Wednesday, 26 August 2026
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डॉ. के.ए. पॉल ने आर. कृष्णैया के भाजपा में शामिल होने की तीखी आलोचना की, कहा- बीसी समुदाय के प्रति किया विश्वासघात

बीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों के एकजुट होकर जातिवाद और पारिवारिक राजनीति के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता पर दिया जोर

नई दिल्ली, (न्यूज ऑफ द डे)

आंध्र भवन में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रजा शांति पार्टी के नेता डॉ. के.ए. पॉल ने पूर्व सांसद और बीसी नेता आर. कृष्णैया के भाजपा में शामिल होने के फैसले की तीखी आलोचना की और इसे पिछड़े वर्ग (बीसी) समुदाय के प्रति विश्वासघात करार दिया। इस दौरान उन्होंने तेलुगू राज्यों में बीसी समुदाय के राजनीतिक हाशिए पर होने और राजनीतिक सुधार की आवश्यकता पर बात की।

डॉ. पॉल ने कहा कि पिछले 78 वर्षों में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बीसी समुदाय, जो 60% आबादी का हिस्सा है, को प्रमुख नेतृत्व भूमिकाओं से बाहर रखा गया है। उन्होंने बीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों के एकजुट होकर जातिवाद और पारिवारिक राजनीति के खिलाफ एक आंदोलन शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के सिद्धांत के अनुरूप हो।

1. आर. कृष्णैया का बीसी समुदाय के प्रति विश्वासघात

डॉ. पॉल ने आर. कृष्णैया के पार्टी बदलने की आदत की आलोचना करते हुए कहा, “आर. कृष्णैया ने बीसी राजनीति को अवसरवादिता का खेल बना दिया है। टीडीपी से लेकर वाईएसआरसीपी और अब भाजपा, वे बीसी वोट बैंक को व्यक्तिगत फायदे के लिए बेच रहे हैं। यह नेतृत्व नहीं, बल्कि उन लाखों तेलुगू राज्य के वोटरों के विश्वास के साथ विश्वासघात है जिन्होंने उन पर विश्वास किया।”

2. राजनीतिक वंशवाद और विदेशी प्रभाव का विरोध

डॉ. पॉल ने भारतीय राजनीति में राजनीतिक वंशवाद और विदेशी फंडिंग की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, “वंशवाद और विदेशी एजेंडों का समर्थन करने वाली पार्टियों से हाथ मिलाना, अंबेडकर के समानता और आत्मनिर्भरता के सपने का सीधा अपमान है।”

3. बीसी नेतृत्व और प्रतिनिधित्व की आवश्यकता

डॉ. पॉल ने पिछले 78 वर्षों में बीसी समुदाय के मुख्यमंत्री पद से गायब रहने का जिक्र करते हुए कहा, “क्यों 5% रेड्डी और 1% वेलामा (डोरा) राजनीति में हावी रहें जब बीसी तेलंगाना की 60% आबादी हैं? अब बीसी समुदाय को नेतृत्व करना चाहिए और आर. कृष्णैया जैसे स्वार्थी नेताओं द्वारा हाशिए पर नहीं डाला जाना चाहिए।”

4. हाशिए पर रहने वाले समुदायों को एकजुट करने का आह्वान

डॉ. पॉल ने जमीनी स्तर पर आंदोलन की जरूरत की बात करते हुए तेलंगाना के 12,000 सरपंचों से आगामी चुनावों में बीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों के एकजुट बैनर के तहत हिस्सा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है—यह हमारी आवाज़ को पुनः प्राप्त करने और अंबेडकर के समानता और न्याय के सपने को पूरा करने का आंदोलन है।”

डॉ. के.ए. पॉल का बयान:

“आर. कृष्णैया का भाजपा में जाना बीसी समुदाय के लिए स्पष्ट विश्वासघात है। ऐसे नेता हमारे समानता के संघर्ष को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के खेल में बदल चुके हैं। अब बहुत हो चुका! हमें एकजुट होना होगा, उठना होगा और जो हमारा है उसे वापस लाना होगा। एक साथ मिलकर हम इस जातिवाद और पारिवारिक राजनीति का अंत कर सकते हैं और भविष्य को हमारे लोगों की वास्तविक विविधता के अनुरूप बना सकते हैं।”

डॉ. पॉल ने अपने बयान के अंत में मतदाताओं से अपील की कि वे अवसरवादी नेताओं को नकारें और ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन करें जो हाशिए पर रहने वाले समुदायों की भलाई को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा, “अब बदलाव का समय है। आइए हम एकजुट हों और एक नई राजनीतिक वास्तविकता का निर्माण करें जहाँ नेतृत्व वास्तव में लोगों का प्रतिनिधित्व करता हो।”

डॉ. के.ए. पॉल के बारे में:

डॉ. के.ए. पॉल एक वैश्विक शांति दूत और प्रजा शांति पार्टी के संस्थापक हैं। वे सामाजिक न्याय, समानता और भारत सहित दुनिया भर के अविकसित समुदायों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं।

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BN

Bureau NOTD

लेखक

NOTD News के लिए नियमित रूप से समाचार लिखते हैं।

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