Friday, 14 August 2026
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दिल्ली में 10 लाख बच्चों की पढ़ाई अधर में, किताबें नहीं मिलीं, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, शिक्षा सचिव पर अवमानना के आरोप

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

राजधानी में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले करीब 10 लाख छात्रों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है, जहां शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में आरोप है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किताबों का वितरण समय पर नहीं किया गया, जिससे बच्चों की बुनियादी शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। यह याचिका गैर-सरकारी संगठन सोशल जूरिस्ट की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के माध्यम से दायर की गई है।

अदालत के आदेश के बावजूद नहीं बंटी किताबें

याचिका में कहा गया है कि शिक्षा विभाग ने जानबूझकर अदालत के आदेशों की अनदेखी की। आरोप है कि 2026-27 सत्र शुरू होने के कई हफ्ते बाद भी छात्रों को जरूरी शैक्षणिक सामग्री नहीं दी गई। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत ही बाधित हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले भी इस मुद्दे पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया था। 8 अप्रैल 2024 को सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि सभी छात्रों को समय पर मुफ्त में किताबें, कॉपियां और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 4 जुलाई 2024 के आदेश में अदालत ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए समयसीमा का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया था।

अब कार्रवाई की मांग

अब दाखिल अवमानना याचिका में संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत शिक्षा सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब अदालत के आदेश और सरकारी आश्वासन दोनों मौजूद हैं, तब भी देरी होना प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आदेश की अवहेलना है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि किताबें समय पर नहीं मिलने से छात्रों की शैक्षणिक प्रगति बाधित हो रही है। शुरुआती महीनों में ही पढ़ाई का नुकसान होने से पूरे सत्र पर असर पड़ सकता है।

गर्मी की छुट्टियां और बढ़ेगी परेशानी

जानकारी के मुताबिक, सरकारी स्कूल 9 मई से गर्मी की छुट्टियों के लिए बंद हो जाएंगे और 1 जुलाई को दोबारा खुलेंगे। ऐसे में अगर अभी किताबें नहीं मिलीं, तो छात्रों को करीब तीन महीने तक बिना पाठ्य सामग्री के ही रहना पड़ेगा। याचिका में यह भी बताया गया है कि शिक्षा विभाग के अपने आंतरिक दिशा-निर्देशों के अनुसार किताबों का वितरण मार्च के आखिरी सप्ताह या सत्र शुरू होते ही कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन इस बार तय समयसीमा का पालन नहीं किया गया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला सिर्फ किताबों की देरी तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शुरुआती महीनों की पढ़ाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किताबों की कमी उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों को प्रभावित कर सकती है। अब निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि बुधवार को इस मामले पर सुनवाई हो सकती है, जहां अदालत प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है।

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IK

Imran Khan

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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