नई दिल्ली: डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर इंदिरा इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ द्वारा राजधानी दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें “बाल संविधान: बचपन से पढ़े संविधान तो देश बने महान” नामक कॉमिक बुक का भव्य लोकार्पण किया गया। यह पहल बच्चों को सरल और रोचक तरीके से संविधान की समझ देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इंदिरा इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ की ग्रुप डायरेक्टर डॉ. जी. डी. राजपाल ने कहा कि अंबेडकर जयंती पर इस पुस्तक का लोकार्पण भविष्य की पीढ़ी को संविधान के मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बच्चों को बचपन से ही अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेताओं ने सराहा ‘बाल संविधान’ पहल
मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में ‘बाल संविधान’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारत का संविधान एक महान दस्तावेज है, जिसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने रचा। श्री कैलाश विजयवर्गीय ने डॉ. बम की दूरदर्शिता की प्रशंसा की उन्होंने कहा कि बच्चों को संविधान समझाने के लिए कॉमिक्स और छोटी पुस्तकों के माध्यम से किया गया यह प्रयास बेहद सराहनीय है। यह पहल नई पीढ़ी को संविधान के मूल्यों से जोड़ने और उन्हें जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा ‘बाल संविधान’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि हर छात्र को बचपन से ही संविधान तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सरल और रोचक तरीके से संविधान समझाने का यह प्रयास सराहनीय है, जिससे नई पीढ़ी न केवल संविधान को समझेगी बल्कि उसे अपने जीवन में अपनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जितना अधिक युवा संविधान को जानेंगे, उतना ही वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनेंगे।
कार्यक्रम के विशेष सत्र में अतिथियों द्वारा पुस्तक के लेखक को उनके उत्कृष्ट सृजन के लिए सम्मानित किया गया
क्या कहती है ‘बाल सविंधान’ कॉमिक
संस्थान के चेयरमैन डॉ. अक्षय क्रांति बम के अनुसार, “बाल संविधान” एक कॉमिक बुक सीरीज है, जिसे कक्षा 5वीं से 10वीं तक के बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस श्रृंखला का उद्देश्य है कि बच्चे अपनी भाषा में संविधान को आसानी से समझ सकें और लोकतंत्र की मूल भावना से जुड़ सकें।
उन्होंने बताया कि यह पहल केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ डिजिटल वीडियो सामग्री भी तैयार की गई है, जिससे बच्चे विज़ुअली और इंटरैक्टिव तरीके से संविधान को समझ सकें। संस्थान का लक्ष्य है कि “बाल संविधान” देश के हर विद्यालय और हर छात्र के स्कूल बैग तक पहुंचे, ताकि जब विद्यार्थी मतदान योग्य हों, तब वे अपने वोट की अहमियत और सही मायने समझ सकें।
गुड टच और बेड टच की किताब भी आएगी
“बाल संविधान” के तहत 10 कॉमिक पुस्तकों की श्रृंखला तैयार की जा रही है। इसके साथ ही “स्पर्श” नामक एक विशेष पुस्तक भी बनाई गई है, जो बच्चियों को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक करेगी। यह पुस्तक आसान भाषा में तैयार की गई है और बाल संविधान के साथ हर बेटी को निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य न केवल बच्चों को संविधान से जोड़ना है, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है, ताकि आने वाली पीढ़ी एक सुरक्षित और संवेदनशील समाज के निर्माण में योगदान दे सके।
