच्छ ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन देशवासियों की प्रतिबद्धता और प्रयासों के कारण यह लक्ष्य वर्ष 2025 तक ही प्राप्त कर लिया गया। उन्होंने कहा कि सौर, परमाणु, जल और हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

कोयला मंत्रालय के उप-सचिव श्री राम कुमार ने कहा कि भारत को 2047 में विकसित भारत बनाने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का दृष्टिकोण बहुत व्यापक है और हम सभी को उनके दृष्टिकोण पर पूरी तरह अमल करना होगा। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में हरित ऊर्जा की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ऊर्जा विकास का पहला फाउंडेशन है। ऊर्जा की हम सबको बचत करनी होगी। कदम- कदम पर ऊर्जा के वेस्टेज को रोकना होगा। कार्बन उत्सर्जन कम करने के मामले में भारत ने 2070 का जो लक्ष्य रखा है, उससे पहले ही भारत पूरा कर लेगा। इसके लिए हम सभी को प्रयास करना होगा।

पूर्वांचल मोर्चा दिल्ली प्रदेश भाजपा के महासचिव जगदंबा सिंह ने कहा कि भारत को यदि 2047 में विकसित राष्ट्र बनाना है तो हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सभी को मिलकर काम करना होगा। ऊर्जा स्रोत के जो परंपरागत स्रोत हैं, उनकी अपनी एक सीमा है इसलिए हमें ऊर्जा के अन्य विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना होगा। हरित ऊर्जा के माध्यम से देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर तो बनेगा ही, साथ ही साथ मानव जाति, सृष्टि के जीव- जंतुओं एवं वातावरण पर इसके दुष्प्रभाव भी कम होंगे। कहने का आशय यह है कि हमें विकास की वह राह पकड़नी है जो विकास के साथ पर्यावरण के भी अनुकूल हो।

भारत सरकार के अवर सचिव श्री संजय कुमार ने कहा कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए प्रयास ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक साबित होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मार्ग नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक समावेशन और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ी छलांग है।

उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा भारत को पर्यावरणीय चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाएगी और देश को एक सशक्त, आत्मनिर्भर तथा समृद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करेगी। प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टि प्रत्येक भारतीय का सपना है और इसे साकार करने में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।

श्री संजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हरित ऊर्जा आधारित विकास यात्रा एक नए युग की शुरुआत करेगी, जो भारत को न केवल विकसित राष्ट्र बल्कि विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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BN

Bureau NOTD

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NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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