टीम से बाहर, कॉन्ट्रैक्ट खत्म और चारों तरफ आलोचनाएं। जानिए कैसे ईशान किशन ने अंधेरे के सफर को पीछे छोड़ रायपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ ऐतिहासिक पारी खेल अपनी किस्मत बदल दी।
क्रिकेट का मैदान न केवल चौकों और छक्कों का खेल है, बल्कि यह टूटे हुए सपनों और फिर से उम्मीदें जगाने की एक जगह भी है। एक ओर तो स्टारडम की रोशनी है, दूसरी ओर गुमनामी का अंधेरा है। ईशान किशन की कहानी इन दोनों पहलुओं के बीच की है। जब 2023 के अंत में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और बीसीसीआई ने उनका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट छीन लिया, तो हर कोई यही सोच रहा था कि इस ‘पॉकेट डायनामाइट’ का करियर अब लगभग खतम हो गया है।
लेकिन ईशान किशन ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत जारी रखी। उनकी यह दृढ़ इच्छाशक्ति और जुनून उन्हें फिर से खड़ा करने में मदद करेगी, और शायद एक दिन वह अपने सपनों को पूरा करने में सफल होंगे, का करियर खत्म हो गया। लेकिन रायपुर के मैदान पर जो हुआ, वो सिर्फ एक पारी नहीं, बल्कि उन सभी सवालों का करारा जवाब था जो ईशान के वजूद पर उठाए जा रहे थे।
जब लगने लगा कि सब खत्म हो गया
एक समय ऐसा था जब ईशान किशन का नाम विवादों से जुड़ा था। घरेलू क्रिकेट न खेलने के कारण मिली फटकार और फिर सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से छुट्टी—ईशान किशन के लिए 2024-25 का समय किसी बुरे सपने से कम नहीं था। आलोचकों ने ईशान किशन को ‘लायबिलिटी’ करार दे दिया था और 2026 टी20 वर्ल्ड कप की रेस से ईशान किशन का नाम लगभग गायब हो चुका था।
लेकिन असली खिलाड़ी वही है जो मैदान के बाहर भी लड़ना जानता है। ईशान ने चुपचाप झारखंड की कप्तानी संभाली, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाया और अपनी टीम को पहली बार चैंपियन बनाया। 517 रनों के उस पहाड़ ने बीसीसीआई के दरवाजे फिर से खटखटाने शुरू कर दिए थे।।
32 गेंदें में बनया इतिहास
23 जनवरी 2026 की वो शाम रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम के नाम रही। न्यूजीलैंड ने 208 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। दबाव पहाड़ जैसा था, लेकिन ईशान के इरादे उससे भी ऊंचे थे।
- रिकॉर्ड तोड़ पारी: ईशान ने महज 21 गेंदों में अर्धशतक बनाकर न्यूजीलैंड की टीम की कमर तोड़ दी।
- आंकड़े: 32 गेंदों में 76 रन (11 चौके, 4 छक्के)।
- ऐतिहासिक जीत: सूर्यकुमार यादव के साथ मिलकर ईशान ने भारत को बहुत ही कम ओवर्स में जीत दिला दी। यह टी20 क्रिकेट के इतिहास में 200 से ज्यादा रनों का सबसे तेज सफल रन-चेज बन गया।
मैच के बाद जब ईशान की आंखों में आंसू थे, तो वह उनकी कड़ी मेहनत और उस अकेलेपन का दर्द था जिसे उन्होंने पिछले दो सालों में झेला था।
आलोचकों को दिया करारा जवाब
सीरीज शुरू होने से पहले तक जो लोग ईशान को टीम के लिए ‘जोखिम’ बता रहे थे, आज वही उन्हें ‘गेम चेंजर’ कह रहे हैं। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने साफ कर दिया है कि ईशान नंबर-3 पर टीम की नई ताकत हैं। उनका निडर अंदाज और पहली गेंद से प्रहार करने की क्षमता भारत को वर्ल्ड कप 2026 का सबसे मजबूत दावेदार बनाती है। अब सवाल यह नहीं है कि क्या ईशान खेलेंगे, बल्कि सवाल यह है कि विपक्षी गेंदबाज उन्हें रोकेंगे कैसे?
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