बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच Kayu Rituals ने Lung Ayu पेश किया है। इसमें 9 हर्बल तत्व शामिल हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है
नई दिल्ली: देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। बाहर निकलने, ऑफिस जाने और खुले में व्यायाम करने के दौरान प्रदूषित हवा के संपर्क में आने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोग अपनी सेहत और खासकर सांसों की देखभाल को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं।
इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक वेलनेस ब्रांड Kayu Rituals ने ‘Lung Ayu’ नाम से एक हर्बल फॉर्मूलेशन पेश किया है। कंपनी के अनुसार, इसमें नौ ऐसे तत्व शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी पद्धतियों में होता रहा है।
लंग आयु में शामिल हैं ये 9 हर्बल तत्व
ब्रांड के मुताबिक, लंग आयु के प्रत्येक कैप्सूल में नौ प्रमुख तत्व शामिल हैं:
- वासा एक्सट्रैक्ट
- आंवला एक्सट्रैक्ट
- हल्दी
- तुलसी
- पुष्करमूल
- यष्टिमधु
- पाइन बार्क
- पिप्पली एक्सट्रैक्ट
- मुल्लेन एक्सट्रैक्ट
इनमें वासा, तुलसी, आंवला और यष्टिमधु का इस्तेमाल आयुर्वेद की पारंपरिक पद्धतियों में लंबे समय से होता रहा है।
पारंपरिक आयुर्वेद को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश
Kayu Rituals का कहना है कि वह आयुर्वेदिक ज्ञान को केवल लोकप्रिय चलन के रूप में पेश नहीं करना चाहता। ब्रांड का फोकस पारंपरिक जानकारी, अध्ययन और सोच-समझकर तैयार किए गए फॉर्मूलेशन को रोजमर्रा की देखभाल से जोड़ना है।
कंपनी के अनुसार, किसी भी वेलनेस प्रोडक्ट को तैयार करने से पहले उसके तत्वों और फॉर्मूलेशन पर ध्यान दिया जाता है।
प्रीति चौधरी ने आयुर्वेद की मूल समझ पर दिया जोर
Kayu Rituals की सीईओ और संस्थापक प्रीति चौधरी ने कहा कि आयुर्वेद की मूल समझ को कई बार बहुत सरल तरीके से पेश किया जाता है। उनके मुताबिक, यह एक व्यवस्थित परंपरा है, जिसमें हर तत्व को सोच-समझकर शामिल किया जाता है।
उन्होंने बताया कि Kayu Rituals के साथ उनका उद्देश्य इसी गंभीरता को रोजमर्रा की वेलनेस से जोड़ना है। कंपनी अपने फॉर्मूलेशन को अध्ययन और समय के साथ तैयार करने पर जोर देती है।
लंग आयु के जरिए ब्रांड ने शहरी जीवन में बढ़ती प्रदूषण संबंधी चिंताओं के बीच आयुर्वेदिक देखभाल के विकल्प को सामने रखा है। हालांकि, किसी भी हर्बल सप्लीमेंट को वायु प्रदूषण से बचाव या फेफड़ों की बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
