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Friday, September 29, 2023
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दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल कैग(CAG)जांच के दायरे में, सरकारी बंगले के रिनोवेशन का होगा ऑडिट

नई दिल्ली।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक बंगले के रिनोवेशन की अब कैग ऑडिट करेगी। इस ऑडिट में सरकारी बंगले के रिनोवेशन में हुई अनियमितताओं और उल्लंघनों की विशेष जांच होगी।

बता दें कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) दिल्ली के 6, पलंग स्टाफ रोड सिविल लाइन्स स्थित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास के रिनोवेशन में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं का विशेष ऑडिट करेंगे। यह कदम केंद्र द्वारा इस संबंध में कैग से किए गए अनुरोध के बाद उठाया गया है।

गृह मंत्रालय ने यह एक्शन एलजी सचिवालय की 24 मई, 2023 की सिफारिश के बाद लिया है। 24 मई को एलजी ऑफिस ने केजरीवाल के सरकारी बंगले में रिनोवेशन के खर्चों से जुड़े मामले को लेकर कैग द्वारा विशेष ऑडिट की सिफारिश की थी। जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर आधिकारिक आवास के रिनोवेशन में वित्तीय अनियमितताओं की बात कही थी।

कोविड के समय बंगले का रिनोवेशन करा रहे थे सीएम

एलजी ने अपने पत्र में लिखा था कि सरकारी बंगले में रिनोवेशन के नाम पर बहुत पैसा खर्च किया गया था। यह सब उस वक्त किया जा रहा था जब देश में कोविड-19 महामारी अपने चरम पर थी। कोविड के कठिन समय में भी दिल्ली के सीएम अपने घर को संवारने में लगे थे। गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने लोक निर्माण विभाग के प्रभारी मंत्री की मिलीभगत से मुख्यमंत्री आवास के रिनोवेशन के नाम पर किए गए खर्च पर सवाल खड़े किए थे।

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के मुताबिक सीएम आवास के रिनोवेशन में निम्नलिखित अनियमितताएं

1) रिनोवेशन के नाम पर, एक नई इमारत का पुनर्निर्माण पीडब्ल्यूडी ने किया।

2) निर्माण शुरू करने से पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा संपत्ति के स्वामित्व का पता नहीं लगाया गया था।

3) शुरुआत प्रस्ताव मुख्यमंत्री के आवास में अतिरिक्त आवास देने का था, हालांकि बाद में मौजूदा भवन को गिराने के बाद पूरी तरह से नए निर्माण के प्रस्ताव को मंत्री द्वारा मंजूरी दे दी गई।

4) इस रिनोवेशन की शुरुआती लागत 15-20 करोड़ रुपये थी। हालांकि इसे समय-समय पर बढ़ाया गया था और रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 52,71,24,570/- रुपये (लगभग 53 करोड़ रुपये) खर्च किए गए हैं, जो शुरुआती अनुमान से 3 गुना से ज्यादा है। इसके अलावा रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रमुख सचिव (पीडब्ल्यूडी) के एप्रूवल से बचने के लिए 10 करोड़ रुपये से कम की राशि की विभाजित मंजूरी को कई बार में लिया गया।

5) इसके अलावा एमपीडी-2021 का घोर उल्लंघन किया गया है। एमपीडी-2021 भूमि पुनर्विकास के मामलों में जुड़ा भूमि कानून है।
(6) दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 के अनुसार 10 से ज्यादा के पेड़ों की कटाई के लिए शीर्ष अधिकारी की मंजूरी की जरूरत होती है। तो इससे बचने के लिए केजरीवाल सरकार ने 5 बार में अलग-अलग एप्रूवल लिए। पेड़ों की कटाई पांच बार में की गई। सबसे पहले 9 पेड़, फिर 2, फिर 6, फिर 6 और आखिरी में 5 पेड़ों की कटाई के लिए एप्रूवल लिया गया था। ऐसे करके कुल 28 पेड़ों को काटा गया। पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन से संबंधित यह मामला एनजीटी के समक्ष OA 334/2023 में भी पेंडिंग है।

दिल्ली सरकार ने दी थी सफाई
आवास में हुए रिनोवेशन को लेकर पहले भी काफी विवाद हो चुका है। इस मामले में आम आदमी पार्टी की तरफ से सफाई भी दी गई थी। सांसद और पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्डा ने कहा था कि जिस घर में केजरीवाल रहते हैं वह 1942 में बना था। चड्डा का कहना था कि घर के अंदर से लेकर बेडरूम तक छत से पानी टपकता था। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसका ऑडिट किया था। उनका कहना था कि यह एक सरकारी बंगला है।

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