एसआईपी एकेडमी के 22 साल पूरे — 1250+ केंद्रों के साथ बच्‍चों को रॉकेट लॉन्च देखने का सुनहरा मौका

नई दिल्ली, 8 अगस्त 2025

भारत की स्वदेशी स्किल डेवलपमेंट संस्था एसआईपी एकेडमी ने 22 साल पूरे करते हुए एक अहम उपलब्धि हासिल की है। देशभर में 1250 से अधिक फ्रेंचाइज़ी सेंटर्स के साथ यह अब भारत के सबसे बड़े आफ्टर-स्कूल लर्निंग नेटवर्क्स में से एक बन चुकी है।

एसआईपी एकेडमी, जो एसआईपी अबेकस, ग्लोबलआर्ट, मीकिड्स और क्रिको इंग्लिश जैसे प्रमुख प्रोग्राम्स संचालित करती है, ने अपना 22वां स्थापना दिवस चेन्नई के ग्रैंड चेन्नई बाय जीआरटी होटल्स में भव्य रूप से मनाया। इस मौके पर देशभर से आए प्रमुख फ्रेंचाइज़ी पार्टनर्स, पूर्व छात्र, शिक्षक और सहयोगी मौजूद रहे — वे सभी, जिन्होंने इस सफर में योगदान दिया है और अब तक 14 लाख से अधिक बच्‍चों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

जश्‍न में नई ऊर्जा जोड़ते हुए, एसआईपी एकेडमी ने तीन नई पहलों की घोषणा की, जो शिक्षा, रोमांच और पर्यावरण संरक्षण को साथ लाती हैं —

1.राष्ट्रीय स्तर की मैथ प्रतियोगिता — ग्रैंड प्राइज़: इसरो रॉकेट लॉन्च देखने का अवसर
एसआईपी का प्रमुख प्रतियोगिता कार्यक्रम एरिथमैटिक जीनियस कॉन्टेस्ट (AGC) इस साल अपने 10वें संस्करण में एक नया रोमांच लेकर आया है। इस साल के राष्ट्रीय विजेताओं को श्रीहरिकोटा में इसरो के रॉकेट लॉन्च को लाइव देखने का अवसर मिलेगा — जहाँ वे भारत की अंतरिक्ष और विज्ञान की सबसे साहसिक उपलब्धियों के साक्षी बनेंगे।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम वैश्विक मंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है — चंद्रयान-3 की सफलता, आदित्य-एल1 सोलर मिशन और अब आने वाला गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन इसका प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष यात्रा आत्मनिर्भरता, नवाचार और बुलंद महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बन चुकी है, जो न केवल वैज्ञानिकों, बल्कि देशभर के छात्रों को भी प्रेरणा दे रही है। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र से बच्‍चों को सीधे रूबरू कराकर एसआईपी एकेडमी केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता का सम्मान नहीं कर रही, बल्कि बच्‍चों की कल्पनाओं को उड़ान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, गणित के सपनों को ऊर्जा और देश की वैज्ञानिक आकांक्षाओं में नई पीढ़ी की भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।

2.तीन नए मियावाकी वन — छात्रों को बनाएंगे पर्यावरण योद्धा
जलवायु परिवर्तन पर बढ़ती चिंताओं के बीच, एसआईपी एकेडमी ने सीखने की प्रक्रिया को प्रकृति से जोड़ते हुए एक ठोस कदम उठाया है। 22वें स्थापना वर्ष के अवसर पर संस्था कोलकाता, तंजावुर और शिवकाशी में तीन नए मियावाकी वन लगाएगी — ये घने, स्वदेशी पेड़ों से बने हरित क्षेत्र जापानी तकनीक से तैयार किए जाएंगे, जो तेज़ी से बढ़ते हैं।

ये शहरी वन बच्‍चों के लिए लिविंग क्लासरूम बनेंगे, जहाँ वे पर्यावरण के बारे में सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी से सीखेंगे कि प्रकृति की रक्षा कैसे की जाती है। यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि शिक्षा केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, स्थायित्व और जागरूक नागरिक बनाने का माध्यम भी है।

  1. देश की प्रतिभा को उजागर करने वाला नया राष्ट्रीय टीवी अभियान
    कार्यक्रम के दौरान एसआईपी अबेकस का नया टेलीविजन कमर्शियल लॉन्च किया गया, जो छात्रों के वास्तविक जीवन परिवर्तन की कहानी कहता है — जहाँ वे पहले शर्मीले और असमंजस में थे, लेकिन अब तेज़, आत्मविश्वासी और एकाग्र होकर सीख रहे हैं। देशभर में प्रसारित होने वाला यह अभियान एसआईपी को उन माता-पिता की पहली पसंद के रूप में स्थापित करेगा, जो अपने बच्‍चों के सर्वांगीण विकास की तलाश में हैं।

एसआईपी एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दिनेश विक्टर ने कहा, “एक ऐसी दुनिया में जहाँ हर कोई शॉर्टकट की दौड़ में है, हमने सच्चे कौशल निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी है — एक-एक ईंट जोड़कर, एक-एक बच्चे के माध्यम से। यह उपलब्धि हर उस छात्र, शिक्षक, फ्रेंचाइज़ी पार्टनर और अभिभावक की है, जिन्होंने हमारे मिशन पर भरोसा किया और उसे आगे बढ़ाया। हमारा अगला अध्याय असर को और व्यापक बनाने का है — नवाचार, स्थायित्व और पूरे दिल से की गई कोशिशों के साथ।”

अपने 23वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, एसआईपी एकेडमी केवल आगे नहीं बढ़ रही है, बल्कि भारत में आफ्टर-स्कूल लर्निंग के पूरे इकोसिस्टम को नई दिशा दे रही है। सफल फ्रेंचाइज़िंग मॉडल, सामाजिक सरोकार और स्केलेबल लर्निंग टूल्स के ज़रिये यह ब्रांड लगातार यह साबित कर रहा है कि असली शिक्षा तो स्कूल की घंटी बजने के बाद शुरू होती है।

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