Tuesday, 29 September 2026
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Kolkata Hotel Fire: होटल में लगी आग ने ली 9 की जान, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

कोलकाता के होटल में तड़के लगी आग ने 9 लोगों की जान ले ली। घना धुआं मौत की बड़ी वजह बना, जबकि करीब 80 लोगों को रेस्क्यू किया गया।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बुधवार, 10 अगस्त तड़के एक होटल में लगी भीषण आग ने नौ लोगों की जान ले ली। हादसा मध्य कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट यानी पुराने फ्री स्कूल स्ट्रीट इलाके में स्थित एक पांच मंजिला इमारत में हुआ। इस इमारत में कई होटल चल रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग कमरों के अंदर ही फंस गए। छह लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल है।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में कुछ ही दिनों के भीतर होटल में आग लगने की यह दूसरी बड़ी घटना है। सोमवार को बीरभूम के तारापीठ में भी एक होटल में आग लगी थी, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद वहां कई होटलों के खिलाफ अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की गई। लगातार हो रहे इन हादसों ने राज्य में होटल और व्यावसायिक इमारतों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात करीब दो बजे लगी आग

जानकारी के मुताबिक, मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित होटल में आग बुधवार तड़के करीब 1:45 से 2 बजे के बीच लगी। उस समय होटल में ज्यादातर लोग सो रहे थे। शुरुआती सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। रिपोर्टों के अनुसार करीब पांच फायर टेंडर आग बुझाने के अभियान में लगाए गए। पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया।

आग के साथ सबसे बड़ी चुनौती घना धुआं था। इमारत के भीतर धुआं इतनी तेजी से भर गया कि दमकलकर्मियों के लिए सीढ़ियों के रास्ते ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धुएं की वजह से बचाव अभियान बेहद कठिन रहा। आग की लपटों पर काबू पाने के बाद भी इमारत काफी गर्म थी, इसलिए कुछ समय तक कूलिंग ऑपरेशन जारी रखा गया।

9 लोगों की मौत, मृतकों में चार साल का बच्चा भी शामिल

इस हादसे में कुल नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, मृतकों में छह पुरुष, दो महिलाएं और चार साल का एक बच्चा शामिल है। छह अन्य लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल भेजा गया।

मृतकों की पहचान और नागरिकता को लेकर शुरुआती घंटों में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। घटनास्थल पर पहुंचे पश्चिम बंगाल के अग्निशमन मंत्री कौशिक चौधरी ने शुरुआत में कहा था कि मृतकों में भारतीय और बांग्लादेशी नागरिक दोनों हो सकते हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया चल रही है। बाद की रिपोर्टों में अग्निशमन विभाग के हवाले से बताया गया कि मृतकों में बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे और वे इलाज के लिए कोलकाता आए थे।

यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कोलकाता लंबे समय से पड़ोसी देशों, खासकर बांग्लादेश से आने वाले मरीजों के लिए एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र रहा है। इलाज के लिए आने वाले कई मरीज और उनके परिवार अस्पतालों के आसपास कम या मध्यम लागत वाले होटलों और गेस्ट हाउस में ठहरते हैं। ऐसे में इन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था केवल स्थानीय यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

धुआं बना मौत का कारण

हादसे की सबसे भयावह तस्वीर इमारत के अंदर भरे धुएं से सामने आती है। अधिकारियों के मुताबिक, कई लोगों के लिए आग की लपटों से ज्यादा घना धुआं जानलेवा साबित हुआ। एक अग्निशमन अधिकारी ने संकेत दिया कि कुछ पीड़ितों की मौत सांस लेने में परेशानी के कारण बताई जा रही है।

पुलिस अधिकारी ने भी बताया कि इमारत में घना धुआं भर जाने के कारण दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने में कठिनाई हुई। पश्चिम बंगाल के मंत्री ने भी कहा कि कई लोग बाहर नहीं निकल सके और कुछ कमरों में खिड़कियां तक नहीं थीं। एक ऐसे कमरे से ही एक दंपती को बाहर निकाला जा सका, जिसमें खिड़की मौजूद थी।

यही कारण है कि होटल की संरचना और वेंटिलेशन व्यवस्था अब जांच के केंद्र में है। यदि किसी इमारत में पर्याप्त निकास मार्ग, खिड़कियां और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था नहीं है, तो आग लगने की स्थिति में कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर जानलेवा बन सकता है।

एसी ब्लास्ट और शॉर्ट सर्किट की संभावना

आग लगने की वजह को लेकर फिलहाल अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया है कि तीसरी मंजिल पर एसी में विस्फोट से आग शुरू होने की आशंका है। हालांकि, रिपोर्ट में साफ किया गया है कि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वहीं, पश्चिम बंगाल के अग्निशमन मंत्री कौशिक चौधरी ने आग के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वास्तविक कारण फोरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएगा।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि आग निश्चित रूप से एसी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। पुलिस और फोरेंसिक टीम की जांच के बाद ही इस सवाल का जवाब मिल सकेगा।

एक ही इमारत में चल रहे थे कई होटल

हादसे का सबसे गंभीर पहलू इमारत का इस्तेमाल भी है। अधिकारियों के मुताबिक, पांच मंजिला इमारत में कई होटल संचालित हो रहे थे। पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने घटनास्थल पर कहा कि एक ही इमारत में कई छोटे-छोटे कमरों के साथ होटल चल रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इमारत में करीब दस होटल संचालित होने की जानकारी सामने आई है और यह जांच की जाएगी कि इन प्रतिष्ठानों के पास वैध ट्रेड और फायर लाइसेंस थे या नहीं।

अग्निशमन मंत्री ने भी इमारत की स्थिति को बेहद खराब बताया और कहा कि भवन प्रबंधन ने बुनियादी सुरक्षा और निर्माण संबंधी मानकों का पालन नहीं किया था। उन्होंने होटल के संचालन में कई अनियमितताओं के आरोपों का भी उल्लेख किया।

यही वजह है कि अब जांच केवल आग लगने के कारण तक सीमित नहीं रहने वाली है। प्रशासन को यह भी पता लगाना होगा कि होटल को संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली, इमारत की फायर सेफ्टी जांच कब हुई थी और क्या वहां आवश्यक अग्निशमन उपकरण मौजूद थे।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठते सवाल

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में होटल चल रहे थे तो क्या वहां सभी अनिवार्य अग्नि सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे?

घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, इमारत में सुरक्षा और निर्माण से जुड़े कई मानकों के पालन को लेकर सवाल हैं। वेंटिलेशन की समस्या, कमरों में खिड़कियों की कमी और घने धुएं के कारण बचाव अभियान में आई दिक्कतें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आग लगने की स्थिति में लोगों के लिए सुरक्षित बाहर निकलने के पर्याप्त विकल्प नहीं थे।

होटल जैसी इमारतों में फायर अलार्म, अग्निशामक यंत्र, स्प्रिंकलर सिस्टम, स्पष्ट निकास मार्ग, आपातकालीन रोशनी, धुआं निकालने की व्यवस्था और सीढ़ियों तक आसान पहुंच जैसे इंतजाम बेहद जरूरी होते हैं। हालांकि, इस विशेष होटल में इनमें से कौन-कौन से इंतजाम मौजूद थे या नहीं थे, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इमारत का मालिक फरार

हादसे के बाद इमारत के मालिक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, भवन मालिक फिलहाल फरार है और उसे तलाशने के लिए उसके संभावित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। न्यू मार्केट थाने में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है और पुलिस ने घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इमारत में कितने होटल चल रहे थे, उनके पास कौन-कौन से लाइसेंस थे और क्या अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भवन के निर्माण, इस्तेमाल और होटल संचालन से संबंधित अनुमतियां नियमों के अनुरूप थीं या नहीं।

करीब 80 लोगों को बचाया गया

हादसे के बीच राहत की एक बड़ी बात यह रही कि बचाव दल ने बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 लोगों को इमारत से रेस्क्यू किया गया।

घने धुएं के कारण बचावकर्मियों के लिए अंदर जाना आसान नहीं था। आग बुझाने के बाद भी इमारत को ठंडा करने का काम किया गया ताकि अंदर किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की स्थिति में तलाशी और बचाव अभियान सुरक्षित तरीके से चलाया जा सके।

कोलकाता के व्यस्त इलाके में हुआ हादसा

मिर्जा गालिब स्ट्रीट, जिसे पहले फ्री स्कूल स्ट्रीट के नाम से जाना जाता था, मध्य कोलकाता के व्यस्त इलाकों में आता है। न्यू मार्केट और पार्क स्ट्रीट के आसपास का यह क्षेत्र होटल, रेस्तरां, दुकानों और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जाना जाता है। ऐसे घने और व्यस्त इलाके में पुरानी या संकरी इमारतों में आग लगने पर दमकल और बचाव अभियान को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

इस मामले में भी इमारत के भीतर धुआं भरने और ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने में मुश्किल की बात सामने आई है।

कुछ ही दिनों में बंगाल में दूसरा बड़ा होटल अग्निकांड

कोलकाता की यह घटना इसलिए भी चिंता बढ़ाती है क्योंकि पश्चिम बंगाल में इसी सप्ताह एक और होटल में बड़ा अग्निकांड हुआ था। सोमवार को बीरभूम जिले के तारापीठ में होटल में आग लगने से कम से कम आठ लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद प्रशासन ने अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले कम से कम 15 होटलों के लाइसेंस रद्द किए थे।

दो बड़े होटल अग्निकांड कुछ ही दिनों के भीतर सामने आने के बाद अब राज्य के होटल और लॉज की फायर सेफ्टी ऑडिट को लेकर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। खासकर पुराने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बने छोटे होटलों की जांच जरूरी हो जाती है, जहां कम जगह में बड़ी संख्या में कमरे बनाए जाते हैं।

फिलहाल पुलिस और फोरेंसिक टीम जांच में जुटी है। आग के वास्तविक कारण, होटल की सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। लेकिन इतना तय है कि मिर्जा गालिब स्ट्रीट की यह घटना केवल नौ परिवारों के लिए एक भयावह त्रासदी नहीं है, बल्कि कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल में होटल एवं व्यावसायिक इमारतों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की जरूरत की ओर भी इशारा करती है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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