Wednesday, 26 August 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
MERI समूह ने दिखाई भारत की स्पेस-मैरीटाइम शक्ति की नई राह, 2047 के आर्थिक लक्ष्य पर फोकस न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मेयर ज़ोहरान ममदानी ने जताया विरोध वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के नियमन की दिशा में भारत में अहम कदम 25 अगस्त 1609: जब गैलीलियो ने टेलीस्कोप से बदली ब्रह्मांड को देखने की इंसानी नजर, आज पूरे हुए 417 साल Tarun Tejpal Case: 2013 रेप केस में तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर दिल्ली के जसौला में पतंग के पीछे दौड़ते 15 साल के मिथुन की डूबने से मौत, 4 दिन बाद नाले से मिला शव Xiaomi Mijia Smart Air Purifier 6 और 4 Compact भारत में लॉन्च, कीमत ₹7,999 से शुरू; जानें फीचर्स और खासियत मोरारी बापू ने हार्वर्ड से भारत के पवित्र ग्रंथों को संरक्षित करने का आग्रह किया, नौ दिवसीय राम कथा का समापन MERI समूह ने दिखाई भारत की स्पेस-मैरीटाइम शक्ति की नई राह, 2047 के आर्थिक लक्ष्य पर फोकस न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मेयर ज़ोहरान ममदानी ने जताया विरोध वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के नियमन की दिशा में भारत में अहम कदम 25 अगस्त 1609: जब गैलीलियो ने टेलीस्कोप से बदली ब्रह्मांड को देखने की इंसानी नजर, आज पूरे हुए 417 साल Tarun Tejpal Case: 2013 रेप केस में तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, दो हफ्ते में करना होगा सरेंडर दिल्ली के जसौला में पतंग के पीछे दौड़ते 15 साल के मिथुन की डूबने से मौत, 4 दिन बाद नाले से मिला शव Xiaomi Mijia Smart Air Purifier 6 और 4 Compact भारत में लॉन्च, कीमत ₹7,999 से शुरू; जानें फीचर्स और खासियत मोरारी बापू ने हार्वर्ड से भारत के पवित्र ग्रंथों को संरक्षित करने का आग्रह किया, नौ दिवसीय राम कथा का समापन

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मेयर ज़ोहरान ममदानी ने जताया विरोध

मोहन भागवत के ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में विवाद गहरा गया है। ममदानी के विरोध के बाद मैरी मिलबेन ने भी पलटवार किया।

न्यूयॉर्क: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों भारत से जुड़ा एक कार्यक्रम चर्चा का केंद्र बन गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। इसी कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया है।

ममदानी ने कहा कि वह इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते, लेकिन साथ ही यह भी माना कि यदि आयोजन निजी है तो उसे रद्द करने का अधिकार नगर प्रशासन के पास है या नहीं, इस पर उन्हें स्पष्टता नहीं है। यानी मेयर का विरोध राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर सामने आया है, लेकिन उन्होंने कार्यक्रम को प्रशासनिक रूप से रोकने का कोई दावा नहीं किया।

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब RSS अपने स्थापना के 100वें वर्ष के अवसर पर भारत से बाहर भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदायों से संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भागवत की अमेरिका यात्रा इसी वैश्विक आउटरीच का हिस्सा मानी जा रही है।

क्या है 29 अगस्त का कार्यक्रम?

29 अगस्त को प्रस्तावित कार्यक्रम का नाम ‘Universal Oneness Celebration’ है। इसका आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (AHEAD Forum) की ओर से किया जा रहा है।

आयोजकों के मुताबिक, इसमें अमेरिका के 200 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठन भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का केंद्रीय विचार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की अवधारणा पर आधारित बताया गया है।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम रक्षाबंधन के अवसर से भी जुड़ा है और इसका उद्देश्य हिंदू-अमेरिकी समुदाय को साझा सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सेवा, धार्मिक संवाद और वैश्विक एकता जैसे मुद्दों पर एक मंच पर लाना है। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े वक्ताओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है।

शुरुआती रिपोर्टों में कार्यक्रम को Madison Square Garden से जोड़ा गया है और कई मीडिया रिपोर्टों ने इसे वहां होने वाला कार्यक्रम बताया है। लेकिन कार्यक्रम की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल आयोजन स्थल को Manhattan, New York बताया गया है और सटीक स्थान की पुष्टि बाद में किए जाने की बात लिखी है।

ममदानी ने क्यों जताया विरोध?

ममदानी से जब इस कार्यक्रम को रद्द करने के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि वह इस आयोजन का समर्थन नहीं करते। लेकिन उनके बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह था कि उन्हें नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने के मामले में शहर प्रशासन के पास कानूनी अधिकार है या नहीं।

उन्होंने अपने भारतीय-अमेरिकी पारिवारिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के बारे में उनकी समझ एक बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की रही है, जहां हर व्यक्ति के लिए जगह है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे आंदोलन के उभार को लेकर चिंता है, जिसे वह किसी देश की पहचान के एक बहिष्कारी दृष्टिकोण पर आधारित मानते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध केवल भारतीय-अमेरिकी के रूप में नहीं, बल्कि न्यूयॉर्क के मेयर के तौर पर भी है, क्योंकि उनका कहना है कि न्यूयॉर्क हर रंग, धर्म, आस्था और पृष्ठभूमि के लोगों के समावेश में विश्वास करता है। यही बयान अब भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

ममदानी का भारत से क्या संबंध है?

ज़ोहरान ममदानी न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम और भारतीय-अमेरिकी मेयर हैं। उनकी मां के परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। ममदानी ने अपने बयान में इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को लेकर उनका व्यक्तिगत अनुभव एक ऐसे समाज का रहा है जहां विभिन्न समुदायों के लिए जगह है।

यही कारण है कि उनके बयान को केवल एक स्थानीय मेयर की प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा। उनके भारतीय-अमेरिकी परिचय के कारण RSS और भारत की राजनीति से जुड़ा यह मुद्दा न्यूयॉर्क की स्थानीय राजनीति से निकलकर व्यापक अंतरराष्ट्रीय चर्चा तक पहुंच गया है।

RSS और मोहन भागवत का पक्ष

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में हुई थी और 2026 में संगठन अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। RSS के मौजूदा प्रमुख मोहन भागवत 2009 से संगठन के सरसंघचालक हैं। उनके नेतृत्व में संगठन ने भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों और हिंदू समुदायों के साथ संपर्क को भी अपने कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया है।

RSS का कहना है कि उसके बारे में विदेशों में कई तरह की धारणाएं और गलतफहमियां हैं। संगठन के अनुसार भागवत की विदेश यात्रा का एक उद्देश्य भारत, हिंदू समाज और RSS के बारे में उसके दृष्टिकोण को सामने रखना तथा भारतीय मूल के लोगों के साथ संवाद बढ़ाना है।

RSS स्वयं को एक सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन के रूप में प्रस्तुत करता है और अल्पसंख्यकों के प्रति असहिष्णुता से जुड़े आरोपों को खारिज करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, RSS ने खुद को हिंदू-केंद्रित सभ्यतागत और सांस्कृतिक आंदोलन बताया है, जिसका उद्देश्य हिंदुओं को संगठित करना और राष्ट्र को गौरव के शिखर तक ले जाना है।

भागवत की अमेरिका यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?

भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के तीन देशों की यात्रा पर हैं। RSS के मुताबिक यह दौरा संगठन के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका में उनकी यात्रा का प्रमुख कार्यक्रम न्यूयॉर्क का Universal Oneness Celebration है। इसके बाद कनाडा और ब्रिटेन में भी भारतीय मूल के समुदायों से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

इस दौरे को RSS के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संगठन अपने 100 साल पूरे होने के मौके पर भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के लोगों तक अपनी विचारधारा और संगठन की भूमिका का संदेश पहुंचाना चाहता है।

RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संपर्क का एक उद्देश्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और वैश्विक एकता के विचार को भी सामने रखना है।

कार्यक्रम के आयोजकों की राय

AHEAD Forum यानी American Hindus for Engagement and Dialogue इस आयोजन को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। संगठन के मुताबिक इसमें 200 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठन सहयोग कर रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य किसी राजनीतिक रैली के बजाय साझा विरासत, सामाजिक जिम्मेदारी, सामुदायिक सेवा और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। इसके केंद्र में ‘Universal Oneness’ यानी सार्वभौमिक एकता का विचार रखा गया है।

यही वजह है कि आयोजक इसे समुदाय-केंद्रित और सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि इसके आलोचक भागवत की मौजूदगी और RSS के राजनीतिक-सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

विरोध करने वाले संगठनों की चिंता

भागवत के कार्यक्रम को लेकर केवल ममदानी ने ही सवाल नहीं उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क में कई स्थानीय संगठनों ने भी भागवत की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है। इन समूहों की आपत्ति RSS के इतिहास और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े विवादों को लेकर है।

इस विरोध के पीछे मुख्य बहस RSS की विचारधारा और भारत में धर्म, राष्ट्रवाद तथा अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर लंबे समय से चल रही अंतरराष्ट्रीय चर्चा है। आलोचक RSS को हिंदुत्व की राजनीति से जोड़ते हैं, जबकि RSS अपने संगठनात्मक चरित्र को सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन के रूप में परिभाषित करता है।

इस तरह 29 अगस्त का कार्यक्रम सिर्फ एक सामुदायिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत की राजनीति, प्रवासी भारतीय समुदाय और अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा बन गया है।

मैरी मिलबेन ने ममदानी को घेरा

ममदानी के विरोध के बाद अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने भी उन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। मिलबेन भारत में विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों में भारतीय राष्ट्रगान गाने के कारण चर्चित रही हैं।

26 अगस्त को X पर प्रतिक्रिया देते हुए मिलबेन ने आरोप लगाया कि ममदानी और उनके जैसे आलोचक RSS कार्यक्रम का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP के विरोधी हैं। उन्होंने ममदानी और उनके आलोचकों के लिए तीखी राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया और कहा कि कार्यक्रम को लेकर MSG का फैसला निजी आयोजन से जुड़े व्यावसायिक संबंधों पर निर्भर होगा।

मिलबेन ने यह भी कहा कि उन्हें कार्यक्रम के नाम में ‘Oneness’ यानी एकता का विचार पसंद है और उम्मीद जताई कि आयोजन में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर सार्थक संवाद भी हो।

उनकी प्रतिक्रिया ने विवाद को एक और राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब बहस केवल ममदानी और RSS के बीच नहीं है, बल्कि अमेरिका में भारतीय राजनीति के समर्थक और आलोचक भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

क्या ममदानी कार्यक्रम को रद्द करा सकते हैं?

यह सवाल इस विवाद के केंद्र में है। ममदानी ने खुद कहा है कि उन्हें नहीं पता कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार है या नहीं। इसलिए उनके बयान को कार्यक्रम रद्द करने के प्रशासनिक आदेश के रूप में नहीं देखा जा सकता।

यह अंतर महत्वपूर्ण है। किसी आयोजन का राजनीतिक विरोध करना और उसे कानूनी तौर पर रोकने की शक्ति होना दो अलग बातें हैं। ममदानी ने फिलहाल अपने विरोध की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की है, लेकिन कार्यक्रम को रोकने के लिए कोई प्रशासनिक आदेश घोषित नहीं किया है।

धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की बहस

इस विवाद का एक और पहलू धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक संवाद है। एक तरफ आयोजक इसे हिंदू-अमेरिकी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का कार्यक्रम बता रहे हैं। दूसरी तरफ आलोचक RSS की विचारधारा और भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े विवादों के कारण भागवत की मौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं।

इसी बहस के बीच मैरी मिलबेन ने भी उम्मीद जताई कि कार्यक्रम में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर सार्थक चर्चा हो। यानी कार्यक्रम के समर्थकों के बीच भी यह अपेक्षा सामने आई है कि आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित न रहे, बल्कि विभिन्न विचारों के बीच संवाद का अवसर बने।

भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम

मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा और न्यूयॉर्क में होने वाला कार्यक्रम ऐसे समय आया है जब भारतीय मूल का समुदाय अमेरिका की राजनीति और सामाजिक जीवन में लगातार प्रभावशाली हो रहा है। न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में ममदानी की भारतीय पारिवारिक पृष्ठभूमि भी इस पूरे घटनाक्रम को अतिरिक्त महत्व देती है।

हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ममदानी का विरोध अमेरिकी सरकार की आधिकारिक विदेश नीति नहीं है। यह न्यूयॉर्क के मेयर का राजनीतिक और वैचारिक रुख है। इसी तरह कार्यक्रम का आयोजन भी एक निजी सामुदायिक मंच द्वारा किया जा रहा है।

इसलिए इस पूरे मामले को भारत-अमेरिका के औपचारिक राजनयिक विवाद के रूप में देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।

USCIRF की आपत्ति और भारत सरकार का जवाब

भागवत की यात्रा के बीच अमेरिकी Commission on International Religious Freedom (USCIRF) की टिप्पणियां भी चर्चा में आई हैं। संस्था ने RSS नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संपर्क से बचने और संभावित प्रतिबंधों की दिशा में कदम उठाने की सिफारिश की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF की टिप्पणियों को खारिज करते हुए उसे पक्षपाती संस्था बताया है और उसके आकलनों को गलत तथा उकसाने वाला कहा है।

इससे साफ है कि भागवत की अमेरिका यात्रा केवल प्रवासी भारतीय समुदाय के कार्यक्रमों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गई है। इसमें धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार, भारतीय राजनीति और भारत की वैश्विक छवि से जुड़े सवाल भी जुड़ गए हैं।

ये भी पढ़ें :- मोरारी बापू ने हार्वर्ड से भारत के पवित्र ग्रंथों को संरक्षित करने का आग्रह किया, नौ दिवसीय राम कथा का समापन

Home » न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मेयर ज़ोहरान ममदानी ने जताया विरोध
शेयर करें: Facebook X WhatsApp

MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

// न्यूज़लेटर

हर सुबह सबसे पहले ख़बरें।

अपना ईमेल दर्ज करें — कोई स्पैम नहीं, सिर्फ ज़रूरी खबरें।

Exit mobile version