25.1 C
New Delhi
Monday, April 22, 2024
होमदेश-विदेशघर में ही दफ्तर है तो वकीलों से व्यावसायिक कर न ले...

घर में ही दफ्तर है तो वकीलों से व्यावसायिक कर न ले एमसीडी: दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई वकील घर में अपना ऑफिस चलाता है तो दिल्ली नगर निगम उस मकान पर व्यावसायिक भवन के रूप में संपत्तिकर नहीं वसूल सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि वकीलों के ऑफिस को ‘व्यावसायिक गतिविधि’के रूप में नहीं देखा जा सकता है। इस फैसले से उन वकीलों को राहत मिलेगी, जो आवासीय परिसर/ घर में ही ऑफिस बनाए हुए हैं।

जस्टिस नजमी वजीरी और जस्टिस सुधीर कुमार जैन की बेंच ने फैसले में कहा कि वकीलों के पेशे से जुड़ी गतिविधियों को ‘वाणिज्यिक गतिविधियों’ के रूप में नहीं देखा जा सकता। ऐसे में आवासीय परिसर में चलने वाला वकील का कार्यालय दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत व्यावसायिक भवन के रूप में संपत्तिकर के अधीन नहीं आता है।

मास्टर प्लान गतिविधियां चलाने की देता अनुमति
बेंच ने कहा कि दिल्ली का मास्टर प्लान (एमपीडी) 2021 कुछ शर्तों के साथ आवासीय भवनों में पेशेवर (प्रोफेशनल) गतिविधियां चलाने की अनुमति देता है। हालांकि बेंच ने साफ किया है कि मास्टर प्लान का उक्त प्रावधान, दिल्ली निगम को आवासीय भवनों से की जा रही पेशेवर गतिविधियों के लिए आवासीय मकान से वाणिज्यिक संपत्ति कर लगाने का अधिकार नहीं देता है। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ दाखिल दिल्ली निगम की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला दिया।

दिल्ली निगम ने 2013 में अधिवक्ता बी.एन. मैगन को नोटिस जारी कर संपत्तिकर की मांग की थी क्योंकि वह अपने घर से ही दफ्तर चला रहे थे। वकील ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने वकील के हक में फैसला सुनाया था। सिंगल बेंच ने फैसले में कहा था कि अधिवक्ताओं द्वारा दी जाने वाली सेवाएं पेशेवर गतिविधियां हैं, इसलिए उन्हें व्यापारिक प्रतिष्ठान के रूप में वर्गीकृत या श्रेणी के तहत कर के अधीन नहीं किया जा सकता है। अब हाईकोर्ट की डबल बेंच के इस फैसले से दिल्ली के हजारों वकीलों को बढ़ी राहत मिली है

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments