Monday, 03 August 2026
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कानपुर किडनी रैकेट: 8वीं पास चला रहा था किडनी का काला कारोबार

6-10 लाख में डोनर से खरीद, 90 लाख में बिक्री, अस्पताल रिकॉर्ड में कोई एंट्री नहीं

टेलीग्राम से विदेश तक फैला नेटवर्क, 60+ अवैध ट्रांसप्लांट का शक

एक मैसेज से होती डील और कुछ घंटों मे निकाल ली जाती थी किडनी

कानपुर, न्यूज ऑफ द डे

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह इतना संगठित और पेशेवर था कि एक मैसेज से डील तय होती थी और कुछ ही घंटों में किसी की किडनी निकाल ली जाती थी। अब तक 60 से ज्यादा लोगों की किडनी अवैध रूप से निकाले जाने की आशंका जताई जा रही है।

इस रैकेट का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर विदेशों तक फैला हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया है कि डोनर और रिसीवर को जोड़ने का पूरा खेल ऑनलाइन होता था, जिससे पूरे ऑपरेशन को गुप्त रखा जा सके।

ऑपरेशन के दिन बदल जाता था पूरा अस्पताल

रैकेट का तरीका बेहद शातिर था। जिस दिन ऑपरेशन होना होता, उस दिन अस्पताल के नियमित स्टाफ को हटा दिया जाता था। उनकी जगह बाहर से बुलाई गई विशेष सर्जिकल टीम को तैनात किया जाता था। ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीजों को अलग-अलग ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया जाता था ताकि कोई सुराग न मिल सके। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में इन ऑपरेशनों का कोई जिक्र तक नहीं होता था। यानि कागजों में सब कुछ साफ और वैध दिखाया जाता था, जबकि अंदर ही अंदर अवैध ट्रांसप्लांट का खेल चलता रहता था।

8वीं पास एंबुलेंस ड्राइवर बना ‘डॉक्टर’

इस पूरे रैकेट का सबसे चौंकाने वाला चेहरा शिवम अग्रवाल उर्फ काना है। जालौन का रहने वाला शिवम महज 8वीं पास है और पहले एंबुलेंस चलाता था। लेकिन उसने स्टेथोस्कोप डालकर खुद को डॉक्टर के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। स्थानीय लोग उसे डॉक्टर समझकर भरोसा करने लगे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर वह इस बड़े रैकेट का अहम हिस्सा बन गया। वहीं मेरठ के एक डॉक्टर अफजल का नाम भी सामने आया है, जो टेलीग्राम के जरिए डोनर और मरीज के बीच सौदे तय कराता था।

पैसों का लालच देकर बनाए जाते थे डोनर

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर डोनर बनाता था। बिहार के एक MBA छात्र को भी इसी तरह फंसाया गया। उसे मोटी रकम का झांसा देकर किडनी डोनेट कराने के लिए तैयार किया गया। आरोप है कि डोनर को 6 से 10 लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि उसी किडनी को मरीज को 90 लाख रुपये से ज्यादा में बेचा जाता था। इस अवैध कारोबार में मोटा मुनाफा कमाया जा रहा था।

पारुल तोमर केस ने खोली पोल

इस रैकेट की क्रूरता पारुल तोमर के मामले से साफ होती है। उन्होंने करीब 80 लाख रुपये खर्च कर किडनी ट्रांसप्लांट कराया, लेकिन अस्पताल की लापरवाही और गंदगी के चलते उन्हें गंभीर संक्रमण हो गया। उनका हीमोग्लोबिन गिरकर 6.3 तक पहुंच गया है और फिलहाल वह लखनऊ के SGPGI में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। यह मामला पूरे नेटवर्क की लापरवाही और अमानवीयता को उजागर करता है।

डॉक्टर दंपति समेत 6 गिरफ्तार, जांच जारी

पुलिस ने इस मामले में आहूजा अस्पताल की संचालक डॉक्टर प्रीति आहूजा और सुरजीत सिंह आहूजा समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस उपायुक्त एसएम कासिम अबीदी के अनुसार, मामले में लगातार छापेमारी की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच में एक विदेशी महिला के ट्रांसप्लांट का मामला भी सामने आया है, जिससे इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पुष्टि होती है। फिलहाल पुलिस की कई टीमें इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में जुटी हैं। सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहा यह खेल इतने दिनों तक सिस्टम की नजरों से कैसे बचता रहा।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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