कोरोना जेएन 1: एम्स में स्पेशल वार्ड से लेकर आरटीपीसीआर टेस्ट तक शुरू करने के आदेश

एक जेएन 1 और दो ओमिक्रॉन के मरीजों की पुष्टि

दिल्ली स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने की है पुष्टि

नई दिल्ली।

दिल्ली में फिलहाल कोरोना के नए वेरिएंट जेएन 1 के पहले मामले की पुष्टि हुई है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने नए वेरिएंट की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 3 सैंपल को जांच के लिए भेजा गया था। इसमें से एक सैंपल में जेएन 1 वेरिएंट का संक्रमण पाया गया है, जबकि बाकी दो सैंपल में ओमिक्रॉन की पुष्टि हुई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के अनुसार पिछले 24 घंटे में दिल्ली में कोरोना के दो नए मरीजों की पुष्टि हुई है। अभी सिर्फ चार से पांच मरीज ही इलाज के लिए एडमिट हैं। अभी इस वायरस की वजह से किसी की जान नहीं गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने भी देश में कोरोनो वायरस मामलों में अचानक वृद्धि के बाद संदिग्ध या पॉजिटिव केस के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं।

आरटीपीसीआर जांच फिर से शुरू

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दक्षिण भारत में कोरोना के मामलों में इजाफा दिख रहा है। जहां तक दिल्ली की बात है तो एहतियात के तौर पर कोविड की जांच के लिए आरटीपीसीआर जांच शुरू कर दी गई है। औसतन 250 से 400 सैंपल की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि हेल्थ सेक्रेटरी को रोज की कोविड रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अगर कोविड का नया वेरिएंट भी है तो इसमें घबराने वाली बात नहीं है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार यह वेरिएंट भी माइल्ड है। हां, सबको सावधानी जरूर रखनी चाहिए। इसमें कोई नुकसान नहीं है। इसलिए घबराएं नहीं, और न ही पैनिक हों। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में अभी जिनोम जांच एलएनजेपी अस्पताल में हो रही है। पहले आईएलबीएस अस्पताल में भी जिनोम जांच होती थी, लेकिन अभी वहां से भी सैंपल एलएनजेपी ही भेजे जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो एलएनजेपी अस्पताल में ही जिनोम सिक्वेंसिंग की गई है और उन्हीं की जांच में यह वेरिएंट पाया गया है।

एम्स भी हुआ एक्टिव

कोरोना के नए वेरिएंट जेएन 1 को लेकर एम्स ने भी स्क्रीनिंग ओपीडी शुरू करने का फैसला किया है। एम्स में हुई बैठक में इमरजेंसी में कोविड की स्क्रीनिंग होगी। जहां पर सीवियर एक्यूट रेसप्रेट्री इंफेक्शन के मरीज, जिन्हें सर्दी, खांसी, जुकाम, सांस लेने में दिक्कत हो तो ऐसे मरीजों की कोविड की जांच भी होगी। उन्हें अन्य मरीजों से अलग रखकर जांच की जाएगी। एम्स ने कोरोना के एडमिट मरीजों के लिए भी आदेश जारी किया है। अगर कोई पॉजिटिव मरीज आता है तो उसे एडमिट कर इलाज किया जा सके। सी-6 वॉर्ड में 12 बेड रिजर्व रखने का आदेश दिया गया है। बता दें कि एम्स दिल्ली के निदेशक ने बुधवार को कोविड​​-19 आकस्मिक उपायों पर अस्पताल के सभी विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक की। बैठक में कोविड​​-19 परीक्षण पर नीति, पॉजिटिव मरीजों और उनके अस्पताल में भर्ती के क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

ऐसे पता चलता है नए वेरियंट का

सूत्रों का कहना है कि आईएलबीएस अस्पताल सुपर स्पेशलिटी है। यहां पर लिवर ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी होती है। इसलिए इंफ्लूएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) और सीवियर एक्यूट रेसप्रेट्री इंफेक्शन (एसएआरआई) के लक्षण वाले मरीजों की आरटीपीसीआर जांच जरूर की जाती थी। अस्पताल में कभी जांच बंद नहीं की गई। हाल में अक्टूबर में एक मामले और फिर दिसंबर में एक मामले इस अस्पताल में पाए गए थे, जिसके सैंपल की जिनोम जांच के लिए एलएनजेपी अस्पताल भेजा गया है। एक्सपर्ट का कहना है कि आरटीपीसीआर जांच में कोविड का पता चलता है। अमूमन डॉक्टर को इलाज या संक्रमण की पुष्टि के लिए यही जांच जरूरी होती है। लेकिन अभी वायरस ने कोई बदलाव तो नहीं हुआ है। नया वेरिएंट का पता लगाने के लिए जिन मरीजों के सैंपल पॉजिटिव आए हैं, उन सैंपल की जिनोम सिक्वेंसिंग की जाती है। इससे नए वेरिएंट का पता चलता है।

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