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Wednesday, February 28, 2024
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1983 वर्ल्ड कप: टीम इंडिया ने 40 साल पहले आज ही किया था कमाल, टूटा था विंडीज का घमंड

नई दिल्ली

भारतीय खेलों के इतिहास में 25 जून का दिन बेहद खास है। 40 वर्ष पहले यानी साल 1983 में इसी दिन भारतीय क्रिकेट टीम पहली बार विश्व विजेता बनी थी। क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज पर हैरतअंगेज जीत दर्ज कर वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया था। इस स्वर्णिम सफर के दौरान कपिल देव की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने उम्मीदों के विपरीत प्रदर्शन कर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज जैसी दिग्गज टीमों को धूल चटाई थी।

बता दें कि यह वह दौर था जब ओलंपिक्स में लगातार गोल्ड जीत रही भारतीय हॉकी टीम अपनी चमक खो रही थी। फुटबॉल में भारत के नाम कोई खास उपलब्धि नहीं थी। क्रिकेट में भी कुछ ऐसा चमत्कार नहीं हुआ था कि प्रशंसक इस खेल से खुद को जोड़ सकें। कुल मिलाकर वह समय भारतीय खेल में निराशाजनक बीत रहा था। तभी आज ही के दिन मतलब 25 जून 1983 को भारतीय क्रिकेट में चमत्कार हुआ। कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने दो बार की मौजूदा चैंपियन वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। यही वह साल था जिसे भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत का साल कहा जाता है।

वेस्टइंडीज के साथ तोड़ा था इंग्लैंड का भी वर्चस्व
भारतीय टीम ने 40 साल पहले उस ऐतिहासिक जीत में विश्व क्रिकेट पर राज करने वाली वेस्टइंडीज के साथ ही इंग्लैंड के वर्चस्व को भी तोड़ा था। वेस्टइंडीज का 15 सालों से क्रिकेट पर दबदबा था। वर्ल्ड कप से ठीक पहले आयोजित तीन मैचों की वनडे सीरीज में भी उसने भारत को हराया था। ऐसे में भारत पर उसका पलड़ा भारी था। लेकिन टूर्नामेंट के अपने पहले ही मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को ही हराकर शानदार आगाज किया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम के सामने इंग्लैंड की मजबूत चुनौती थी। इंग्लैंड की टीम में ग्रीम फोलर, डेविड गावर, एलन लैंब, मैक गैटिंग, सर इयान बॉथम और बॉब विलिस जैसे दिग्गजों की फौज थी। लेकिन भारतीय टीम आसानी से 6 विकेट से जीत हासिल कर फाइनल में पहुंचने में सफल रही। फिर खिताबी मुकाबले में वेस्टइंडीज को ही हराकर दुनिया की दूसरी चैंपियन टीम बनने का गौरव हासिल किया।

खूब चले थे गेंदबाज
भारतीय क्रिकेट में हमेशा से बोलबाला बल्लेबाजों का रहा है लेकिन वह साल ऐसा था जब भारतीय गेंदबाज रफ्तार से न सही, लेकिन अपनी सटीक लाइन और लेंथ से विपक्षी टीम के लिए सिरदर्द बने हुए थे। 1983 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम को सफल बनाने में भी गेंदबाजों का ही सबसे बड़ा योगदान रहा था। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में टॉप-2 पोजिशन पर भारतीय गेंदबाज ही थे। रोजर बिन्नी ने 18 और मदनलाल ने 17 विकेट लिए थे। कपिल देव भी 12 विकेट लेकर सातवें स्थान पर थे। टूर्नामेंट में कुल पांच गेंदबाजों ने ही एक मैच में पांच विकेट लिए थे जिसमें कपिल भी शामिल थे।

दस साल से है आईसीसी ट्रॉफी का इंतजार
भारतीय टीम ने 1983 के बाद वर्ष 2011 में भी महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में वनडे वर्ल्ड कप जीता। 2007 में पहली बार आयोजित टी20 वर्ल्ड कप का खिताब भी भारत ने जीतकर इतिहास रचा। वर्ष 2013 में आखिरी बार भारत ने धोनी की ही अगुआई में चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। लेकिन इसके बाद से भारत के खाते में कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं आई। यह इंतजार लगातार 10 सालों से जारी है। यह भी इत्तेफाक है कि भारत ने अपना आखिरी आईसीसी खिताब जून में ही जीता था।

नहीं रहा एक सितारा
टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला खेलने वालों में सुनील गावसकर, कृष्णामाचारी श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, यशपाल शर्मा, संदीप पाटिल, कपिल देव (कप्तान), कीर्ति आजाद, रोजर बिन्नी, मदन लाल, सैयद किरमानी (विकेटकीपर) और बलविंदर संधू शामिल थे। इन स्टार खिलाड़ियों में यशपाल शर्मा का कोरोना महामारी से निधन हो गया।

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