Home Remedies: UTI में क्रैनबेरी जूस क्यों माना जाता है असरदार? जानें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

बार-बार होने वाले Urinary Tract Infection (UTI) से बचाव में Cranberry जूस को क्यों माना जाता है उपयोगी? जानें विशेषज्ञों की राय, लक्षण, कारण और घरेलू उपाय।

मूत्र मार्ग संक्रमण यानी Urinary Tract Infection (UTI) महिलाओं में होने वाली सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विश्वभर की तरह भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं इस संक्रमण से प्रभावित होती हैं। यह संक्रमण आमतौर पर Escherichia coli (E. coli) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग या मूत्राशय में पहुंचकर संक्रमण पैदा करता है।

यूटीआई के सामान्य लक्षणों में पेशाब करते समय जलन या दर्द, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, निचले पेट में दर्द, पेशाब का धुंधला या तेज गंध वाला होना और कुछ मामलों में बुखार शामिल हैं।

डॉक्टर आमतौर पर यूटीआई के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। हालांकि, बार-बार होने वाले संक्रमण के मामलों में एंटीबायोटिक के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता (antibiotic resistance) बढ़ने की समस्या भी सामने आती है। इसी वजह से कई लोग संक्रमण की रोकथाम के लिए प्राकृतिक या घरेलू उपायों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यदि संक्रमण हो चुका है, तो सही इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह और दवा जरूरी होती है।

क्रैनबेरी पर सबसे ज्यादा रिसर्च

यूटीआई की रोकथाम के संदर्भ में Cranberry उत्पादों पर सबसे अधिक शोध हुआ है। क्रैनबेरी जूस, पाउडर या कैप्सूल में प्रोएंथोसायनिडिन (PACs) नामक यौगिक पाए जाते हैं। शोध के अनुसार यह तत्व बैक्टीरिया को मूत्र मार्ग की दीवारों से चिपकने से रोकने में मदद कर सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

2024 और 2025 में प्रकाशित कुछ अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि उच्च मात्रा में PACs वाले क्रैनबेरी सप्लीमेंट या बिना शक्कर वाला 100% क्रैनबेरी जूस नियमित रूप से लेने से बार-बार होने वाले यूटीआई के जोखिम में कमी आ सकती है। कुछ अध्ययनों में महिलाओं में संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है, हालांकि विशेषज्ञ इसे पूरी तरह निश्चित इलाज नहीं मानते।

यूटीआई से बचाव के अन्य प्राकृतिक विकल्प

  1. D-Mannose

D‑Mannose एक प्राकृतिक शर्करा है जो कुछ फलों में पाई जाती है। माना जाता है कि यह भी बैक्टीरिया को मूत्राशय की दीवारों से चिपकने से रोक सकती है। हालांकि इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक अध्ययनों में मिश्रित परिणाम सामने आए हैं।

  1. विटामिन C

Vitamin C मूत्र को अधिक अम्लीय बनाने में मदद कर सकता है, जिससे बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। आंवला, संतरा, नींबू और अमरूद जैसे फलों से इसकी पर्याप्त मात्रा प्राप्त की जा सकती है।

  1. प्रोबायोटिक्स

दही और Lactobacillus युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। खासकर एंटीबायोटिक लेने के बाद प्रोबायोटिक्स का सेवन लाभकारी माना जाता है।

कुछ घरेलू उपाय जो राहत दे सकते हैं

लहसुन – इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में सहायक हो सकते हैं।

सेब का सिरका – गुनगुने पानी में 1-2 चम्मच सेब का सिरका और थोड़ा शहद मिलाकर पीने से कुछ लोगों को जलन में राहत मिलती है।

धनिया या चावल का पानी – आयुर्वेद में इसे शरीर को ठंडक देने और जलन कम करने के लिए उपयोग किया जाता है।

गर्म सेक – पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की थैली रखने से दर्द और दबाव में अस्थायी राहत मिल सकती है।

कब लें डॉक्टर की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक उपाय यूटीआई की रोकथाम में सहायक हो सकते हैं, लेकिन यदि तेज दर्द, बुखार, उल्टी, या पेशाब में खून जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इलाज में देरी होने पर संक्रमण किडनी तक भी फैल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त पानी पीना, साफ-सफाई बनाए रखना, पेशाब को लंबे समय तक न रोकना और संतुलित आहार लेना मूत्र प्रणाली को स्वस्थ रखने के सबसे सरल और प्रभावी तरीके हैं।

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