NEET Paper Leak: साजिश का ‘पर्दाफाश’ करने के लिए 5 आरोपी 7 दिन की CBI रिमांड पर, WhatsApp-Telegram पर बिका था भविष्य

नासिक से गुरुग्राम तक फैला जाल, 12 लाख में हुआ था डील का सौदा

कोर्ट में CBI ने कहा- पेपर लीक का मास्टरमाइंड ढूँढना अभी बाकी

नई दिल्ली, न्यूज ऑफ द डे

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को गिरफ्तार पांचों मुख्य आरोपियों को 7 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने सीबीआई की उस दलील को स्वीकार कर लिया, जिसमें कहा गया था कि इस पूरे ‘एजुकेशन स्कैम’ की जड़ों तक पहुँचने के लिए इन आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ जरूरी है।

CBI के रडार पर ये 5 चेहरे

जांच एजेंसी ने देश के अलग-अलग हिस्सों से इन आरोपियों को दबोचा है:

शुभम खैरनार: नासिक (महाराष्ट्र)
मांगीलाल बिवाल: जयपुर (राजस्थान)
विकास बिवाल: जयपुर (राजस्थान)
दिनेश बिवाल: जयपुर (राजस्थान)
यश यादव: गुरुग्राम (हरियाणा)

कैसे रची गई साजिश? (CBI के बड़े खुलासे)

कोर्ट में पेशी के दौरान सीबीआई के वकीलों ने पेपर लीक की पूरी ‘क्रोनोलॉजी’ समझाई:-

अप्रैल 2026 में हुई पहली डील: नासिक के शुभम ने यश यादव को बताया था कि मांगीलाल अपने बेटे के लिए पेपर चाहता है और इसके लिए 10 से 12 लाख रुपये देने को तैयार है।

Telegram पर आया पेपर: 29 अप्रैल को यश यादव ने कथित तौर पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर पीडीएफ फॉर्मेट में टेलीग्राम पर शेयर कर दिए।

रिश्तेदारों में बांटा गया पेपर: मांगीलाल ने सिर्फ अपने बेटे अमन के लिए ही नहीं, बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी प्रिंटेड कॉपी बांटी ताकि ‘मुनाफा’ कमाया जा सके।

500-600 सवालों का ‘जैकपॉट’: शुभम ने दावा किया था कि वह यश यादव को ऐसे सवाल देगा जिन्हें पढ़कर कोई भी टॉप मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर सकता है।

डिजिटल सबूत: चैट डिलीट की, फोरेंसिक टीम निकालेगी सच

सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपियों के फोन से पेपर लीक से जुड़ी कई व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम चैट मिली हैं। हालांकि, पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने काफी डेटा डिलीट कर दिया था। अब फोरेंसिक जांच के जरिए उस डिलीटेड डेटा को रिकवर किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि लीक का असली ‘सोर्स’ (NTA अधिकारी या प्रिंटिंग प्रेस) कौन है।

अब आगे क्या?

3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है। सीबीआई अब इन सातों दिनों में आरोपियों को उन ठिकानों पर ले जाएगी जहाँ पेपर की फोटोकॉपी हुई और पैसों का लेनदेन हुआ। एजेंसी को शक है कि इस रैकेट के तार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कुछ अधिकारियों से भी जुड़े हो सकते हैं।

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