Thursday, 05 November 2026
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गांधीनगर में 1.27 करोड़ रुपये का लेन-देन विवाद, आरोपियों ने जिम में घेरकर किया जानलेवा हमला, 11 गिरफ्तार

डीलरशिप, राजनीतिक नियुक्ति का झांसा देकर 1.27 करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़ा विवाद एक खूनी संघर्ष में तबदील हो गया। जानिए कैसे समझौते के लिए बुलाई गई बैठक हिंसा में बदल गई और पुलिस जांच में क्या सामने आया।

गांधीनगर: गुजरात की राजधानी गांधीनगर में 1.27 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन और धोखाधड़ी के विवाद ने ऐसा हिंसक रूप ले लिया। समझौते के लिए बुलाई गई बैठक खूनी हमले में बदल गई। कुडासन इलाके के एक जिम में हुई इस वारदात में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जै रही है।

घटना के बाद गुजरात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गई।

पुलिस के अनुसार, यह विवाद केवल पैसों का नहीं था, बल्कि कथित तौर पर राजनीतिक पहुंच, सरकारी नियुक्ति और कारोबारी अवसरों के नाम पर लिए गए धन से जुड़ा हुआ था। जब पैसा वापस मांगने का दबाव बढ़ा, तब दोनों पक्षों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक हमले तक पहुंच गया।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

प्राथमिक जांच और दर्ज शिकायत के अनुसार, अहमदाबाद के नवा नरोडा निवासी उत्सव पटेल ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार और परिचितों से विभिन्न वादों के आधार पर बड़ी रकम ली गई थी।

शिकायत में कहा गया है कि साल 2025 के दौरान महेन्द्र राठौड़, जो उत्सव पटेल के पिता के परिचित बताए जाते हैं, ने गुजरात अल्कलीज़ एंड केमिकल्स लिमिटेड (GACL) की डीलरशिप दिलाने का भरोसा देकर लगभग 15 लाख रुपये नकद लिए थे।

इसके बाद कथित तौर पर एक और बड़ा प्रस्ताव सामने आया। आरोप है कि महेन्द्र राठौड़ ने राजस्थान में अपने राजनीतिक संबंधों का हवाला देते हुए एक व्यक्ति शिवुजीलाल चौधरी को राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) का चेयरमैन बनवाने का आश्वासन दिया। इस कथित नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए अग्रिम भुगतान की मांग की गई।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनवरी 2026 में इस उद्देश्य से लगभग 50 लाख रुपये दिए गए। बाद में विभिन्न बैंक ट्रांसफर और अन्य माध्यमों से भुगतान की कुल राशि बढ़ते-बढ़ते करीब 1.27 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

हालांकि समय बीतने के बावजूद न तो कथित डीलरशिप मिली और न ही कोई राजनीतिक नियुक्ति हुई। इसके बाद पैसा वापस मांगने का सिलसिला शुरू हुआ, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराता चला गया।

पैसे की मांग बढ़ी तो बढ़ने लगा तनाव

जांच में सामने आया है कि जब वादे पूरे नहीं हुए तो शिकायतकर्ता पक्ष ने रकम लौटाने की मांग शुरू कर दी। आरोप है कि कई बार बातचीत और संपर्क के प्रयास किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मई 2026 में भी दोनों पक्षों के बीच पैसे को लेकर तीखी बहस हुई थी। इसके बाद रिश्ते और अधिक खराब हो गए। दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव बना रहा और मामला टकराव की स्थिति में पहुंच गया।

इसी बीच विवाद को खत्म करने और समझौते का रास्ता निकालने के लिए एक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

समझौते के बहाने हमले की साजिश

पुलिस के अनुसार, विवाद सुलझाने के उद्देश्य से गांधीनगर के कुडासन इलाके में स्थित एक जिम में बैठक तय की गई। यह जिम भारत सिंह चंदावत नामक व्यक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है, जो शिकायतकर्ता पक्ष का परिचित है।

बताया गया कि दोनों पक्षों के लोग यहां बातचीत के लिए मिलने वाले थे। लेकिन शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समझौते के नाम पर बुलाई गई इस बैठक के पीछे एक अलग ही योजना तैयार की गई थी।

जांच अधिकारियों का कहना है कि महेन्द्र राठौड़ अपने पुत्र अभिमन्यु सिंह राठौड़ और कई अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचे। आरोप है कि उनके साथ आए कुछ लोग चाकू, धारदार हथियारों और डंडों से लैस थे।

बैठक शुरू होने से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया और कुछ ही देर में वहां हिंसा भड़क उठी।

जिम के अंदर शुरू हुई हिंसा

एफआईआर में दर्ज आरोपों के मुताबिक, बातचीत के दौरान अचानक हमला कर दिया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और पैसों की मांग करने पर आक्रामक तरीके से हमला शुरू कर दिया।

आरोप है कि भारत सिंह चंदावत पर चाकू से वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके शरीर पर कई चोटें आईं और उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा।

जब उत्सव पटेल ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो वह भी हमले का शिकार हो गए। शिकायत के अनुसार, उन पर भी धारदार हथियारों से कई वार किए गए। उनके हाथ, पैर, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं।

घटना के दौरान जिम में अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों ने किसी तरह घायल व्यक्तियों को बचाने की कोशिश की और बाद में उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

जिम से बाहर भी जारी रहा विवाद

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हिंसा केवल जिम परिसर तक सीमित नहीं रही। घटना के बाद सड़क पर भी तोड़फोड़ और हंगामे का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो में कुछ लोग एक वाहन को नुकसान पहुंचाते दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा और जांच को तेज किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो ने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर किया और इसके बाद आरोपियों की पहचान तथा गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई

घटना की सूचना मिलने के बाद इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शिकायत और उपलब्ध सबूतों के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर घटनास्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम रिकंस्ट्रक्शन) भी कराया ताकि यह समझा जा सके कि हमला किस प्रकार किया गया था और उसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, गंभीर चोट पहुंचाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सिर्फ हमला या कोई बड़ी साजिश?

जांच एजेंसियां अब इस मामले के दो अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।

पहला पहलू जिम में हुआ हिंसक हमला है, जिसमें कई लोग घायल हुए। दूसरा और अधिक महत्वपूर्ण पहलू वह कथित आर्थिक धोखाधड़ी है, जिसके तहत राजनीतिक प्रभाव, सरकारी पद और कारोबारी अवसर दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये लिए जाने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वास्तव में सरकारी या राजनीतिक पद दिलाने के नाम पर पैसा लिया गया था, या फिर यह निजी वित्तीय लेन-देन का विवाद था जो बाद में आपराधिक टकराव में बदल गया।

गुजरात में चर्चा का विषय बना मामला

गांधीनगर की यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें कथित राजनीतिक पहुंच, करोड़ों रुपये का लेन-देन, सरकारी पद का वादा और फिर हिंसक हमला सभी तत्व एक साथ दिखाई देते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर विवाद का समाधान हो जाता तो शायद मामला इस हद तक नहीं पहुंचता। वहीं कानून-व्यवस्था के जानकारों का मानना है कि किसी भी आर्थिक विवाद को हिंसा के जरिए सुलझाने की कोशिश समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।

फिलहाल सभी 11 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक लेन-देन, कथित धोखाधड़ी और हमले की पूरी साजिश से जुड़े हर पहलू की विस्तार से जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियाँयां या नए खुलासे भी सामने आ सकते हैं।

गांधीनगर का यह मामला फिलहाल एक साधारण पैसों के विवाद से कहीं आगे बढ़ चुका है और अब यह कथित धोखाधड़ी, राजनीतिक प्रभाव के दावों तथा सुनियोजित हिंसक हमले की बहुआयामी जांच का विषय बन गया है।

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MD Faijan

लेखक

मोहम्मद फैजान न्यूज़ ऑफ द डे में पत्रकार हैं, जहाँ वे खेल, मनोरंजन, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों को कवर करते हैं। इससे पहले वे यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी में सोशल मीडिया एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने डिजिटल कंटेंट मैनेजमेंट और ऑडियंस एंगेजमेंट का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले से संबंध रखने वाले फैजान आधुनिक मीडिया कार्यप्रणालियों की अच्छी समझ रखते हैं और कहानी कहने के विभिन्न रूपों में गहरी रुचि रखते हैं।

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