दिल्ली की राजनीति में सज्जन कुमार के योगदान को याद करते हुए विजय शंकर चतुर्वेदी ने जताया गहरा शोक
नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद श्री सज्जन कुमार जी का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से दिल्ली के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें जनसेवा के प्रति समर्पित नेता के रूप में याद किया।
श्री सज्जन कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1977 में निगम पार्षद के रूप में की थी। अपने अथक परिश्रम, जनसंपर्क और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के बल पर उन्होंने शीघ्र ही दिल्ली की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर ली। इसके बाद वे कई बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और सांसद के रूप में दिल्ली तथा देश की जनता की सेवा करते रहे।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में श्री सज्जन कुमार ने हमेशा आम लोगों के सुख-दुःख में सहभागी बनकर कार्य किया। वे एक मृदुभाषी, मिलनसार, सहज एवं जन-जन में लोकप्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे। उनके निवास एवं कार्यालय के द्वार सदैव आम जनता के लिए खुले रहते थे और वे लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहते थे। यही कारण था कि वे केवल एक राजनीतिक नेता ही नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए विश्वास और अपनत्व का प्रतीक बन गए थे।
दिल्ली के विकास, जनकल्याण एवं संगठन को मजबूत बनाने में उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। कांग्रेस पार्टी के सशक्त नेताओं में उनकी गिनती होती थी और उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन से कांग्रेस परिवार ने एक अनुभवी, लोकप्रिय एवं समर्पित नेता को खो दिया है।
एक्रेडिटेड जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (पंजीकृत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राष्ट्र टाइम्स के संपादक श्री विजय शंकर चतुर्वेदी ने श्री सज्जन कुमार जी के निधन पर गहरा दुःख एवं शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि श्री सज्जन कुमार जी का जीवन जनसेवा, संघर्ष और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। वे हमेशा पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों के प्रति स्नेहपूर्ण व्यवहार रखते थे और सभी वर्गों में समान रूप से सम्मानित थे।
श्री चतुर्वेदी ने कहा कि दिल्ली की राजनीति में श्री सज्जन कुमार का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उनका सरल स्वभाव, मधुर वाणी, जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता तथा लोगों के प्रति आत्मीयता उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान प्रदान करती थी। उनके निधन से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
