Sunday, 02 August 2026
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“एक बच्चे की तरह सीख रहा हूं” — अंतरिक्ष से शुभांशु शुक्ला का पहला भावुक संदेश

Axiom-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, बोले—यह अनुभव अविश्वसनीय है; देशभर में जश्न का माहौल

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष से अपना पहला संदेश भेजकर देशवासियों को भावुक कर दिया है। 39 वर्षीय शुक्ला, जो Axiom-4 मिशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचे हैं, ने कहा कि वह खुद को एक बच्चे की तरह महसूस कर रहे हैं, जो अंतरिक्ष में रहना सीख रहा है।

फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट द्वारा इस मिशन को लॉन्च किया गया था। अंतरिक्ष पहुंचने के कुछ घंटों बाद अपने पहले संदेश में शुभांशु ने कहा, “सभी को अंतरिक्ष से नमस्कार। मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर रोमांचित हूं। जब लॉन्चपैड पर कैप्सूल में बैठा था, तो मन में बस यही था—चलो, अब चलें।”

उन्होंने बताया कि लॉन्च के दौरान उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई उन्हें पीछे की ओर जोर से धकेल रहा हो और फिर अचानक सब कुछ शांत हो गया—जैसे वह शून्य में तैर रहे हों। “मैं सीख रहा हूं कि अंतरिक्ष में कैसे चला जाए, कैसे खाया जाए, यह अविश्वसनीय अनुभव है,” उन्होंने कहा।

भारत का गौरवपूर्ण क्षण
Axiom-4 मिशन में शुभांशु के साथ अमेरिकी कमांडर पैगी व्हिटसन, हंगरी के टिबोर कापू और पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की भी शामिल हैं। पैगी व्हिटसन NASA की पूर्व अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं, जिनके नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं।

इस मिशन के साथ शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय नागरिक बन गए हैं। इससे पहले 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

विश्व भर में उत्सव का माहौल
इस ऐतिहासिक मिशन को लेकर भारत, हंगरी, पोलैंड और अमेरिका में सार्वजनिक स्थलों पर वॉच पार्टियों का आयोजन हुआ। लखनऊ, बुडापेस्ट, डांस्क और ह्यूस्टन में हजारों लोगों ने लाइव लॉन्च देखा। शुभांशु के परिजन भी इस गर्व के क्षण के साक्षी बने।

कई बार टली लॉन्चिंग, फिर भी हासिल की सफलता
Axiom-4 मिशन की शुरुआत पहले 29 मई को होनी थी, लेकिन खराब मौसम और तकनीकी खामियों के चलते इसे कई बार स्थगित करना पड़ा। स्पेसएक्स, नासा और एक्सिओम की टीमों ने इन चुनौतियों को दूर करने में करीब एक महीना लगाया।

अब जब शुभांशु शुक्ला सफलता के साथ अंतरिक्ष में मौजूद हैं, यह भारत के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है। आने वाले दिनों में वह अंतरिक्ष से अपने अनुभव साझा करते रहेंगे, जिस पर पूरे विश्व की निगाहें टिकी हैं।

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MK

Manoj K Sharma

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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