अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.5% गिरकर करीब 4,223.95 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रहा और कारोबार के दौरान 4,200 डॉलर के करीब भी पहुंचा। जानिए क्या इस स्तर के नीचे और कमजोरी संभव है।
नई दिल्ली: सोने की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर को बड़ी गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के दाम 2% से ज्यादा गिर गए। अक्टूबर डिलीवरी वाला MCX गोल्ड करीब ₹3,214 टूटकर ₹1,47,667 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट में सोना करीब ₹1,50,500 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड 1.5% की गिरावट के साथ करीब 4,223.95 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर था, जबकि कुछ कारोबार के दौरान कीमत 4,200 डॉलर के करीब और इसके नीचे भी चली गई।
सोने में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश माने जाने वाले गोल्ड की मांग बढ़ सकती है। लेकिन इस बार अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने सोने पर दबाव बढ़ा दिया है।
MCX पर 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट
28 सितंबर को घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों में तेज बिकवाली हुई। अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला MCX गोल्ड ₹3,214 की गिरावट के साथ ₹1,47,667 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस दौरान सोने की कीमत में 2 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी रही। वहीं सितंबर डिलीवरी वाला MCX सिल्वर फ्यूचर्स ₹6,661 टूटकर ₹2,28,035 प्रति किलोग्राम पर आ गया।
सुबह के कारोबार में भी सोने पर दबाव साफ दिखाई दे रहा था। करीब 9:03 बजे MCX गोल्ड के 5 अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का भाव ₹1,48,092 प्रति 10 ग्राम था, जबकि MCX सिल्वर का 4 दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट करीब 2.6% गिरकर ₹2,28,566 प्रति किलोग्राम पर था।
यानी घरेलू बाजार में सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अन्य कीमती धातुओं पर दबाव रहा। स्पॉट सिल्वर करीब 2.6% गिरकर 62.64 डॉलर प्रति औंस, प्लैटिनम 2.1% गिरकर 1,741.45 डॉलर और पैलेडियम 2.1% नीचे 1,239.95 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
भारतीय बाजार में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने का भाव
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर भारतीय रिटेल बाजार पर भी दिखाई दिया। 28 सितंबर को 24 कैरेट सोने की राष्ट्रीय दर करीब ₹1,48,910 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,36,501 प्रति 10 ग्राम थी। 999 फाइन सिल्वर करीब ₹2,28,780 प्रति किलोग्राम थी।
प्रमुख शहरों की रिटेल कीमतों पर नजर डालें तो मुंबई में 24 कैरेट सोना ₹1,48,580 और 22 कैरेट सोना ₹1,36,198 प्रति 10 ग्राम था। नई दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,320 और 22 कैरेट सोना ₹1,35,960 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना ₹1,48,700 और 22 कैरेट ₹1,36,308 प्रति 10 ग्राम रहा।
कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,380 और 22 कैरेट ₹1,36,015 प्रति 10 ग्राम था। हैदराबाद में 24 कैरेट ₹1,48,810 और 22 कैरेट ₹1,36,409 प्रति 10 ग्राम रहा। चेन्नई में 24 कैरेट सोना ₹1,49,070 और 22 कैरेट ₹1,36,648 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।
बड़े ज्वेलर्स ने भी घटाए दाम
इस खबर के बाद भारत में प्रमुख ज्वेलरी ब्रांड्स की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में Tanishq के 22 कैरेट सोने का भाव ₹13,810 प्रति ग्राम रहा, जबकि 25 सितंबर को यह ₹14,040 प्रति ग्राम था।
Malabar Gold & Diamonds, Kalyan Jewellers और Joyalukkas में दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत ₹13,765 प्रति ग्राम थी। 25 सितंबर को इन तीनों ब्रांड्स में यही भाव ₹14,010 प्रति ग्राम था। यही दरें मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, तिरुवनंतपुरम और बेंगलुरु में भी दर्ज की गईं।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के 28 सितंबर के AM indicative rates के मुताबिक 999 फाइन गोल्ड ₹14,805 प्रति ग्राम, 22 KT सोना ₹14,450, 20 KT ₹13,176, 18 KT ₹11,992 और 14 KT ₹9,549 प्रति ग्राम था। 999 सिल्वर की दर ₹2,23,192 प्रति किलोग्राम थी।
सोने के गिरने की वजह
सोने की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें सबसे अहम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी है।
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड पिछले सप्ताह 5.23 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। सोमवार को भी यह करीब 5.20-5.22 फीसदी के आसपास बनी रही। 30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी 5.44 फीसदी तक पहुंची, जो 2004 के बाद का उच्च स्तर है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर सोने पर इसलिए पड़ता है क्योंकि सोना कोई ब्याज या यील्ड नहीं देता। जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित साधनों पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशकों के लिए बिना यील्ड वाले सोने को रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। यही कारण है कि ऊंची यील्ड सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है।
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फेड की ब्याज दर पर बाजार की नजर
सोने की मौजूदा चाल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। FXStreet के मुताबिक, फेड ने 16 सितंबर को दर को 3.75-4.00 फीसदी के दायरे तक बढ़ाया था और उसके 18 नीति-निर्माताओं में से 16 ने इस साल कम से कम एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई थी। बाजार में अक्टूबर के अंत की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की संभावना करीब 66-70 फीसदी तक आंकी जा रही थी।
ब्याज दरों को लेकर यह बदलती उम्मीद सोने के लिए महत्वपूर्ण है। अगर बाजार को लगता है कि अमेरिकी फेड महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दरें ऊंची रखेगा या आगे और बढ़ाएगा, तो बॉन्ड यील्ड और डॉलर को समर्थन मिल सकता है। इससे डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर दबाव बढ़ता है।
मजबूत डॉलर ने भी बढ़ाया दबाव
सोने की कीमत में गिरावट का एक और कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स पिछले सप्ताह करीब 101.40 के तीन महीने के उच्च स्तर तक पहुंचा और सोमवार को लगभग 100.85 के आसपास था। डॉलर की मजबूती आमतौर पर डॉलर में कीमत वाले सोने को दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगा बनाती है, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है।
इस समय बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों ही सोने के लिए प्रतिकूल दिशा में जा रहे हैं। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद गोल्ड को अपेक्षित सुरक्षित-निवेश समर्थन नहीं मिल रहा।
कच्चा तेल और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर
मौजूदा गिरावट की एक अहम कड़ी कच्चे तेल की कीमतों से भी जुड़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता के कारण तेल की आपूर्ति और परिवहन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर अपनी शर्तों में नरमी नहीं दिखाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद तनाव और बढ़ा। इस घटनाक्रम ने ऊर्जा कीमतों को ऊंचा बनाए रखा।
सामान्य परिस्थितियों में भू-राजनीतिक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें सोने की सुरक्षित निवेश मांग बढ़ा सकती हैं। लेकिन इस बार बाजार की प्रतिक्रिया अलग रही है। ऊंचे तेल भाव से महंगाई की चिंता बढ़ रही है और इससे अमेरिकी फेड की ओर से ब्याज दरें ऊंची रखने या और बढ़ाने की संभावना मजबूत होती है। यही कड़ी सोने पर दबाव डाल रही है।
किस दिशा में जा सकती है सोने की कीमत?
सोने की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर रह सकती है। बाजार में अक्टूबर की फेड बैठक को लेकर उम्मीदें अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं।
PL Capital के हेड ऑफ कमोडिटीज आशीष राजोडिया के अनुसार, MCX गोल्ड के लिए ₹1,48,000 और ₹1,46,000 महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर हैं, जबकि ₹1,52,500 और ₹1,55,000 प्रतिरोध स्तर हैं। उनके मुताबिक सोने की अगली दिशा फेड के अक्टूबर के फैसले और ईरान के साथ बातचीत में किसी संभावित प्रगति पर निर्भर कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी 4,200 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर सोना इस स्तर के नीचे टिकता है तो बाजार में कमजोरी आगे बढ़ सकती है, जबकि इसके ऊपर वापसी होने पर कीमतों में सुधार की संभावना बन सकती है।
पिछले साल क्या थी स्थिति?
बात करें अगर पिछले साल की, तो साल 2025 में सोने की कीमतों में 1979 के बाद की सबसे मजबूत तेजी देखी गई और 2026 में अब तक इसमें 75 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई थी। हाल के महीनों में सुरक्षित निवेश की मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण भी सोने को समर्थन मिला।
इसलिए 28 सितंबर की तेज गिरावट के बावजूद सोने की कीमतें अभी भी पिछले सालों के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर हैं।
दूसरी ओर, चांदी ने भी हाल के वर्षों में बड़ी तेजी दिखाई है। चांदी की कीमत 2023-24 में करीब ₹78,600 प्रति किलोग्राम के स्तर से बढ़कर सितंबर 2026 में ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम से ऊपर तक पहुंच चुकी थी।
सोने और चांदी में सोमवार की गिरावट इस बात को दिखाती है कि कीमती धातुओं की कीमत केवल भू-राजनीतिक जोखिम से तय नहीं होती। ब्याज दरों की उम्मीद, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर, कच्चा तेल और वैश्विक निवेशकों की धारणा भी इनकी कीमतों पर बड़ा असर डालती है। आने वाले दिनों में अमेरिकी फेड की नीति और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रम बाजार के लिए प्रमुख संकेत बने रहेंगे।
