दुबई की धरती पर रविवार का दिन न्यूज़ीलैंड महिला क्रिकेट के लिए सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। सोफी डिवाइन की अगुवाई में व्हाइट फर्न्स ने साउथ अफ्रीका को हराकर पहली बार महिला टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही न्यूज़ीलैंड टूर्नामेंट के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज़ के बाद ट्रॉफी जीतने वाली चौथी टीम बन गई है।
न्यूज़ीलैंड की इस जीत को और भी खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह उनका दूसरा बड़ा आईसीसी खिताब है। इससे पहले साल 2000 में उन्होंने अपने घर पर वनडे विश्व कप ट्रॉफी उठाई थी। लगभग 14 साल बाद फाइनल में पहुँची टीम ने इस बार कोई चूक नहीं की और शानदार प्रदर्शन से खिताब पर कब्ज़ा जमाया।
मैच की शुरुआत में टॉस जीतकर साउथ अफ्रीका ने न्यूज़ीलैंड को पहले बल्लेबाज़ी के लिए बुलाया। लेकिन यही फैसला उनके लिए भारी पड़ा। मेलि केर (43), ब्रूक हॉलिडे (38) और सूज़ी बेट्स (32) ने बेहतरीन पारियाँ खेलीं और टीम को मज़बूत स्कोर 158/5 तक पहुँचाया। इसके बाद गेंदबाज़ी में भी न्यूज़ीलैंड हावी रहा। केर ने गेंद से भी कमाल दिखाते हुए 3/24 झटके, जबकि रोज़मेरी मेयर ने 3/25 लेकर साउथ अफ्रीका की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आखिरकार प्रोटियाज टीम 32 रन से पीछे रह गई और ट्रॉफी न्यूज़ीलैंड के नाम हो गई।
यह खिताबी सफर भी किसी कहानी से कम नहीं रहा। टूर्नामेंट से पहले न्यूज़ीलैंड को चौथे नंबर की टीम माना गया था और उन्हें ग्रुप-ए में ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसी दिग्गज टीमों का सामना करना पड़ा। लेकिन डिवाइन की टीम ने धमाकेदार शुरुआत करते हुए भारत को मात दी और सेमीफाइनल में पहुँची। वहाँ वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ नज़दीकी मैच में 8 रन से जीत हासिल कर उन्होंने फाइनल का टिकट कटाया।
दुबई में खेले गए इस ऐतिहासिक फाइनल ने साफ कर दिया कि न्यूज़ीलैंड की महिला टीम अब किसी भी टीम से कम नहीं है। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल खिताब जीता बल्कि यह भी साबित कर दिया कि कठिन चुनौतियों के बावजूद अगर जज़्बा और जुनून हो, तो इतिहास रचा जा सकता है।
