नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने नाइजीरिया की एक महिला के साथ 2014 में सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों को 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है और कहा है कि डीएनए विश्लेषण के दौरान महज वीर्य की गैर-मौजूदगी पीड़िता के दावे को नहीं झूठलाती, योनि में लिंग का प्रवेश बलात्कार के अपराध को साबित करने के लिए काफी है।

10 साल कम की सजा

हाईकोर्ट ने इस बात का संज्ञान लिया कि दोनों आरोपियों में से एक अविवाहित है और दूसरे को अपने बच्चों एवं माता-पिता की देखभाल करनी है और उन दोनों में सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों की 30 साल की जेल की सजा को कम करके 20 साल कर दी। यह फैसला भी जस्टिस मुक्ता गुप्ता की अध्यक्षता वाली कई पीठों की तरफ से सोमवार को दिये गये 65 फैसलों में से एक है।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस पूनम ए बंबा की बेंच ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर बातचीत करने के बाद यह साफ है कि पीड़िता का बयान न केवल पूरी तरह से विश्वसनीय है, बल्कि दूसरे तथ्यों और हालात से भी समर्थित है। इस अदालत को दोषसिद्धि के विवादित फैसले में कोई गलती नजर नहीं आती।’’ बता दें कि यह मामला 18-19 जून, 2014 की रात को हुआ था, जब नाइजीरियाई महिला जनकपुरी के डिस्ट्रिक्ट सेंटर में एक दोस्त की पार्टी से लौट रही थी। जब वह ऑटो की तलाश कर रही थी, तभी एक कार उसके पास रुकी और दोनों आरोपियों ने उसे कार में बैठा लिया। वे उसे एक मकान में ले गए और उसके साथ रेप किया। अपराध को अंजाम देने के बाद, उन्होंने उसे मेट्रो पिलर के पास फेंक दिया। दोनों ने उसका कीमती सामान से भरा बैग भी छीन लिया। इसके बाद महिला पुलिस थाने गई और उसने शिकायत दर्ज कराई। महिला द्वारा बताए गए घर के हिसाब से दोनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

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