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Sunday, October 1, 2023
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एम्स का शोध: कोरोना संक्रमण से फेफड़े क्यों हुए कठोर, शुरू की गई स्टडी

लंग्स में बन रहे हैं फाइब्रोसिस

नई दिल्ली।

कोरोना महामारी के दौरान प्रभावितों के फेफड़ों में आई खराबी की वजह जाने के लिए एम्स ने बड़े स्तर पर पहली स्टडी शुरू की है। इस अध्ययन में कोरोना महामारी के दौरान संक्रमित हुए 40 से 70 साल के प्रभावितों को शामिल किया जाएगा। इस शोध का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फेफड़ों के उत्तकों में आई कठोरता के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी में ये देखा गया कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के फेफड़ों के उत्तक(टिशू) कठोर हो रहे हैं। लंबे इलाज के बाद मरीज तो ठीक हो गए लेकिन कठोर हुए टिशू फिर से पहले की तरह कोमल नहीं हो पाए। जिससे प्रभावितों को अब भी सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे मरीजों के फेफड़ों में फाइब्रोसिस बन गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जिन मरीजों के फेफड़ों में फाइब्रोसिस बन गए हैं उसे फिर से सामान्य करना संभव नहीं है। इस शोध से अब यह पता लगाया जाएगा कि इसके लिए कौन से मॉलिक्यूलर जिम्मेदार हैं। वहीं कोरोना संक्रमण के बाद जिन मरीजों के फेफड़े ठीक रहे उनमें फाइब्रोसिस से बचने के लिए कौन से मॉलिक्यूलर काम कर रहे हैं।

फिजियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार इस अध्ययन के लिए 20-20 मरीजों का ग्रुप बनाया जा सकता है। ऐसे में मुफ्त जांच के दौरान कुल 80 मरीजों को चुना जा सकता है। इन मरीजों पर 3 साल तक अध्ययन किया जा सकता है। अध्ययन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान लाखों लोग संक्रमित हुए और काफी मरीज ऐसे थे जिन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था या फिर वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था। ऐसे मरीजों में ठीक होने के बाद भी काफी समस्या अब भी बनी है।

जाने फाइब्रोसिस के बारे में
यह फेफड़ों की एक बीमारी है जिसमें टिशू को नुकसान पहुंचता है। इससे रोगी को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। शरीर में ऑक्सीजन की कमी से हृदय और श्वसन संबंधी समस्याएं होती हैं। बता दें कि सामान्य फेफड़ों के टिशू काफी कोमल होते हैं जिस कारण सांस लेने और छोड़ने में आसानी होती है।

ऐसे चुना जा रहा मरीजों को
एम्स के फिजियोलॉजी विभाग ने मरीजों के चयन के लिए मुफ्त में फेफड़ों की जांच का अभियान शुरू किया है। लोगों से अपील की है कि 40 से 70 साल के जिस भी मरीज को कोरोना हुआ है वह कनवरजेन्स ब्लॉक की छठी मंजिल में आकर अपने फेफड़ों की जांच करवा सकता है। यहां विभाग की एडवांस लैब हैं जिसमें लंग्स पर विशेष रूप से काम किया जाता है। जांच के दौरान विभाग अध्ययन के आधार पर मरीजों का चयन करेगा। अध्ययन के लिए कोई भी व्यक्ति हिस्सा बन सकता है

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